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Covid In Delhi: जनवरी के बाद पॉजिटिविटी रेट 17% के पार, मौत के मामले तीन गुना बढ़े, क्या फिर लगेगा लॉकडाउन?

Thu, 11 Aug 2022 02:59 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली में बढ़े कोरोना के मामले - फोटो : PTI
राजधानी दिल्ली में एक बार फिर से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों से पता चलता है कि दैनिक रूप से केस दो हजार के आंकड़े पार कर रहे हैं। अध्ययनों में भले ही कोरोना के नए वैरिएंट्स की प्रकृति को हल्का बताया जा रहा है पर पिछले दिनों दिल्ली में संक्रमण के कारण मरने वालों के आंकड़ों में तीन गुना तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा पॉजिटिविटी रेट भी बढ़कर 17 फीसदी के ऊपर हो गया है। गौरतलब है कि दूसरी लहर के दौरान दिल्ली में पॉजिटिविटी रेट 10 फीसदी से ऊपर होने पर सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा कर दी थी।

दिल्ली में तेजी से बढ़ते हुए कोविड-19 के मामलों को देखते हुए गुरुवार को सरकार ने एक बार फिर से सभी लोगों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है। मास्क न पहनने वालों पर 500 रु. का जुर्माना लगाया जाएगा। दिल्ली में बिगड़ते हालात ने लोगों के मन में कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं, विशेषकर बढ़ा हुआ मृत्युदर काफी डराने वाला है। क्या एक बार फिर से हालात गंभीर होते जा रहे हैं, क्या कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण फिर से सख्त नियम और लॉकडाउन जैसी स्थिति आ सकती है? आइए इस बारे में विशेषज्ञ से विस्तार से समझते हैं?
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कोरोना संक्रमण और गंभीर होते हालात - फोटो : iStock
दिल्ली में बिगड़ते हालात

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में अगस्त के महीने में अब तक कोविड के कारण 40 मौतें हो चुकी हैं। यह जुलाई महीने के पहले दस दिनों की तुलना में अगस्त के पहले दस दिनों की तुलनात्मक रिपोर्ट है जिसमें मृत्यु के आंकड़े तीन गुना तक अधिक देखे गए हैं। जुलाई के पहले 10 दिनों में 14 लोगों की मौत हुई थी। दिल्ली में अब तक कोरोना संक्रमण के कारण कुल 26 हजार से अधिक लोग जान गवां चुके हैं। कोरोना के कारण मौत के एक बार फिर से बढ़ते हुए मामले लोगों के लिए काफी डराने वाले हैं।
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सकारात्मकता दर में तेजी से उछाल - फोटो : istock
सकारात्मकता दर 17% के पार

दिल्ली में कोविड पॉजिटिविटी रेट का बढ़ना भी गंभीर स्थिति का सूचक माना जा रहा है। पिछले एक सप्ताह के रोजाना के डेटा पर नजर डालें तो पता चलता है कि इस दौरान संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं,  दैनिक सकारात्मकता दर 17 को पार कर रही है। पिछले रविवार को शहर में कोरोना के कारण छह मौतें हुईं जिसमें सकारात्मकता दर बढ़कर 17.85 प्रतिशत हो गई, जो 21 जनवरी के बाद सबसे अधिक है। ताजा संक्रमण और मृत्यु के साथ, दिल्ली का केसलोड बढ़कर 19,73,394 हो गया है।

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ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट्स ने बढ़ाई मुश्किल - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं विशेषज्ञ? 

कोरोना के बिगड़ते हालात की गंभीरता को समझने के लिए हमने ग्रेटर नोएडा स्थित डॉ श्रेय श्रीवास्तव (असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेल मेडिसिन) से संपर्क किया। डॉ श्रेय ने दूसरी लहर के दौरान 105 साल की महिला को कोविड संक्रमण से ठीक किया था। डॉ श्रेय कहते हैं, दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों के लिए ओमिक्रॉन के बीए सब वैरिएंट्स को प्रमुख कारण के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि ये वैरिएंट्स अधिक गंभीर नहीं हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि अगर वैरिएंट्स गंभीर नहीं हैं तो कोरोना के कारण मृ्त्यु दर और संक्रामकता क्यों तेजी से बढ़ती देखी जा रही है? इस बारे में  डॉ श्रेय बताते हैं, जिन लोगों की हाल ही में कोविड से मौत हुई है उनमें से ज्यादातर लोग कोमोरबिडिटी के शिकार थे। कोमोरबिडिटी अब भी आपमें कोरोना के संक्रमण का प्रमुख जोखिम कारक माना जा रहा है, इसमें भी अगर आप मोटापे के शिकार हैं तो यह खतरा और भी बढ़ जाता है। 
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संक्रमण से बचाव के उपाय जरूरी - फोटो : Pixabay
क्या फिर से लगाई जा सकती हैं पाबंदियां?

क्या एक बार फिर दिल्ली में लॉकडाउन जैसे हालात बन रहे हैं इस बारे में डॉ श्रेय कहते हैं कि कोरोना के नए वैरिएंट्स की प्रभाविकता कम है, इसका सभी लोगों में खतरा नहीं देखा जा रहा है। कुछ स्थितियां आपके जोखिम कारकों को जरूर बढ़ा देती हैं जैसे कोमोरबिडीटी, इम्युनिटी में कमजोरी या वैक्सीनेशन न कराना आदि। सरकार ने सभी लोगों को मास्क लगाना भी अनिवार्य कर दिया है जो बेहतर कदम है।

कोरोना से बचाव के उपायों को प्रयोग में लाकर आप खुद और आसपास के लोगों को संक्रमण के खतरे से सुरक्षित रख सकते हैं।  इस मौसम में कई प्रकार के और वायरल संक्रमण चल रहे हैं जो कोरोना की गंभीरता को बढ़ा रहे हैं, केस बढ़ने का यही कारण माना जा रहा है। फिलहाल फिर से पाबंदियां लगाने जैसे हालात बिल्कुल नही हैं  न ही भविष्य में इसकी फिलहाल कोई आशंका है, बस सभी को खुद से सुरक्षा के उपाय करने चाहिए।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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