पिछले दो साल से अधिक समय से दुनियाभर में जारी कोरोना संक्रमण के कारण लोगों को कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। डेल्टा जैसे घातक वैरिएंट का फेफड़ों पर ज्यादा असर हुआ जिसके कारण सांस लेने में दिक्कत और गंभीर स्थितियों में लोगों की जानें भी गईं। कोरोना संक्रमण के साथ-साथ वैज्ञानिक पोस्ट कोविड सिंड्रोम के खतरे को लेकर भी चिंतित हैं। हालांकि विशेषज्ञों के एक समूह को इससे भी बड़ी एक चिंता परेशान कर रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जहां कोविड ने लोगों को शारीरिक और आर्थिक रूप से प्रभावित किया है, वहीं महामारी ने वैश्विक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य की समस्या को भी काफी ज्यादा बढ़ा दिया है।
वैज्ञानिकों को चिंता है कि जिस तरह से कोविड के कारण मानसिक स्वास्थ्य के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, ऐसे में डर है कि यह समस्या इस पीढ़ी और संभवत: आने वाली पीढ़ियों को भी प्रभावित कर सकती है। वैश्विक स्तर पर, मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक महामारी के दौरान मानसिक स्वास्थ्य को लेकर प्रभावित लोगों की संख्या में इजाफा रिपोर्ट कर रहे हैं।