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Covid-19: वैज्ञानिकों ने किया आगाह- वायरस म्यूटेट होकर ले सकता है और खतरनाक रूप, चीन की स्थिति ने बढ़ाया जोखिम

Mon, 26 Dec 2022 01:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस में म्यूटेशन का बढ़ा खतरा - फोटो : iStock
चीन में कोरोना संक्रमण के बढ़ रहे मामले दुनियाभर के विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्वी चीन के झेजियांग प्रांत में रोजाना लगभग 1 मिलियन (10 लाख) से अधिक लोगों में संक्रमण की पुष्टी की जा रही है, विशेषज्ञों को आशंका है कि आने वाले दिनों में ये आंकड़े और भी बढ़ सकते हैं।

संक्रमण के बढ़ने के साथ यहां मृतकों के आंकड़े भी काफी अधिक देखे जा रहे हैं, हालांकि वैश्विक एजेंसियों का आरोप है कि चीन सरकार संक्रमण और मौत के वास्तविक आंकड़े छिपा रही है। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग (एनएचसी) ने रविवार को दैनिक कोविड-19 डेटा प्रकाशित करना भी बंद कर दिया है।
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बढ़े संक्रमण में कोरोना हो सकता है म्यूटेट - फोटो : istock
नए खतरे को लेकर चिंतित हैं वैज्ञानिक

चीन में कोरोना से बिगड़ते हालात के बीच वैज्ञानिकों ने आने वाले समय में और भी गंभीर स्थिति को लेकर आगाह किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि चीन में संक्रमण के मामलों में आए उछाल के चलते यहां से कोरोनोवायरस के म्यूटेट होकर, नए वैरिएंट्स उत्पन्न होने का खतरा है।

एक रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने कहा- हम नहीं जानते हैं कि अगला म्यूटेशन किस प्रकार का होगा और इससे किस प्रकार के जोखिम हो सकते हैं, पर जिस तरह से चीन में तेजी से बड़ी आबादी में संक्रमण बढ़ता जा रहा है, यह वैरिएंट के म्यूटेशन के जोखिम को बढ़ाने वाला हो सकता है। शायद नया म्यूटेशन और खतरनाक हो सकता है। मौजूदा जोखिम, आगे और भी गंभीर रूप ले सकता है। 
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आ सकते हैं कोरोना के नए वैरिएंट्स - फोटो : Pixabay
बढ़ता संक्रमण नए म्यूटेशन का बन सकता है कारण

जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. स्टुअर्ट कैंपबेल.रे ने बड़े खतरे को लेकर चिंता जताई है। वह कहते हैं, चीन की आबादी बहुत बड़ी है और वहां तेजी से लोग संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। बड़ी आबादी में अनियंत्रित रूप से संक्रमण का बढ़ना, एक नए वैरिएंट के उत्पन्न होने का कारण बन सकता है। यह किस प्रकार का होगा इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है, पर संभवत: यह ओमिक्रॉन की तरह या कुछ स्ट्रेनों के संयोजन से तैयार वैरिएंट हो सकता है। इस तरह के म्यूटेटेड वैरिएंट्स भविष्य में बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

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वायरस की गंभीरता से बचाव करना जरूरी - फोटो : Pixabay
कमजोर नहीं हुआ वायरस

डॉ. स्टुअर्ट कहते हैं, दुनिया के कई हिस्सों में पिछले छह से 12 महीनों में हमने संक्रमण की स्थिति में जिस तरह से हल्के लक्षणों और कम गंभीरता का अनुभव किया है, वह या तो टीकाकरण या फिर संक्रमण से बनी प्रतिरक्षा के कारण है, न कि इसलिए कि वायरस कमजोर हुआ है। पर चीन में जो लोग इस लहर में संक्रमित हो रहे हैं उनमें से ज्यादातर में वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा कम देखी जा रही है।

इसके अलावा BF.7 की अति संक्रामकता दर के कारण यह कम समय में बड़ी आबादी में संक्रमण का कारण बन रहा है जिससे नए म्यूटेशन का जोखिम और अधिक हो सकता है। 
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चीन की कोविड वैक्सीन ज्यादा असरदार नहीं - फोटो : iStock
चीन में वैक्सीन की गुणवत्ता और बूस्टर डोज की दर कम

डॉ  स्टुअर्ट कहते हैं, हर नया संक्रमण कोरोनावायरस को उत्परिवर्तित होने का मौका देता है और जिस रफ्तार से कोरोना वायरस चीन में फैल रहा है, इसलिए जोखिम और अधिक है। चीन में टीकाकरण की दर तो ठीक है पर वैक्सीन की प्रभाविकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, इसके अलावा यहां बूस्टर शॉट भी कम लोगों को दिए गए हैं, खासकर वृद्ध लोगों में भी इसका आंकड़ा बहुत कम है।

यह संक्रमण के अलावा रोग के गंभीरता को बढ़ाने वाली स्थिति भी हो सकती है। अन्य देशों में निर्मित आरएनए वैक्सीन की तुलना में यहां के घरेलू टीके गंभीर संक्रमण के खिलाफ कम प्रभावी साबित हुए हैं। यह स्थितियां संक्रमण बढ़ने की स्थिति में गंभीर रोगों का कारक और नए वैरिएंट्स की उत्पत्ति को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
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आ सकते हैं कोरोना के नए वैरिएंट्स - फोटो : iStock
पहले के अनुभवों से सीख लेने की जरूरत

संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. स्टुअर्ट कहते हैं, इससे पहले भी जब हमने संक्रमण की बड़ी लहरें देखी हैं, तो अक्सर वहां से इसके बाद नए वेरिएंट उत्पन्न होते रहे हैं। लगभग तीन साल पहले, कोरोनावायरस का मूल वैरिएंट जब चीन से दुनिया के बाकी हिस्सों में फैला था, यहां से डेल्टा जैसा संक्रामक वैरिएंट देखने को मिला था। इस तरह के अनुभव डरा रहे हैं।

ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी में वायरस का अध्ययन करने वाले डॉ. शान-लू लियू कहते हैं, चीन जैसे देश जहां लोगों में प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती देखी गई है और यहां संक्रमण की रफ्तार अधिक है, ये वायरस को म्यूटेट होने के लिए अनुकूल माहौल है। हमें भविष्य के जोखिमों को लेकर अलर्ट रहने की आवश्यकता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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