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Coronavirus Phobia: हर चीज में वायरस होने का शक बीमारी है, कहीं आप कोरोना फोबिया के शिकार तो नहीं?

Sat, 25 Jul 2020 04:17 PM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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CoronaPhobia: ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
दिल्ली की रहने वाली आशा के बेटे को बार-बार हाथ-पैर धोने की आदत थी। वो, कहीं से भी घर में आता तो पहले पूरे हाथ-पैर धोता। बैठे-बैठे अचानक हाथ-पैर धोने चला जाता। उन्होंने किसी तरह समझा कर उसकी ये आदत छुड़ाई थी लेकिन अब कोरोना वायरस के दौरा में उसमें फिर से ये लक्षण दिखने लगे हैं। कोरोना वायरस के इस दौर में साफ-सफाई रखने और बार-बार हाथ धोने के लिए कहा जा रहा है ताकि वायरस आपके शरीर तक ना पहुंच पाए।

ऐसे में लोग बार-बार हाथ धो भी रहे हैं लेकिन, अगर आपको लगने लगे कि हर चीज में जर्म्स हैं, वायरस है, गंदगी है, जो आपको नुकसान पहुंचा सकता है और आप बार-बार हाथ धो रहे हैं या सफाई कर रहे हैं तो ये एक बीमारी का लक्षण है। इसे कहते हैं ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी)।
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कोरोना वायरस काल में मानसिक स्वास्थ्य - फोटो : Social Media
क्या होता है ओसीडी?
डॉक्टरों का कहना है कि जिन लोगों में ओसीडी की समस्या पहले से ही मौजूद है उनमें कोरोना महामारी के दौरान दिक्कत और बढ़ गई हैं। मैक्स अस्पताल, गुड़गांव में मेंटल हेल्थ विभाग के प्रमुख डॉ- समीर मल्होत्रा बताते हैं, “दिमाग के अंदर सिरोटोनिन नाम का एक रसायन होता है। जब दिमाग में ये रसायन कम हो जाता है तो कोई भी काम करते हुए अधूरा-सा अहसास रहता है। कई बार दिक्कत साफ-सफाई को लेकर होती है तो उसमें आदमी बहुत बच-बच कर चलता है।” “उन्हें यकीन ही नहीं होता कि सफाई अच्छी तरह हो चुकी है। इसलिए वो घंटों उसमें लगे रहते हैं। जबकि हाथ तो कुछ सैकेंड में ही अच्छी तरह साफ हो जाते हैं। कोविड से बचाव के लिए भी 20 सैकेंड तक हाथ धोने के लिए कहा जा रहा है।”
 
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Hand wash - फोटो : Pixabay
ओसीडी में लोगों में इस तरह की आदतें नजर आती हैं-
  • बार-बार हाथ धोना
  • नहाने में घंटों लगा देना
  • पूरा दिन सफाई में लगे रहना
  • अपने ऊपर भरोसा ना होने पर दूसरों से पुष्टि कराना कि हाथ अच्छे से धोए या नहीं। सफाई ठीक से हुई या नहीं।

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Hand Wash - फोटो : Pixabay
हालात हो सकते हैं बदतर
डॉक्टर समीर बताते हैं कि इस डिसऑर्डर से लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित होने लगती है। कई लोग डिटरजेंट के घोल या कपड़े धोने के साबुन से नहाने लगते हैं। उन्हें यकीन नहीं होता कि रोजमर्रा वाले साबुन से ठीक से सफाई नहीं हुई। जब ये दिक्कत बहुत अधिक बढ़ जाए तो इसके शारीरिक और मानसिक दोनों नुकसान होते हैं।
  • जैसे बार-बार हाथ धोने या नहाने से त्वचा रुखी हो जाती है और फटने लगती है।
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चिड़चिड़ापन, उदासी - फोटो : Pixabay
  • दैनिक काम प्रभावित होते हैं। आप बाकी काम छोड़कर सिर्फ सफाई में व्यस्त रहते हैं।
  • चिड़चिड़ापन, उदासी और हताशा रहने लगती है। संबंध खराब होने लगते हैं।
  • सर्दी हो या गर्मी बच्चों को बाहर से आते ही बार-बार नहला देना। बच्चों की सेहत पर असर।
  • लोगों को घर में आने नहीं देते। घर के हेल्पर से बार-बार सफाई करवाना।
डॉक्टर समीर की एक मरीज वॉशरूम नहीं जातीं क्योंकि उन्हें लगता है कि हाथ गंदे हो जाएंगे और फिर 7-8 घंटे तक धोने पड़ेंगे। उनके हाथ काले हो चुके हैं क्योंकि वो हाथों को डिटरजेंट से धोया करती थीं। अगर समय पर इलाज ना मिले तो ये समस्या जुनूनी स्तर तक जा सकती है। व्यक्ति जिंदगी के सारे काम छोड़कर सिर्फ सफाई में लग सकता है।
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दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : social media
क्या है इलाज?
डॉक्टर समीर के मुताबिक ओसीडी का इलाज जरूरी है। इसमें मरीज को दवाइयां जी जाती हैं। साथ ही मरीज को काउंसलिंग और बिहेवियर थेरेपी दी जाती है। उन्हें जो काम बार-बार करने की आदत है उसे करने से रोका जाता है। इलाज से ये बीमारी ठीक हो सकती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्या है जर्मोफोबिया?
कई बार लोग जर्मोफोबिया और ओसीडी को एक ही बीमारी समझ लेते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में मेंटल हेल्थ विभाग की प्रमुख डॉ. कामना छिब्बर कहती हैं, “जर्मोफोबिया कोई बीमारी नहीं है जबकि ओसीडी को मेडिकली बीमारी माना जाता है। हालांकि, कई बार जर्मोफोबिया ओसीडी में तब्दील हो सकता है।”

किसी जर्म, बैक्टीरिया वायरस, माइक्रोब और इंफेक्शन आदि के डर को जर्मोफोबिया कहते हैं। ये ऐसा ही डर है जैसे कि कोई छिपकली या सांप से डरता है। कई लोग कीड़े- मौकड़ों, जानवरों या किसी खास स्थिति से डरते हैं। इसमे ये डर होता है कि मुझे जर्म्स से कोई इंफेक्शन नहीं होना चाहिए। मुझे ये पसंद नहीं है और इनसे दूर रहने की जरूरत है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डॉक्टर कामना के मुताबिक, “जर्मोफोबिया में व्यक्ति को किसी सामान में या किसी जगह पर जर्म होने का डर लग सकता है। जिससे वो उस जगह को नहीं छूता। लेकिन, अगर ये डर कभी-कभी सामने आता है। आपको ज्यादा परेशान नहीं करता तब तक ये डर सामान्य होता है।” 

“जब ये डर रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे। जैसे बार-बार हाथ धोना, किसी जगह की सफाई करते रहना और इससे आप खुद को रोक नहीं पाएं तो ये ओसीडी बन जाता है। लेकिन, ये जरूरी नहीं कि जर्मोफोबिया ओसीडी बन ही जाए।”
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना वायरस के कारण उन लोगों में समस्याएं ज्यादा बढ़ गई हैं जो पहले से ओसीडी के मरीज थे। उनका डर और लक्षण और गंभीर हो गए हैं। लेकिन, जैसा कि कोरोना वायरस के इस दौर में बार-बार हाथ धोने और सफाई की हिदायत दी जा रही है तो समझना होगा कि कितनी सफाई जरूरी है। डॉक्टर कामना कहती हैं कि अगर आप कहीं बाहर से आ रहे हैं तो हाथ धोने में कोई समस्या नहीं। चाहे आप दिन में 10 बार बाहर से आएं और हाथ धोएं। लेकिन, एक बार हाथ धोने के बाद अगर आपको संतुष्टि नहीं हो रही है और बार-बार हाथ धोने का मन कर रहा है तो सामान्य बात नहीं है।
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