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Covaxin Update: स्वदेशी वैक्सीन पर अच्छी खबर, दिल्ली एम्स में ह्यूमन ट्रायल शुरू, जानें पूरी अपडेट

Mon, 20 Jul 2020 01:35 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Covaxin Update - फोटो : ICMR/Amar Ujala
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच भारत की पहली स्वदेशी वैक्सीन Covaxin से बड़ी उम्मीद लगाई जा रही है।  भारतीय दवा महानियंत्रक (DGCI) से अनुमति मिलने के बाद वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है। बिहार के पटना एम्स और हरियाणा के रोहतक पीजीआई के बाद अब दिल्ली एम्स में इस देसी वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल शुरू हो रहा है। आईसीएमआर के मुताबिक देश के 14 स्वास्थ्य संस्थानों मे पहले और दूसरे चरण का ट्रायल होना है। वैक्सीन का फिलहाल कोई साइड इफेक्ट सामने नहीं आया है। ट्रायल में वॉलेंटियर्स यानी प्रतिभागी बनने के लिए लोग लगातार पंजीकरण करवा रहे हैं। आइए जानते हैं इसको लेकर ताजा अपडेट क्या है:
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Covaxin Update - फोटो : Twitter@Dr. Harshwardhan
  • देसी वैक्सीन Covaxin के पहले चरण का ट्रायल 375 वॉलंटियर्स पर होना है। इनमें से 100 वॉलंटियर्स एम्स से शामिल होंगे। ह्यूमन ट्रायल के पहले चरण में स्वस्थ लोगों को ही शामिल किया जाना है, जिनकी उम्र 18 से 55 साल के बीच होगी। एम्स की एथिक्स कमेटी ने Covaxin के पहले ह्यूमन ट्रायल को मंजूरी दे दी है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • खबरों के मुताबिक, ट्रायल में शामिल होने के लिए केवल 10 घंटे में 10 हजार से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है। इसमें दिल्ली के बाहर अन्य राज्यों के भी प्रतिभागी पंजीकरण करवा रहे हैं, लेकिन फिलहाल केवल दिल्ली-एनसीआर के लोगों के रजिस्ट्रेशन को मंजूरी दी जाएगी। जिस शख्स पर कोरोना वैक्सीन का ट्रायल होगा उसकी पहले कोरोना जांच होगी, संक्रमित लोगों पर ट्रायल नहीं किया जाएगा। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • एम्स दिल्ली के प्रोफेसर डॉ. संजय राय के मुताबिक, वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल में शामिल होने के लिए मोबाइल नंबर 07428847499 पर पंजीकरण कराया जा सकता है या फिर ईमेल आईडी ctaiims.covid19@gmail.com पर मेल भी किया जा सकता है। ट्रायल से पहले लोगों का मेडिकल चेकअप होगा। इसमें ब्लड टेस्ट, बीपी टेस्ट किया जाएगा। साथ ही किडनी और लिवर से जुड़ी बीमारियां नहीं होने के बाद ही वैक्सीन की डोज दी जाएगी।
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कोवाक्सिन वैक्सीन - फोटो : ट्विटर
कैसे बनाई गई है Covaxin?
  • आईसीएमआर और भारत बायोटेक की Covaxin एक 'इनएक्टिवेटेड' वैक्सीन है। इसे कोरोना वायरस के उन पार्टिकल्स से तैयार किया गया है, जिन्हें निष्क्रिय कर दिया गया था या मार दिया गया था ताकि वे संक्रमित नहीं कर पाएं। इस वैक्सीन की डोज से शरीर में वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज बनती हैं और हमारा शरीर कोरोना वायरस से मुकाबला करने के काबिल हो जाता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
अबतक कोई साइड इफेक्ट नहीं
  • आईसीएमआर की मदद से भारत बायोटेक द्वारा निर्मित देसी कोरोना वैक्सीन 'कोवाक्सिन' का ह्यूमन ट्रायल शुरू हो गया है और डोज देने के बाद इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं हुआ है। बिहार में पटना एम्स के बाद हरियाणा के रोहतक पीजीआई में भी वॉलेंटियर्स को वैक्सीन की पहली डोज दी जा चुकी है। कुछ देर तक निगरानी में रखने के बाद सभी को घर भेज दिया गया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : ICMR
14 दिनों के बाद वैक्सीन की दूसरी डोज
  • पटना एम्स के नोडल पदाधिकारी डॉ सीएम सिंह के मुताबिक, वैक्सीन की दूसरी डोज 14 दिनों के बाद दिया जाएगा। उसके बाद निगरानी में रख कर रिजल्ट देखा जाएगा। उम्मीद है कि सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। मालूम हो कि इस वैक्सीन को भारत बायोटेक, आईसीएमआर और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे की मदद से बनाया गया है। 

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Dr. Raman Gangakhedkar - फोटो : Social Media
  • आईसीएमआर के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. रमन आर गंगाखेड़कर के मुताबिक, वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल के तीन फेज होते हैं। प्रसार भारती से बातचीत में उन्होंने बताया कि पहले स्टेज में देखा जाता है कि शरीर में एंटीबॉडी बन रही है या नहीं और यह कितनी सुरक्षित है। दूसरे स्टेज में लंबी अवधि में साइड इफेक्ट को देखा जाता है और तीसरे स्टेज में ये देखा जाता है कि वैक्सीन की डोज के बाद लोगों को नए सिरे से बीमारी होती है या नहीं।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
  • डॉ. गंगाखेड़कर ने बताया कि कि चौथे चरण की प्रक्रिया ट्रायल मोड में नहीं होती। इसमें आम लोगों को वैक्सीन देना शुरू कर दिया जाता है और देखा जाता है कि अगले दो साल तक कोई साइड इफेक्ट तो नहीं हो रहा। इसे पोस्ट मार्केटिंग सर्विलांस कहा जाता है। इसके बाद वैक्सीन पर अंतिम निर्णय लिया जाता है। 
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : social media
भारत की दूसरी वैक्सीन भी रेस में
  • भारतीय दवा महानियंत्रक से अनुमति के बाद भारत की एक अन्य वैक्सीन का भी ह्यूमन ट्रायल शुरू हो चुका है, जिसे अहमदाबाद की कंपनी जायडस कैडिला ने बनाया है। ZyCov 'प्लाज्मिड डीएनए' वैक्सीन है, जो एक तरह का डीएनए अणु होती हैं। इनमें एंटीजेन कोड किया जाता है। इसका डीएनए सीक्वेंस वायरस से मैच करेगा तो शरीर में उसके खिलाफ एंटीबॉडी बनने लगेगी। इस तरह कोरोना वायरस के खिलाफ हमारा शरीर इम्यून हो जाएगा। 
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