कितनी मजबूत है तैयारी
इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन के महासचिव डॉक्टर श्रीनिवास समावेदम बताते हैं कि भारत में सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में इस वक्त 80 हजार से एक लाख तक वेंटिलेटर हैं। डॉक्टर श्रीनिवास का कहना है, "अगर इटली, सऊदी अरब की रफ्तार से यहां भी बीमारी आगे बढ़ी तो मौजूदा वेंटिलेटर्स की संख्या कम पड़ सकती है। लेकिन, भारत में ऐसा नहीं लग रहा है। अभी जो आंकड़ा है उसके हिसाब से यहां पर्याप्त वेंटिलेटर्स हैं। जब ये आंकड़ा 10 हजार या 20 हजार पहुंचेगा तब थोड़ा चिंता की बात होगी।"
"लेकिन, जिस तरह सरकार ने लॉकडाउन किया है और लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं तो इस आंकड़े तक पहुंचने में दो-तीन हफ्ते का वक्त लगेगा और इस बीच सरकार को जरूरी उपकरणों की आपूर्ति का समय मिल जाएगा। वैसे जरूरी भी नहीं भारत में आंकड़ा इतना ज्यादा हो जाए। हालांकि, इस बीच पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट, मास्क, वेंटिलेटर की आपूर्ति की कोशिश करनी चाहिए।"
अमूमन लोगों के बीच वेंटिलेटर को लेकर डर होता है। ये धारणा होती है कि वेंटिलेटर से लौट कर आना बेहद मुश्किल है। कोरोना वायरस के मामले में वेंटिलेटर पर पहुंचने के बाद क्या संभावना होती है। डॉक्टर श्रीनिवास कहते हैं कि वेंटिलेंटर पर आने के बाद भी मरीज ठीक होते हैं। कोरोना वायरस के अलावा दूसरी बीमारियों में तो 70 से 85 प्रतिशत मरीज ठीक होकर निकलते हैं। कोरोना वायरस में ये प्रतिशत थोड़ा कम होता है।