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कोरोना वायरस से लड़ने में प्लाज्मा थेरेपी की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है?

Mon, 27 Apr 2020 01:47 AM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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कोरोना वायरस की जांच (फाइल फोटो) - फोटो : Amar Ujala
बीते साल दिसंबर में चीन से निकला कोरोना वायरस अब दुनिया के ज्यादातर देशों को अपनी चपेट में ले चुका है। ये घातक वायरस दुनिया भर में करीब दो लाख से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है और इसका कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। पूरे विश्व के डॉक्टर, वैज्ञानिक आज इस एक वायरस को रोकने कोशिश में हैं, लेकिन टीके के अभाव में उनके लिए भी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।

ऐसे में कॉन्वालेसंट प्लाज्मा थेरेपी ने थोड़ी उम्मीद जगाई है और भारत समेत दुनिया के कई दूसरे देश भी कोरोना को हराने में इसकी मदद लेना चाहते हैं। कहा जा सकता है कि प्लाज्मा थेरेपी 'डूबते को तिकने का सहारा' की तरह सामने आई है।
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प्लाज्मा थेरेपी - फोटो : social media
कहां कहां इस्तेमाल हो रहा है प्लाज्मा थेरेपी का?
भारत की राजधानी दिल्ली में प्रदेश सरकार ने कोविड-19 से बीमार छह लोगों को प्लाज्मा थेरेपी देना शुरु किया और उनमें से चार मामलों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। कर्नाटक ने भी इसी सप्ताह प्लाज्मा थेरेपी का क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया है। बिहार सरकार भी पटना एम्स में इसका ट्रायल करना चाहती है।

देश में सबसे पहले प्लाज्मा थेरेपी की बात करने वाले केरल में भी जल्द ही इस दिशा में काम शुरु करने वाला है। देश के अलग-अलग राज्यों से 30 से अधिक अस्पतालों ने इसकी इजाजत मांगी है। ब्रिटेन की सरकार ने बीते शनिवार को स्पष्ट किया है कि जो लोग कोविड-19 से गंभीर रूप से बीमार हैं उन पर प्लाज्मा थेरेपी दी जा रही है। 
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कोरोना वायरस - फोटो : Amar Ujala
सरकार का कहना है कि वो क्लिनिकल ट्रायल शुरु कर रहे हैं और लोगों से प्लाज्मा लेने की कोशिश बढ़ाएंगे ताकि हर सप्ताह कम से कम 5,000 तक मरीजों का इलाज किया जा सके। अमेरिकी फूड एंड ड्रग एमिनिस्ट्रेशन ने कोविड-19 से ठीक हुए लोगों को प्लाज्मा दान करने की गुजारिश की है ताकि दूसरों के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सके।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इबोला वायरस से मुक़ाबले के लिए कॉन्वालेसंट प्लाज्मा का इस्तेमाल किया गया था। चीन, जहां से कोरोना वायरस दुनिया भर में चलना शुरु हुआ था उसने भी प्लाज्मा थेरपी का इस्तेमाल कर सफलता पाई है। चीन में फरवरी की शुरुआत से ही इस थेरपी पर काम करना शुरु कर दिया था।

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कोरोना वायरस की जांच (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
चीनी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कमीशन के एक अधिकारी गुओ यानहोंग ने फरवरी के आखिर में इसके प्रयोग के बारे में कहा था कि अब तक ये सुरक्षित और कारगर साबित हुई है। तो क्या कोरोना के बढ़ते कदम रोकने में कॉन्वालेसंट प्लाज्मा थेरेपी को बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है?

दिल्ली में कोरोना पैनल के चीफ और आईएलबीएस अस्पताल के डॉक्टर एसके सरीन कहते हैं कि "आपको समझना होगा कि टीका और प्लाज्मा थेरेपी दो अलग-अलग चीजें हैं। प्लाज्मा थेरेपी से इलाज तो हो रहा है लेकिन लंबे वक्त के लिए हमें कोरोना से बचने के लिए टीके की जरूरत होगी।"

वो कहते हैं, "टीका एक तरह का प्रीवेन्टिव कदम है जिसकी जरूरत हर व्यक्ति को पड़गी। जिन्हें टीका नहीं मिलेगा उन्हें कोरोना संक्रमण हो सकता है और ऐसे में उन्हें इलाज की जरूरत पड़ेगी। उनके इलाज में प्लाज्मा थेरेपी काम में आती है।"
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कोरोना वायरस की जांच (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
जिन लोगों को कोरोना वायरस के कारण कोविड-19 बीमारी होती है, उनमें पहले स्टेज में वायरस फैलना शुरु होता है। इसके बाद दूसरे स्टेज में ये फेफड़ों में कॉम्प्लिकेशन पैदा करता है। और तीसरे स्टेज में इस कारण ऑर्गेन फेल होने लगते हैं।

डॉक्टर सरीन कहते हैं कि संक्रमण के दूसरे स्टेज की शुरुआत में अगर प्लाज्मा थेरेपी दी जाए तो मरीज के बचने की उम्मीद रहती है लेकिन टीके की जगह ये नहीं ले सकता। वो कहते हैं कि ये नया वायरस है, इसके टीके पर काम कई जगहों पर चल रहा है लेकिन तब तक इंतजार करना होगा। कोविड-19 के इलाज के लिए अभी तक एंटी-वायरल ड्रग नहीं हैं। ऐसे में जब तक इसके लिए एंटी-वायरल नहीं मिल जाता तब तक उम्मीद की हलकी किरण प्लाज्मा थेरेपी ही है।

डॉक्टर सरीन मानते हैं कि जब तक कोरोना वायरस का इलाज नहीं मिलता बड़े पैमाने पर इस थेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है। वो कहते हैं कि इसके लिए प्लाज्मा डोनर को आगे आना चाहिए और लोग इसके लिए कई बार खून दे सकते हैं क्योंकि इससे व्यक्ति में कमजोरी नहीं आती।
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लखनऊ में कोरोना की जांच के लिए नमूना एकत्र करते स्वास्थ्य कर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
कोरोना महामारी के बीच अमरीका में सरकारी स्वास्थ्य एजेंसियां और प्लाज्मा पर काम करने वाली कई कंपनियों ने एक साथ मिल कर प्लाज्मा अलायंस बनाया है। ये अलायंस कोविड-19 के इलाज में इसके इस्तेमाल पर मिल कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हैं।

वहीं भारत में अलग-अलग राज्य अपने स्तर पर आईसीएमआर और ड्रग्स कंट्रोलर-जनरल ऑफ इंडिया की इजाजत के बाद इस पर आगे बढ़ रही हैं लेकिन एक संगठित कोशिश की कमी दिखती है। इस सवाल पर डॉक्टर सरीन कहते हैं कि, "भारत का मामला थोड़ा अलग है। ये तो सरकार का काम है और इस मामले में अधिक कुछ नहीं कह सकता।"
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कोरोना वायरस की जांच (फाइल फोटो) - फोटो : Amar Ujala
प्लाज्मा थेरेपी क्या है?
कॉन्वालेसंट प्लाज्मा थेरेपी धारणा पर आधारित है कि वे मरीज जो किसी संक्रमण से उबर जाते हैं उनके शरीर में संक्रमण को बेअसर करने वाले प्रतिरोधी एंटीबॉडीज विकसित हो जाते हैं। इन एंटीबॉडीज की मदद से कोविड-19 रोगी के रक्त में मौजूद वायरस को खत्म किया जा सकता है।

संक्रामक रोगों के इलाज के लिए सदियों से प्लाज्मा वाला इलाज होता रहा है। इससे पहले सार्स, मर्स और एचवनएनवन जैसी महामारियों के इलाज में भी प्लाज्मा थेरेपी का ही इस्तेमाल हुआ था।
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