फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना वायरस की वैक्सीन कबतक आएगी, अमेरिका के नामी वैज्ञानिक ने ऐसा क्यों कहा?

Fri, 29 May 2020 05:21 PM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
विज्ञापन
1 of 7
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनोडेफिशियेंसी वायरस पर शोध करने वाले अमेरिका के एक नामी वैज्ञानिक ने कहा है कि 'उन्हें नहीं लगता कि कोरोना वायरस की वैक्सीन जल्द आने वाली है।' विलियम हेसलटाइन जिनके कैंसर, एचआईवी समेत अन्य प्रोजेक्ट्स पर किए काम की काफी चर्चा रही है, उनसे पूछा गया था कि 'कोविड-19 का टीका कितनी जल्द विकसित होने की संभावना है?'

इसके जवाब में उन्होंने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि 'वे इसका इंतजार नहीं करना चाहेंगे क्योंकि उन्हें नहीं लगता कि निकट भविष्य में यह संभव है।' उन्होंने कहा है कि 'कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए जरूरी है कि मरीजों की बेहतर पड़ताल की जाए, उन्हें सही तरीके से ढूंढा जाए और जहां संक्रमण फैलता दिखे, वहीं उसे सख्त आइसोलेशन के जरिए रोका जाए।'
विज्ञापन

2 of 7
कोरोना वायरस काल (सांकेतिक) - फोटो : PTI
अमेरिका की सरकार को परामर्श देते हुए उन्होंने कहा है कि 'उन्हें टीके के इंतजार में नहीं बैठे रहना चाहिए। अगर शीर्ष नेता ये सोच रहे हैं कि टीका तैयार होने की घोषणा के आधार पर ही वे लॉकडाउन के प्रतिबंधों में छूट देने का निर्णय करेंगे, तो यह रणनीति सही नहीं है।'
विज्ञापन

3 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
अन्य किस्मों के कोरोना वायरस के लिए पहले जो वैक्सीन तैयार की गई हैं, वो नाक को संक्रमण से सुरक्षा देने में विफल रही है जहां से वायरस के शरीर में दाखिल होने की सबसे ज्यादा आशंका रहती है। विलियम हेसलटाइन ने कहा है कि 'बिना किसी प्रभावी इलाज या फिर टीके के भी कोरोना वायरस को कंट्रोल किया जा सकता है। इसके लिए संक्रमण की सही पहचान जरूरी है।

4 of 7
Coronavirus Test - फोटो : Social Medi
जो लोग संक्रमित हैं, उन्हें आइसोलेशन में रखना सबसे ज्यादा कारगर है। बाकी लोग हाथ धोते रहें, मास्क पहनें और सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली चीजों और जगहों को साफ रखें, तो भी इसमें काफी कमी आ सकती है।'  विलियम हेसलटाइन मानते हैं कि चीन और कई अन्य एशियाई देशों ने इस वैकल्पिक रणनीति को बहुत प्रभावशाली तरीके से लागू किया है जबकि अमेरिका में ऐसा नहीं देखा गया कि जो लोग वायरस से संक्रमित हो गए हों, उन्हें सख़्त आइसोलेशन में रखा गया हो।
विज्ञापन

5 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala
उनके अनुसार चीन, दक्षिण कोरिया और ताइवान इस तरीके से कोरोना वायरस की संक्रमण दर को कम करने में सफल रहे हैं जबकि अमेरिका, रूस और ब्राजील इसमें नाकाम रहे। प्रोफेसर विलियम ने कहा, "जानवरों पर कोविड-19 के रिसर्च वैक्सीन आजमाने से अब तक यह तो पता चला है कि इनसे मरीज के शरीर में, ख़ासतौर से फेफड़ों में संक्रमण का असर कम होता देखा गया है।"
विज्ञापन

कुछ देशों में प्लाज्मा थेरेपी का भी ट्रायल चल रहा है। इस थेरेपी में कोविड-19 से ठीक हुए मरीजों के शरीर से एंटी-बॉडी लेकर संक्रमित मरीजों के शरीर में डाल दी जाती हैं। माना जा रहा है कि इससे मरीजों में कोरोना वायरस से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
coronavirus vaccine - फोटो : Social Media
कुछ दवा कंपनियां अब इसी थेरेपी के मद्देनजर बेहतर और रिफाइंड सीरम तैयार कर रही हैं जिसके कोविड-19 के मरीजों में काम करने की संभावना है। प्रोफेसर विलियम भी इस विधि के सफल होने की काफी संभावना मानते हैं। उनका कहना है कि यह भविष्य में इसका पहला इलाज साबित हो सकता है क्योंकि ये एंटीबॉडी जिन्हें हाइपरइम्यून ग्लोब्यूलिन कहा जा रहा है, मानव शरीर के हर सेल में जाकर उसे वायरस को चित करने की क्षमता देती हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें