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Covid 19 Vaccine: ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन पर उठे सवाल, दावा- शुरुआती ट्रायल में स्वयंसेवकों को दी गई गलत डोज

Tue, 02 Feb 2021 02:38 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोविड 19 वैक्सीन - फोटो : iStock
कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान के तहत भारत समेत कई देशों में ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका की कोविड-19 वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब इसको लेकर एक हैरान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है। दरअसल, न्यूज एजेंसी रायटर्स ने यह जानकारी दी है कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के ट्रायल (नैदानिक परीक्षण) में शामिल होने वाले प्रारंभिक स्वयंसेवकों में से लगभग 1,500 लोगों को टीके की गलत खुराक दी गई थी, लेकिन गलती का पता चलने के बाद भी उन्हें इस बारे में बताया नहीं गया था। रायटर्स के मुताबिक, इसका खुलासा ट्रायल के मुख्य अन्वेषक (चीफ इंवेस्टिगेटर) और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एंड्रयू जे. पोलार्ड के एक पत्र से हुआ है। 
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कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : Pixabay
जैसा कि रायटर्स ने दिसंबर 2020 में एक रिपोर्ट में बताया था कि स्वयंसेवकों को ऑक्सफोर्ड के शोधकर्ताओं द्वारा मापने की गलती से लगभग आधी खुराक दी गई थी, लेकिन रायटर्स के मुताबिक प्रोफेसर एंड्रयू पोलार्ड के पत्र में ऐसी कोई त्रुटि स्वीकार नहीं की गई है और न ही यह खुलासा किया गया कि शोधकर्ताओं ने ब्रिटिश चिकित्सा नियामकों को इस बारे में सूचना दी थी। रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एस्ट्राजेनेक के एक प्रवक्ता ने इसपर कुछ भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को हाल ही में ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और भारत सहित कई देशों ने आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दी थी। ब्रिटेन इसे मंजूरी देने वाला पहला देश बना था और चार जनवरी से लोगों को टीका लगाना शुरू किया था। लेकिन रायटर्स को मिले पत्र ने अब इसके नैदानिक परीक्षणों को लेकर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
रायटर्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह जर्मनी की वैक्सीन समिति ने सिफारिश की थी कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को केवल 65 वर्ष से कम आयु के लोगों को ही दिया जाना चाहिए, जबकि यूरोपीय संघ, जिसने इसे 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए अधिकृत किया है, ने इसकी प्रभावकारिता दर 70.4 फीसदी से घटाकर 60 फीसदी कर दी है। दोनों मामलों में अधिकारियों ने नैदानिक परीक्षणों से पर्याप्त डेटा की कमी का हवाला दिया है। हालांकि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने जर्मनी के दावे को नकारते हुए हाल ही में कहा था कि यह वैक्सीन 65 साल से अधिक उम्र वाले लोगों पर भी पूरी तरह से कारगर है। 
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