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Coronavirus Vaccine: कोरोना की वैक्सीन बन गई तो आपको कैसे मिलेगी? जानें तीन बड़ी समितियों की भूमिका

Sun, 09 Aug 2020 12:34 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus Vaccine Update TOday - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच इस महामारी से जंग में अच्छी खबरें भी सामने आ रही है। जैसे-जैसे दुनियाभर के कई देश वैक्सीन बनाने के करीब पहुंच रहे हैं, इसके उत्पादन और वितरण को लेकर स्वास्थ्य संस्थाओं और समितियों की भूमिका भी तय होती जा रही हैं। कोरोना की 21 से ज्यादा वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल में चल रही हैं। कई वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल के अंतिम चरण में हैं। ट्रायल के विभिन्न चरणों में वैक्सीन की सफलता के साथ ही फंडिंग इन्वेस्टमेंट यानी निवेश के लिए बड़ी साझेदारियां भी हो रही है। ऐसे में लोगों के मन में इस सवाल का उठना लाजिमी है कि उनतक वैक्सीन आखिर कैसे पहुंचेगी।
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Coronavirus Vaccine Update - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
  • भारत सरकार की तरफ से दो उच्च समितियां बनाई गई हैं, जो वैक्सीन डेवलपमेंट से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और निगरानी कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. के. विजयराघवन की अध्यक्षता वाली समिति को भारतीय वैक्सीन के डेवलपमेंट पर नजर रखनी है। इसके साथ ही उन्हें विदेशी रिसर्च पर वैक्सीन उत्पादन करने वाली भारतीय कंपनियों की प्रगति की भी निगरानी करनी है। 
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वैक्सीन ट्रायल - फोटो : Pixabay
  • वैक्सीन के अंतिम ट्रायल में सफलता के बाद बड़े पैमाने पर उत्पादन की जरूरत होगी। ऐसे में सरकार 'फिल एंड फिनिश' वाली कई कपनियों को भी साथ ले रही है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ये कंपनियां वैक्सीन बनाएंगी नहीं, लेकिन सिर्फ शीशियों में वैक्सीन को भर कर प्रॉडक्शन फिनिश करेंगी। इसके लिए बड़ी असेंबली लाइन्स की जरूरत पड़ती है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
टीका तैयार होने के बाद दूसरी समिति की भूमिका 
  • नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल के नेतृत्व में भारत में एक दूसरी सरकारी समिति गठित की गई है। इस समिति की जिम्मेदारी है, लोगों तक वैक्सीन पहुंचाना। इस समिति में स्वास्थ्य, वित्त, वाणिज्य और विदेश मंत्रालय के सचिवों के अलावा कई बड़े वैज्ञानिक भी शामिल हैं। जब वैक्सीन फाइनल हो जाएगी और तैयार हो जाएगी, तो उसका स्टॉक और कोल्ड-चेन तैयार करना इसी समिति के जिम्मे है।
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कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : पिक्सा
  • यह समिति अंतिम और एडवांस्ड स्टेज के ट्रायल से गुजर रहे वैक्सीन कैंडिडेट्स की स्टोरेज जरूरतों की निगरानी कर रही है। उदाहरण के तौर पर अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना की वैक्सीन को कम से कम माइनस सत्तर (-70) डिग्री सेल्सियस तापमान पर स्टोर करना होता है। वहीं, भारत बायोटेक या ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन के साथ ऐसी बात नहीं है। वैक्सीन किसी केंद्र पर लगाई जाएगी, कहीं बाहर या फिर घर-घर जाकर, यह तय करना भी इसी समिति के जिम्मे है। 
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Corona Vaccine Update - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
तीसरा रास्ता 
  • खबरों के मुताबिक, सरकार किसी विदेशी वैक्सीन निर्माता कंपनी से सीधे संपर्क में नहीं है, लेकिन वैक्सीन की आपूर्ति में गावी (GAVI) और कोअलिशन एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशंस (CEPI) के जरिए उसकी हिस्सेदारी है। भारत एक तीसरे तरीके पर भी काम कर रहा है, वो है COVAX। यह  WHO, GAVI और CEPI का गठबंधन है। सभी देशों में वैक्सीन की मांग पूरी की जा सके, इसलिए ये तीनों संगठन साथ आए हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • वैक्सीन के लिए विकसित देश कई तरह की तैयारी में हैं। करोड़ों और अरबों की साझेदारियां इन्हीं तैयारियों का हिस्सा हैं। अमीर या विकसित देशों में वैक्सीन की उपलब्धता चुनौती नहीं है, चुनौती है विकासशील और आर्थिक रूप से पिछड़े देशों की आबादी को वैक्सीन उपलब्ध कराना। ऐसे में COVAX की भूमिका और अहम हो जाती है, जिसका उद्देश्य विकसित देशों को छोड़कर सभी देशों की जरूरत का कम से कम 20 फीसदी वैक्सीन की आपूर्ति कराना है। 
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Adar Poonawala - फोटो : Social Media @AdarPoonawala
  • भारत और अन्य गरीब देशों की आबादी के लिए वैक्सीन की 10 करोड़ खुराक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही सीरम इंडिया और बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के बीच साझेदारी हुई है। गेट्स फाउंडेशन समर्थित गावी(GAVI) के जरिए सीरम इंडिया को 150 मिलियन डॉलर की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। 
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