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CoronaVirus Vaccine India: कोरोना की वैक्सीन आपको कबतक मिलेगी, कितनी होगी कीमत?

Sat, 29 Aug 2020 06:54 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock/Amar Ujala
कोरोना वायरस से बढ़ते संक्रमण के बीच इसकी वैक्सीन को लेकर भी तेजी से प्रगति हो रही है। रूस और चीन ने वैक्सीन तैयार कर ली है, जबकि भारत समेत अन्य देश भी वैक्सीन बनाने के काफी करीब हैं। कोरोना की वैक्सीन को लेकर दुनियाभर के कई देशों ने बहुत सारी व्यापारिक डील की है, जिसके मुताबिक दुनिया की आबादी से भी ज्यादा डोज का सौदा हो चुका है। जहां तक भारतीय बाजार में वैक्सीन की उपलब्धता की बात है, वह अगले साल निश्चित तौर पर हो जाएगी। वैक्सीन के ट्रायल में तेजी से मिल रही सफलता के आधार पर वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बर्न्सटीन ने अपनी रिपोर्ट में यह संभावना जताई है कि साल 2021 की पहली तिमाही में वैक्सीन भारतीय बाजार में उपलब्ध होगी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • बर्न्सटीन की रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक स्तर पर फिलहाल चार वैक्सीन कोरोना संक्रमण को रोकने में सुरक्षात्मक, प्रभावी और पुष्ट दवा के तौर पर मंजूरी पाने के करीब हैं। इनके वर्तमान में चल रहे प्रयोग पूरे होने से लेकर मंजूरी मिलने तक की प्रक्रिया इस साल यानी 2020 के अंत से साल 2021 की शुरुआत में पूरी होने की संभावना है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • वैश्विक साझेदारी की बात करें तो अग्रणी वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ने ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका की वायरल वेक्टर वैक्सीन को कोविशील्ड नाम से लॉन्च करेगा, जबकि नोवावैक्स की प्रोटीन सबयूनिट वैक्सीन तक भी भारत अपनी पहुंच बना चुका है। बर्न्सटीन की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया हासिल करने के लिए सुरक्षा और क्षमता, दोनों ही स्तर पर वैक्सीन के पहले व दूसरे चरण के डाटा आशाजनक साबित हुए हैं। 

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Coronavirus Vaccine - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
कब आएगी वैक्सीन, कितनी होगी कीमत?
  • रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि भारतीय बाजार में साल 2021 की पहली तिमाही के दौरान एक सफल वैक्सीन आ जाएगी। रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि वैक्सीन की एक खुराक के लिए भारतीय मरीजों को करीब तीन से छह डॉलर यानी 225 रुपये से 550 रुपये तक खर्च करना पड़ सकता है।
  • मालूम हो कि गेट्स फाउंडेशन से जुड़ी गावी एलायंस ने ऑक्सफोर्ड वाली वैक्सीन के उत्पादन के लिए सीरम इंडिया संग साझेदारी की है, जिसके तहत भारत और आर्थिक रूप से पिछड़े देशों के लिए वैक्सीन की कीमत 225 रुपये तक होगी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
लोगों को कबतक लग पाएगी वैक्सीन?
  • इस रिपोर्ट में कहा गया है कि टीकाकरण अभियान में लंबा समय लग जाएगा। बड़े पैमाने पर टीकाकरण कार्यक्रम में भारत को अपेक्षाकृत कम अनुभव है, जिसे देखते हुए कहा गया है कि देश में हर्ड इम्युनिटी हासिल करने में दो साल लग सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में सरकारी टीकाकरण कार्यक्रमों का जो वर्तमान आउटपुट है, उसे यदि दोगुना कर दिया जाए, तो भी टीकाकरण में 18 से 20 महीने लग जाएंगे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इस रिपोर्ट में पोलियो उन्मूलन अभियान का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इसे साल 2011 में शुरू किया गया और हालिया तीव्र गति का मिशन इंद्रधनुष बड़े पैमाने पर चलने वाले अभियानों का उदाहरण साबित हुआ है। लेकिन यह उस स्तर का महज एक तिहाई है, जिसकी कोरोना वैक्सीन हरेक को उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्यक्रम के तहत जरूरत होगी। देश में वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड चेन स्टोरेज और प्रशिक्षित लोगों की कमी को भी बड़ी बाधा बताया गया है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
सबसे पहले किन्हें मिलेगी वैक्सीन
  • वैक्सीन उपलब्ध होने के बाद स्वास्थ्यकर्मियों और बुजुर्गों को प्राथमिकता मिल सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैक्सीन देने में स्वास्थ्यकर्मियों, 65 साल से ज्यादा के बुजुर्गों, आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों और जनसंख्या के कमजोर आार्थिक वर्ग को टीकाकरण अभियान के पहले बैच में प्राथमिकता दी जा सकती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • इस रिपोर्ट में एस्ट्राजेनेका/ऑक्सफोर्ड की वायरल वेक्टर वैक्सीन और नौवावेक्स की प्रोटीन सबयूनिट वैक्सीन में तुलना भी की गई है, जिसमें नोवावैक्स को बेहतर बताया गया है। नोवावैक्स की वैक्सीन लेने वालों में अपेक्षाकृत ज्यादा एंटीबॉडी और वायरल न्यूट्रिलाइजेशन दिखाई दिया। इसको मापने का जो पैमाना है, उसके अनुसार नोवावैक्स में यह करीब 5-6 एचसीएस के स्तर पर था, जबकि ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन औसत के करीब रही। 
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Coronavirus Vaccine Update - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
  • तुलना से इतर यह बात भी कही गई है कि दोनों वैक्सीन के कॉन्वलेसंट यानी ठीक होने वाले  ग्रुप अलग-अलग थे। दोनों वैक्सीन का फिलहाल तीसरे और अंतिम चरण का परीक्षण चल रहा है।  दोनों वैक्सीन की 21 से 28 दिन में दूसरी डोज की जरूरत पड़ती है। बर्न्सटीन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के लिए अच्छी बात यह है कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की दोनो के साथ साझेदारी है और यह कंपनी देश में पहली वैक्सीन देने की सबसे अच्छी स्थिति में है।
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