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Coronavirus Vaccine: वैक्सीन का 'ड्राई रन' क्या होता है और ये कितना महत्वपूर्ण है? विशेषज्ञ से जानें सबकुछ

Tue, 29 Dec 2020 06:48 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत में कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock
भारत में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले बढ़कर अब एक करोड़ दो लाख से भी अधिक हो चुके हैं जबकि एक लाख 47 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अब तक यहां 97 लाख 82 हजार से अधिक लोग संक्रमण मुक्त भी हो चुके हैं। इसी के साथ देश में कोविड से स्वस्थ होने की दर बढ़कर 95.83 फीसदी हो गई है। माना जा रहा है कि अगले साल की शुरुआत में भारत में वैक्सीन जरूर मिल जाएगी, लेकिन इससे पहले 28 और 29 दिसंबर को चार राज्यों के दो जिलों में टीकाकरण का 'ड्राई रन' किया जा रहा है। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं ये वैक्सीन का 'ड्राई रन' क्या होता है और ये कितना महत्वपूर्ण है?
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोरोना पॉजिटिव हो जाने के बाद पांचवां, 10वां दिन कितना अहम होता है? 
  • दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल के डॉ. नीरज गुप्ता बताते हैं, 'कोरोना का इनक्यूबेशन पीरियड एक से 14 दिन का होता है। यह कहा जाता है कि पांचवें दिन लक्षण आ ही जाते हैं। इस लिहाज से पांचवां दिन अहम है। वहीं 12वें दिन तक संक्रमण खत्म हो जाता है। भले ही आरटी-पीसीआर में पॉजिटिव आ जाए, लेकिन 12वें दिन तक वायरस बहुत कमजोर पड़ जाता है। वायरस इतना कमजोर हो चुका होता है कि वह व्यक्ति किसी और को संक्रमित नहीं कर पाता है। इस दौरान अगर व्यक्ति का स्तर नीचे नहीं जा रहा है, तो मरीज को ठीक मान लिया जाता है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या सभी वैक्सीन एक तरीके से बनाई गई हैं? 
  • डॉ. नीरज गुप्ता बताते हैं, 'पहली बार ऐसा हो रहा है कि कोई भी वैक्सीन एक साल के भीतर तैयार कर जनता को दी जा रही है। कम से कम 50 वैक्सीन अभी भी एक्टिव स्टेज पर हैं। मुख्य रूप से दो प्रकार की वैक्सीन होती हैं। पहली डीएनए पद्धति से बनती हैं, जिसमें वैक्सीन आने वाले वायरस को कमजोर कर देती है और व्यक्ति बीमार नहीं पड़ता है। दूसरी आरएनए पद्धति से बनती हैं, जिसे देने के बाद शरीर में कोरोना वायरस जैसे स्पाइक प्रोटीन वाले कण पैदा हो जाते हैं और शरीर में उनसे लड़ने की क्षमता विकसित हो जाती है, ताकि जब असली कोरोना वायरस आए तो वो हमला नहीं कर पाए।'  

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वैक्सीन का ड्राई रन क्या होता है? 
  • डॉ. नीरज गुप्ता बताते हैं, 'भारत में वैक्सीन जनवरी के किसी भी हफ्ते में उपलब्ध हो सकती है। वैक्सीन को कुछ खास चीजों की जरूरत होती है, उसके लिए कोल्ड चेन मेंटेन करनी होती है। उसी तरह वैक्सीन लगाने के बाद भी अगर कोई रिएक्शन हो तो उसकी मॉनिटरिंग की जाती है, उसके लिए कोविन एप बनाया गया है। इस ड्राई रन में अगले दो दिनों में चार राज्यों के दो-दो जिलों में चुनिंदा क्षेत्रों में वो सारी प्रक्रिया की जाएगी, जो वैक्सीन देने के लिए होगी। बस वैक्सीन नहीं दी जाएगी। अगर किसी भी प्रकार की खामी होगी तो पहले पता चल जाएगी।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वैक्सीन का ड्राई रन कितना महत्वपूर्ण है? 
  • डॉ. नीरज गुप्ता बताते हैं, 'वैक्सीन का ड्राई रन केवल इंजेक्शन मात्र देने के लिए नहीं होता है। इसमें यह देखा जाता है कि कोल्ड चेन मेंटेन हो रही है कि नहीं, जहां जा रही है वो गांव है या शहरी क्षेत्र है, जिला अस्पताल है या स्वास्थ्य केंद्र है, वहां कैसे पहुंचेगी। वहां भीड़ कैसे नियंत्रित होगी, एक बार में कितने लोगों को दी जाएगी। फिर उनको कितनी देर विश्राम करने के लिए बोला जाएगा। उसी दौरान कंप्यूटर के जरिए रिकॉर्ड फीड किया जाएगा। इस दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर व्यक्ति को वैक्सीन सुचारू रूप से मिल सके और उसकी प्रभावकारिता बनी रहे।' 
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