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राहत: भारत में कहां तैयार हो रही है नेजल वैक्सीन? क्या है और कैसे करेगी बच्चों पर काम? यहां जानें सबकुछ

Mon, 24 May 2021 01:22 PM IST
प्रकाश चंद जोशी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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nasal vaccine (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
डॉ परवेश मलिक
फिजिशियन

Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik

देशभर में कोरोना वायरस की दूसरी लहर पहली लहर के मुकाबले काफी लोगों को संक्रमित कर रही है। साथ ही ये वायरस अब तक काफी संख्या में लोगों की जान भी ले चुका है। वहीं, अब तो इस वायरस का खतरा बुजुर्ग और युवाओं के अलावा बच्चों के सिर पर भी मंडरता हुआ नजर आ रहा है। ऐसे में बच्चों को इस वायरस से बचाने के लिए नेजल वैक्सीन यानी नाक की वैक्सीन का दूसरे और तीसरे ट्रायल की टेस्टिंग चल रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नेजल वैक्सीन क्या है और ये कैसे काम करेगी? शायद नहीं, तो चलिए इस बारे में जानते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
क्या है नाक की वैक्सीन?
  • दरअसल एक नाक की वैक्सीन को नाक के रास्ते एडमिनिस्टर्ड किया जाता है और इसके लिए सिरिंज की जरूरत भी नहीं होती है। वहीं, बायोटेक कंपनी की मानें तो इस नेजल वैक्सीन की सिर्फ चार बूंदे ही जरूरी होंगी। नाक के दोनों छेदों में इसकी दो-दो बूंदें डाली जाएंगी। वहीं, माना जा रहा है कि ये बच्चों पर काफी असरदार होगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कैसे करेगी काम?
  • वहीं, बात अगर इसकी करें कि ये वैक्सीन कैसे काम करेगी, तो आपको बता दें कि कोविड-19 के मामले में एक नाक का टीका कथित तौर पर नाक के एयरवेज से शुरू होने वाले रेस्पिरेटरी पैसेज के अंदर संक्रमण की जगह पर एक इम्यूनिटी प्रतिक्रया उत्पन्न करने में सक्षम है। बच्चों के मामले में इसे कोरोना के इंफेक्शन और ट्रांसमिशन को रोकने के लिए जरूरी माना जाता है।

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वैक्सीन - फोटो : PTI
भारत में कहां-कहां बन रहे हैं ये टीके?
  • भारत में इस नाक के टीके का निर्माण हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कर रहा है। इसमें वो वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन की मदद ले रहा है, जिससे वो BBV154 नाक का टीका विकसित कर रहा है। कहा जा रहा है कि इसका टेस्टिंग का पहला चरण सफल हुआ था, और वहीं अब इसके दूसरे और तीसरे चरण की टेस्टिंग चल रही है।
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covid 19 vaccine - फोटो : PTI
बायोटेक के अलावा सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भी एक अन्य नाक के टीके इंट्रासेल COVI-VAC की प्रभावकारिता की टेस्टिंग कर रहा है। इसमें वो न्यूयॉर्क स्थित वैक्सीन निर्माता कोडजेनिक्स की मदद ले रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि ये टीके जल्द ही सारे क्लिनिकल ट्रायल सफल रूप से पार कर लेंगे, जिसका इंतजार हर किसी को है।
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सौम्या स्वामीनाथन (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter
बच्चों के लिए गेम चेंजर -वैज्ञानिक डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन
  • वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ की प्रमुख वैज्ञानिक डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि कोरोना की नेजल वैक्सीन बच्चों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है, क्योंकि जल्द ही दुनिया के पास बच्चों के लिए वैक्सीन होगी। लेकिन इस साल ऐसा नही होने जा रहा है, और कम्यूनिटी स्प्रेड कम होने पर हमें स्कूलों को खोलना चाहिए।

नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल मेंसकाम करने से पहले डॉ परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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