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कोरोना वायरस: भारत में दक्षिण कोरिया और अमेरिका के मुकाबले कम जांच, जल्द बढ़ेगी रफ्तार

Tue, 31 Mar 2020 08:24 AM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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कोरोना वायरस का पहला मामला भारत में आए दो महीने हो गए हैं। सरकार का दावा है कि अब भी भारत संक्रमण के तीसरे चरण में नहीं पहुंचा है। लेकिन ये भी सच है कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में अभी तक कम लोगों की जांच के लिए भारत की आलोचना हो रही है। भारत में कोरोना वायरस संक्रमण का पता लगाने वाले टेस्ट बेहद कम हुए हैं। यहां प्रति 10 लाख लोगों में महज 6.8 लोगों के टेस्ट किए गए हैं, जो दुनिया भर के देशों में सबसे निम्नतम दर है।

शुरुआत में, भारत में केवल उन लोगों के टेस्ट किए गए जो हाई रिस्क वाले देशों की यात्रा से लौटे थे या फिर किसी संक्रमित मरीज या मरीज का इलाज कर रहे स्वास्थ्यकर्मी के संपर्क में आए थे। बाद में सरकार की ओर से कहा गया कि सांस संबंधी गंभीर बीमारियों के चलते अस्पताल में भर्ती मरीजों की भी जांच होगी।
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कोरोना वायरस टेस्टिंग किट
लेकिन संक्रमण का दायरा हर दिन बढ़ता जा रहा है, आशंका जताई जा रही है कि कोरोना वायरस संक्रमण के मामले आने वाले दिनों में और तेजी से बढ़ेंगे। इन सबको देखते हुए बीते गुरुवार को, भारत में दो प्राइवेट लैब्स को कोरोना वायरस टेस्टिंग किट बनाने की मंजूरी आईसीएमआर ने दी है।

पुणे की मायलैब डिस्कवरी भारत की पहली ऐसी फर्म है जिसे टेस्टिंग किट तैयार करने और उसकी बिक्री करने की अनुमति मिली है। मायलैब की प्रत्येक किट से 100 सैंपलों की जांच हो सकती है।  इस किट की कीमत 1200 रुपये है, जो विदेश से मंगाए जाने वाली टेस्टिंग किट के 4,500 रुपये की तुलना में बेहद कम है।

मायलैब डिस्कवरी की रिसर्च और डेवलपमेंट प्रमुख वायरोलॉजिस्ट मीनल दखावे भोसले ने बीबीसी को बताया, "हमारी किट कोरोना वायरस संक्रमण की जांच ढाई घंटे में कर लेती है, जबकि विदेश से आने वाले किट से जांच में छह-सात घंटे लगते हैं।"
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कैसे होती है कोविड19 की जांच
कोविड19 की जांच के लिए अब तक दो स्तर जांच होती है। इसके लिए नाक और मुंह से पहले स्वैब लिया जाता है। पहले टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद ही दूसरा टेस्ट किया जाता है। दोनों टेस्ट पॉजिटिव पाए जाने पर ही मरीज को कोरोना पॉजिटिव माना जाता है। फिलहाल भारत में इस टेस्ट को पूरा करने में छह घंटे का वक्त लगता है।

लेकिन भारत में जिन प्राइवेट कंपनियों को अब नए टेस्ट किट बनाने की इजाजत दी गई है, उनको नए किट बनाने में महज ढाई घंटे का वक्त लगेगा और वो भी बिना दो टेस्ट किए। मायलैब के मैनेजिंग डायरेक्टर हसमुख रावल ने बीबीसी से बताया कि उनकी टेस्टिंग किट में दोनों टेस्ट एक साथ ही किए जा सकेंगे और वो भी ढाई घंटे के भीतर।

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टेस्टिंग किट कितने तरह के होते हैं
कोरोना संक्रमण के जांच के लिए दो तरह के किट आते हैं। एक किट एंटीजीन बेस्ड होता है और दूसरा एंटी बॉडी बेस्ड। डॉक्टर एसके सरीन इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बाइलिनरी साइंस, दिल्ली के निदेशक हैं। उन्होंने बीबीसी को बताया कि दुनिया के तमाम देश कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए फिलहाल एंटी जीन बेस्ड टेस्ट का ही इस्तेमाल कर रहे हैं।

उनके मुताबिक एंटी जीन बेस्ड टेस्ट दरअसल वायरस का पता लगाने के लिए किया जाता है जबकि एंटी बॉडी बेस्ड टेस्ट कोरोना संक्रमण के रिकवरी के बाद के स्टेज का पता लगाने के लिए किया जाता है। डॉक्टर सरीन के मुताबिक, "जो आदमी कोरोना संक्रमण से रिकवर कर गए वो ठीक होने के बाद काम पर जा सकते हैं। उनके लिए एंटी बॉडी टेस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है।"

पहले स्टेज के मरीजों के लिए दुनिया के तमाम देश एंटी जीन बेस्ड टेस्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए भारत में भी यही टेस्ट इस्तेमाल किया जा रहा है।
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भारत में देरी क्यों?
डॉक्टर सरीन का दावा है कि कोरोना के लिए एंडी बॉडी टेस्ट किट पांच-सात दिन पहले ही बने है। उनके मुताबिक भारत में उन टेस्ट किट की जरूरत है जो 100 फीसदी नेगेटिव केस को 100 फीसदी नेगेटिव बता सके और 100 फीसदी पॉजिटिव केस को 100 फीसदी पॉजिटिव बता सकें। किसी भी सैंपल के टेस्ट रिपोर्ट आने में कितना वक्त लगता है वो इस बात से पता लगाया जा सकता है कि कितनी जल्दी डीएनए एक्सट्रैक्ट निकाल पाता है, उसका टेस्ट रिजल्ट आने का रन टाइम कितना है, टेस्ट रिजल्ट को रीड और रिपोर्ट करने में कितना वक्त लगता है।

दक्षिण कोरिया ने टेस्ट किट विकसित किए हैं जिनमें रिजल्ट 45 मिनट से एक घंटे में आ जाता है। लेकिन भारत में देरी क्यों? इस सवाल पर डॉक्टर सरीन कहते हैं, "ये वायरस अभी बहुत नया है। दक्षिण कोरिया, अमेरिका और चीन में पहले आया, भारत में बाद आया। विदेश के जिन देशों से भारत की हम तुलना करना चाह रहे हैं, वो तकनीक के मामले में हमसे ज्यादा विकसित हैं। हर देश की अपनी अलग प्रथामिकताएं हैं। फिलहाल हमारी प्रथामिकता है कि ये देश में ज्यादा ना फैले।"

जानकारों के मुताबिक टेस्टिंग किस देश को कितनी करनी है इसका फैसला लेने के कई पैमाने हैं। मसलन एक पैमाना ये हो सकता है कि संक्रमण उस देश में किस स्तर पर है, दूसरा ये की वहां की जनसंख्या कितनी है तीसरा देश की प्रथामिकता क्या है और चौथा देश में सुविधाएं कैसी है और निपटने की तैयारी कितनी है।
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बाकी देशों में टेस्टिंग
आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव के मुताबिक फ्रांस हर सप्ताह 10 हजार लोगों के टेस्ट कर रहा है, ब्रिटेन में 16 हजार लोगों की टेस्टिंग हर हफ्ते हो रही है जबकि अमेरिका में तकरीबन 26 हजार लोगों की टेस्टिंग प्रति सप्ताह हो रही है।

जो देश प्रति सप्ताह ज्यादा लोगों की टेस्टिंग कर रहे हैं उनमें शामिल हैं दक्षिण कोरिया जो तकरीबन 80 हजार लोगों की टेस्टिंग एक हफ्ते में कर रहा है। वैसे ही जर्मनी में तकरीबन 42 हजार और इटली में हर हफ्ते तकरीबन 52 हजार लोगों की टेस्टिंग की जा रही है।
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बीते रविवार को केंद्र सरकार के संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉक्टर भार्गव ने कहा था कि भारत में प्रति सप्ताह 60 से 70 हजार लोगों की टेस्टिंग करने की क्षमता है। इसी कड़ी में सरकार ने सोमवार को 25 प्राइवेट लैब को कोविड19 के मरीजो को टेस्ट करने की इजाजत दे दी है। इनके लैब्स के पास देश भर में हजारों कलेक्शन सेंटर भी हैं।

भारत में आज की तारीख में 113 लैब्स ऐसे हैं जिसमें टेस्टिंग हो रही है। अब तक दो महीने में 35 हजार लोगों का सैंपल गया है। आरसीएसआर के डॉक्टर रमन आर गंगाखेड़कर के मुताबिक भारत फिलहाल अपनी टेस्टिंग क्षमता का 30 फीसदी ही टेस्ट किट का उपयोग कर रहा है। और टेस्टिंग किट की किसी तरह की कोई कमी नहीं है।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजयरघवन के मुताबिक भारत के लैब्स में भी एन्टी बॉडी बेस्ड टेस्ट पर काम चल रहा है। विश्व स्तर पर ऐसे टेस्ट की सफलता को देख कर भारत भी अपने टेस्टिंग क्षमता को बढ़ने पर आने वाले दिनों में विचार कर सकता है।

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Abbott Test Kit - फोटो : Twitter@Abbott
अमेरिका में कोरोना टेस्ट
दुनिया की जानी-मानी फार्मा और हेल्थकेयर कंपनी एबॉट भारत में वो टेस्टिंग किट ला सकती है जिससे पांच मिनट में कोरोना वायरस के संक्रमण का पता चल जाता है। ये रिपोर्ट अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी है। अमेरिका का फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) पहले ही इस टेस्टिंग किट को मंजूरी दे चुका है। ये टेस्टिंग किट पोर्टेबल है यानी इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। फिलहाल यह किट अभी सिर्फ अमेरिका में उपलब्ध है। भारत में ये नहीं आई है।

हालांकि इंडियन एक्सप्रेस से हुई बातचीत में एबॉट के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी 24 घंटे काम करके ज्यादा से ज्यादा किट बनाने की कोशिश कर रही है ताकि इसे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाया जा सके। अमरीकी अस्पतालों में अगले हफ्ते से इस किट के जरिए कोरोना संक्रमण के टेस्ट होने शुरू हो जाएंगे। कंपनी ने कहा कि इससे रोज 50 हजार टेस्ट किए जाने की उम्मीद है। हालांकि आईसीएमआर के मुताबिक ये एंटी बॉडी बेस्ट टेस्ट हैं।
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Abbott test kit - फोटो : Twitter@Abbott
दक्षिण कोरिया में कोरोना टेस्ट
शुरू में दक्षिण कोरिया में कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े। लेकिन इसने संक्रमण की पुष्टि के लिए टेस्ट विकसित किया। पहले जहां दक्षिण कोरिया में रोज करीब 10 हजार लोगों का मुफ्त परीक्षण हो रहा है, अब ये संख्या बढ़ कर 20 हजार हो गई है।

दक्षिण कोरिया में दर्जनों ऐसे केंद्र बनाए गए हैं जहां आप गाड़ी में बैठे-बैठे टेस्ट करा सकते हैं। यहां आपके नाक और मुंह का स्वैब लिया जाता है। और आप घर जा सकते हैं। टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने पर आपको कॉल करके बताया जाता है, जबकि नेगेटिव आने पर आपको फोन पर सिर्फ एक मैसेज भेजा जाता है।

दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस टेस्ट के लिए बनाए गए ये लैब्स 24x7 काम कर रहे हैं। यहां कोरोना वायरस टेस्ट के लिए 96 पब्लिक और प्राइवेट लैब का निर्माण किया है। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि इस तरह से लोगों की जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस से मौत की दर 0.7 फीसदी है। अगर वैश्विक स्तर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर जारी की गई दर की बात करें तो यह 3.4 फीसदी है। दक्षिण कोरिया की आबादी पांच करोड़ है।
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