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बांग्लादेश में तैयार हो रही महज 225 रुपये की जांच किट, 15 मिनट में बता देगी कोरोना है कि नहीं

Sun, 29 Mar 2020 06:12 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच देश और दुनिया के वैज्ञानिक इसकी जांच से लेकर इलाज और वैक्सीन विकसित किए जाने को लेकर रिसर्च में लगे हैं। इसकी दवा और वैक्सीन तैयार करने को लेकर अलग-अलग कंपनियों और वैज्ञानिकों की ओर से जल्द तैयार करने का दावा किया जा रहा है। इस बीच भारतीय वैज्ञानिक मीनल दखावे ने कोरोना की जांच के लिए बहुत सस्ती किट तैयार की है। वहीं बांग्लादेश में भी वैज्ञानिक बेहद सस्ते और कम समय में परिणाम बताने वाले किट तैयार करने का दावा कर रहे हैं। दावा है कि यह किट महज 15 मिनट में कोरोना की जांच कर रिजल्ट बता देगी।   
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बांग्लादेश के दावे के बीच इधर भारत में जांच किट तैयार है। भारतीय महिला वैज्ञानिक मीनल दखावे भोसले ने महज 1200 रुपये में एक टेस्टिंग किट तैयार की है, जो करीब 4500 रुपये वाली विदेशी टेस्टिंग किट की तुलना में काफी सस्ती है। दावा है कि यह किट कोरोना वायरस संक्रमण की जांच ढाई घंटे में कर लेती है, जबकि विदेशी किट को जांच में छह-सात घंटे लग जाते हैं। महिला वायरोलॉजिस्ट ने मीनल अपने बच्चे को जन्म देने से महज कुछ घंटे पहले तक लगातार काम करके जांच किट तैयार की।
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वहीं, बांग्लादेश की सरकार ने भी वहां बनाए गए किट के उत्पादन की अनुमति दे दी है। बांग्लादेश ने जो किट बनाया है, उसकी लागत महज तीन डॉलर यानी करीब 225 भारतीय रुपये हैं। बांग्लादेश के वैज्ञानिकों के एक दल ने देश और दुनिया में बढ़ते कोरोना संकट को देखते हुए आनन-फानन में मेहनत कर यह किट तैयार किया है। इस किट को तैयार करने वाले वैज्ञानिकों का दावा है कि यह किट 15 मिनट में परिणाम बता देगी। वैज्ञानिकों का दावा है कि तीन डॉलर  वाले किट के ज्यादा उत्पादन होने पर लागत और कम हो जाएगी। 

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किट की गुणवत्ता पर संशय के बावजूद वहां की सरकार ने इसके ज्यादा उत्पादन की अनुमति दे दी है। सरकार का मानना है कि कमसे कम इसके उपलब्ध होने से सीमित जांच सुविधा की परेशानी झेल रहे स्वास्थ्यकर्मियों को कुछ तो राहत मिलेगी। चीन में जो किट तैयार हुआ है, उसे दुनिया के कई देश मंगा रहे हैं, लेकिन चीन के आश्वासन के बाद भी बांग्लादेश को कोरोना से लड़ने की मदद पहले भारत से ही मिली। इसलिए बांग्लादेश अपने पड़ोसी भारत से हर जानकारी साझा भी कर रहा है। 
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रिसर्च - फोटो : demo pic
कैसे काम करेगा किट
इस किट के बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि यह शरीर में कोरोना वायरस से लड़ने वाले श्वेत रक्त कणों की स्थिति का अध्ययन करता है। यह पता किया जाता है कि क्या शरीर में कोरोना से लड़ने के लिए श्वेत रक्त कण प्रतिरोधक तैयार कर रहे हैं! इससे तुरंत ही रिपोर्ट पाना आसान है।
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शोध - फोटो : फाइल फोटो
बांग्लादेश में इस सस्ते किट को बनाने वाले इस रिसर्च टीम के अगुवा प्रोफेसर डॉक्टर बिजॉन कुमार सिल ने इससे पहले सार्स कोरोना वायरस जांचने वाली किट बनाई थी। उन्होंने 2003 में सिंगापुर में फैली इस बीमारी का पता लगाने के लिए इस किट को तैयार किया था। उन्होंने कहा कि इस विधि को डॉट ब्लॉट टेस्ट का नाम दिया गया है। यह शरीर में कोरोना प्रतिरोधक के बनने की प्रक्रिया की जांच करता है। बताया कि किसी भी वायरस का हमला होने पर श्वेत रक्त कण प्रतिरोधक बनाने लगता है। इसी आधार पर जांच का परिणाम आएगा। 
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डॉ सिल के मुताबिक कोरोना वायरस के के नाक, मुंह और आंख से अंदर जाने की ज्यादा संभावना होती है जाता है। यह वायरस सबसे पहले इंसान के गले में जगह बनाता है और फिर वहां से एक प्रोटीन तैयार करने लगता है। इस वायरस के बाहरी आवरण पर प्राटीन की जो परत होती है, उसमें डीएनए और आरएनए होते हैं, इसकी वजह से यह अपनी संख्या बढ़ाता चला जाता है। जब इसके आगे मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है और समय पर इलाज नहीं मिलने से मौत हो जाती है। 

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यह किट सफेद रक्त कणों के द्वारा तैयार किए जाने वाले प्रतिरोधक का अध्ययन करके परिणाम बताता है। इसके लिए व्यक्ति के खून, लार और थूक की जांच से कुछ मिनटों में रिपोर्ट आ जाती है। डॉ सिल की इस किट को इसलिए भी गंभीरता से लिया जा रहा है, क्योंकि सार्स वायरस की जांच के लिए बनाए गए इनके किट को चीन ने भी मान्यता दी थी। 
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हालांकि डॉ सिल के मुताबिक वायरस का हमला होने के तीन दिन बाद शरीर में प्रतिरोधक बनना शुरू होता है। ऐसे में अगर प्रतिरोधक बनने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले जांच होने की स्थिति में रिपोर्ट गलत भी आ सकती है। उनकी टीम के अन्य वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रतिरोधक बनने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद की गई जांच की रिपोर्ट 90 फीसदी सही होती है। बांग्लादेश, जहां न्यूनतम चिकित्सा उपकरणों की भी कमी है, ऐसे में यहां के लिए यह किट बहुत काम की चीज है। 
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