कोरोना वायरस को लेकर अध्ययन कर रही शोधकर्ताओं की टीम ने पाया है कि साल 2019 के आखिर में सामने आए सार्स-सीओवी-2 वायरस के रूप में अब कई प्रकार से बदलाव आ चुका है। कोरोना वायरस पहले की अपेक्षा अब अधिक संक्रामक हो गया है, साथ ही कुछ स्थितियों में इसके लंबे समय तक जीवित रहने की आशंका भी बढ़ गई है। यूरोप सहित भारत में हाल के महीनों में बढ़े संक्रमण के लिए विशेषज्ञ इसे एक प्रमुख कारण के तौर पर देख रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस के स्वरूप में आया यह परिवर्तन काफी चुनौतीपूर्ण स्थितियों का कारण बन सकता है, इस खतरे को ध्यान में रखते हुए सभी लोगों को अतिरिक्त सुरक्षा बरतते रहने की आवश्यकता है।
संक्रमण के शुरुआती दिनों के अध्ययनों में माना जा रहा था कोरोना वायरस सतह पर कुछ मिनटों तक ही जीवित रह सकता है, साथ ही दूसरी लहर तक अध्ययनों में इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई थी कि वायरस हवा में भी रह सकते हैं या नहीं? हालांकि म्यूटेशन के बाद सामने आए वैरिएंट्स को लेकर वैज्ञानिकों का कहना है कुछ स्थितियों में कोरोना वायरस कई चीजों पर 30 दिनों से अधिक समय तक भी जीवित रह सकता है, इसके अलावा हवा में भी वायरस के कारण इनडोर संक्रमण का खतरा बना हुआ है। इन निष्कर्षों को देखते हुए कोरोना को हल्के में लेने की गलती करनी भारी पड़ सकती है।