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कोरोना संक्रमण काल में याद आया प्लेग, भारत में ही खोजा गया था इस महामारी का टीका

Thu, 02 Apr 2020 07:56 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जीवाणुविज्ञानी वालदेमार हाफ्फिन - फोटो : Social Media
चीन के वुहान से दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस संक्रमण के मामले हर दिन बढ़ रहे हैं। कोरोना वायरस से निपटने के लिए तमाम तरह के प्रयास हो रहे हैं। अबतक इसकी कोई दवा उपबल्ध नहीं है, लेकिन इसका इलाज लक्षणों के आधार पर किया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के मुताबिक अलग-अलग लक्षणों वाले लोगों के इलाज के लिए अलग-अलग ट्रीटमेंट और दवाओं की मात्रा बताई गई है। वहीं, दूसरी ओर इसकी वैक्सीन बनाने में भी अलग-अलग देशों के वैज्ञानिक लगे हुए हैं। ऐसे समय में प्लेग को खत्म करने वाले बैक्टीरियोलॉजिस्ट यानी जीवाणुविज्ञानी वालदेमार हाफ्फिन के टीके और उसके लिए भारत में किए गए रिसर्च को याद किया जा रहा है।  
 
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कोरोना वायरस की वजह से इस शताब्दी की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रही दुनिया को हाफ्किन का अनुसंधान याद आ रहा है। ऐसे समय जब दुनिया भर में इस वायरस से 8.85 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं,  44 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं और टीकाकरण के लिए इस वायरस का टीका उपलब्ध नहीं है, तो डॉक्टर और अनुसंधानकर्ता प्लेग को खत्म करने वाले वायरोलॉजिस्ट वालदेमार हाफ्फिन को याद कर रहे हैं। रूस के रहने वाले हाफ्किन ने भारत में 22 साल बिताए थे।
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भारत में 22 साल बिताने वाले हाफ्फिन ने मुंबई के सरकारी ग्रांट मेडिकल कॉलेज और सर जेजे अस्पताल की इमारत में बुबोनिक प्लेग के टीके पर अनुसंधान किया था। इस टीके ने लाखों जिंदगियां बचाई, जिससे पूरे मानवता की सेवा हुई। उन्हें कॉलरा का टीका बनाने का भी श्रेय दिया जाता है। जेजे अस्पताल के रेजीडेंट मेडिकल अधिकारी डॉक्टर रेवत कानिन्दे ने कहा कि इस इमारत को देखते हुए और इसकी समृद्ध विरासत और हाफ्किन के समृद्ध अनुसंधान याद आते हैं। उन्हें इस बात का दुख है कि अभी तक इस वायरस का कोई टीका नहीं है।

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डॉ. कानिन्दे ने कहा कि 125 साल पहले एक व्यक्ति रूस से यहां आया और वैज्ञानिक सोच के साथ ऐतिहासिक काम किया। जेजे हॉस्पिटल के जिस कमरे में हाफ्किन ने टीका बनाया था, अब उस कमरे का इस्तेमाल एमबीबीएस के दूसरे वर्ष के छात्रों को लेक्चर दिए जाने में किया जाता है। उन्होंने कहा कि मूर्तियों और स्मारकों पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बदले अनुसंधान और शिक्षा पर धन खर्च होना चाहिए।
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सरकार ने ग्रांट मेडिकल कॉलेज और जेजे अस्पताल की इमारत की दीवार पर हाफ्किन के सम्मान में एक बोर्ड लगाया गया, जिसका उद्घाटन 27 अगस्त 1971 को तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरि ने किया था। ग्रांट मेडिकल कॉलेज इस साल मई में अपना 175 वां स्थापना दिवस मना रहा है और इसमें अतिथि के रूप में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भी बुलाने की योजना है लेकिन अभी इसके कर्मी कोरोना वायरस से निपटने में लगे हैं। उन्हें याद करने वाले अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि सरकारी संपत्तियों का इस्तेमाल मूर्ति और स्मारक बनाने की जगह चिकित्सीय अनुसंधान पर किया जाना चाहिए।
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