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Coronavirus Vaccine: ब्रिटेन में मिले कोरोना वैरिएंट के खिलाफ भी प्रभावी है फाइजर की वैक्सीन, शोध में दावा

Thu, 21 Jan 2021 11:33 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ब्रिटेन में मिला कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन दुनिया के कई देशों में फैल चुका है। भारत में तो इससे अब तक सैकड़ों लोग संक्रमित हो चुके हैं। इस नए स्ट्रेन पर मौजूदा कोरोना वैक्सीन प्रभावी होंगी या नहीं, इसको लेकर लगातार शोध चल रहे हैं। इस बीच बीते बुधवार को फाइजर और बायोएनटेक ने नए स्ट्रेन को लेकर वैक्सीन के परीक्षण के परिणाम जारी किए, जिसमें कहा गया है कि यह वैक्सीन ब्रिटेन वाले स्ट्रेन के खिलाफ भी असरदार पाई गई है। दरअसल, इस स्ट्रेन को काफी खतरनाक और संक्रामक बताया गया है, लेकिन फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन इस बीच एक उम्मीद की किरण बनकर आई है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
पिछले हफ्ते फाइजर कंपनी ने कहा था कि इसी तरह के एक प्रयोगशाला अध्ययन से पता चला है कि उसकी वैक्सीन एक प्रमुख म्यूटेशन के खिलाफ प्रभावी है, जिसे N501Y कहा जाता है, जो ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में फैलने वाले दो उच्च परिवर्तनीय नए वैरिएंट में पाया गया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इस नए अध्ययन को BioRxiv.org नामक वेबसाइट पर पोस्ट किया गया है। फाइजर और बायोएनटेक द्वारा विकसित वैक्सीन कोरोना वायरस के नए और अत्यधिक संक्रामक वैरिएंट पर भी असरदार है। हालांकि इस अध्ययन की अभी तक समीक्षा नहीं की गई है। इस अध्ययन के 11 लेखकों में बायोएनटेक के सह-संस्थापक उगुर साहिन और ओजलेम तुइरेसी हैं। साहिन मुख्य कार्यकारी हैं जबकि उनकी पत्नी तुइरेसी मुख्य चिकित्सा अधिकारी हैं।  

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वैज्ञानिकों के मुताबिक, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में फैल रहा कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन म्यूटेशन की वजह से तेजी से फैलता है। बायोएनटेक का कहना है कि अब तक कुल 16 म्यूटेशन की जांच की जा चुकी है। हालांकि नए स्ट्रेन को ध्यान में रखते हुए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका कंपनी के वैज्ञानिक भी संयुक्त रूप से वैक्सीन बनाने पर काम कर रहे हैं, ताकि नए स्ट्रेन से निपटा जा सके और महामारी को खत्म किया जा सके। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना के नए स्ट्रेन को लेकर वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक नए शोध में यह भी पाया गया है कि कोरोना से ठीक हो चुके लोग दूसरे स्ट्रेन से संक्रमित हो सकते हैं। इसके पीछे तर्क ये दिया गया है कि नया स्ट्रेन शरीर में मौजूद एंटीबॉडी के प्रोटीन में मौजूद स्पाइक को बेअसर करने के लिए प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर लेता है जो एंटीबॉडी के प्रतिक्रिया देने की क्षमता को प्रभावित करता है। इससे कोरोना से ठीक हो चुके लोगों के नए स्ट्रेन से संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है। 
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