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Coronavirus: कोरोना से ठीक होने के बाद आठ महीने तक रहती है इम्यूनिटी, वैज्ञानिकों का खुश करने वाला दावा

Wed, 23 Dec 2020 01:48 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना के खिलाफ इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को लेकर हमेशा से ये सवाल उठता रहा है कि आखिर संक्रमण के बाद ठीक होने वाले लोगों में कितने दिनों तक इम्यूनिटी बनी रहती है। पहले हुए अध्ययनों में यह दावा किया गया था कि कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी संक्रमण के शुरुआती कुछ महीने बाद ही खत्म हो जाती है, लेकिन अब एक नए अध्ययन में यह दावा किया जा रहा है कि कोरोना के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता संक्रमणमुक्त होने के कम से कम आठ महीने बाद तक रहती है। इस नए शोध को 'साइंस इम्युनोलॉजी' नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ऑस्ट्रेलिया की 'मोनाश यूनिवर्सिटी' के वैज्ञानिकों समेत विशेषज्ञों का कहना है कि रोग प्रतिरोधी प्रणाली में विशेष 'मेमोरी बी' कोशिकाएं वायरस के संक्रमण को 'याद रखती' हैं और अगर कोई व्यक्ति दोबारा वायरस के संपर्क में आता है यानीदूसरी बार संक्रमित होता है, तो सुरक्षात्मक एंटीबॉडी के तेजी से पैदा होने से सुरक्षात्मक रोग प्रतिरोधी क्षमता काम करने लगती है।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोरोना के खिलाफ इम्यूनिटी की जांच के लिए किए गए नए अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस से संक्रमित 25 मरीजों को चुना और संक्रमण के बाद चौथे दिने से लेकर 242वें दिन तक उनके खून के 36 नमूने लिए। इस दौरान उन्होंने पाया कि कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी में संक्रमण के 20 दिन बाद कमी आनी शुरू हो गई। हालांकि शोधकर्ताओं ने कहा कि सभी मरीजों में 'मेमोरी बी' कोशिकाएं थीं, जो वायरस के दो घटकों 'स्पाइक प्रोटीन' और 'न्यूक्लियोकैप्सिड प्रोटीन' में से एक घटक को पहचान लेती हैं। 'स्पाइक प्रोटीन' वायरस को कोशिकाओं में प्रवेश करने में मदद करता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि 'मेमोरी बी' कोशिकाएं कोरोना संक्रमण के आठ महीने बाद तक व्यक्ति के शरीर में मौजूद रहती हैं। उनका मानना है कि यह अध्ययन इस उम्मीद को प्रबल करता है कि कोरोना के लिए बनाई जा रहीं वैक्सीन का असर लंबे समय तक बना रहेगा। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इससे पहले आइसलैंड की एक बायोटेक कंपनी डीकोड जेनेटिक्स द्वारा किए गए अध्ययन में यह दावा किया गया था कि एक बार कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद शरीर में बनने वाली एंटीबॉडीज लोगों को कम से कम चार महीनों तक इम्यूनिटी दे सकती हैं। यह अध्ययन 30 हजार लोगों पर किया गया था, जिसके नतीजे 'द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन' में प्रकाशित हुए थे। 
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