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Coronavirus: चीन से फैलना शुरू नहीं हुआ कोरोना वायरस, नए शोध में हैरान करने वाला खुलासा

Sat, 05 Dec 2020 10:48 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
आज से करीब एक साल पहले वैज्ञानिकों को कोविड-19 बीमारी फैलने वाले सार्स-कोव-2 (Sars-Cov-2) कोरोना वायरस के बारे में तब पता चला जब चीन के वुहान में कुछ लोगों के इससे संक्रमित होने की खबर आई। लेकिन एक नए शोध के अनुसार महामारी का कारण बना ये वायरस इससे कई सप्ताह पहले लोगों को संक्रमित कर चुका था। अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेन्शन (सीडीसी) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस शोध के नतीजों को क्लिनिकल इन्फेक्शियस डिजीज नाम की पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। 

अब तक मौजूद जानकारी के अनुसार, आधिकारिक तौर पर वैज्ञानिकों को कोरोना वायरस के बारे में 31 दिसंबर 2019 को तब जानकारी मिली जब चीन के वुहान के हुबेई प्रांत के स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक चेतावनी जारी कर कहा कि यहां कई ऐसे मामले दर्ज किए जा रहे हैं जिनमें निमोनिया के गंभीर लक्षण हैं। उन्होंने इसे अजीब तरह की सांस लेने से संबंधित बीमारी कहा। लेकिन महामारी के शुरू होने के ग्यारह महीनों बाद अब शोधकर्ताओं का कहना है कि अमेरिका के तीन राज्यों में 39 ऐसे लोग हैं जिनके शरीर में कोरोना वायरस के एंटीबॉडीज मिले हैं। ये एंटीबॉडीज चीन के कोरोना वायरस से जुड़ी चेतावनी देने के दो सप्ताह पहले उनके शरीर में मौजूद थे। हालांकि अमेरिका में सार्स-कोव-2 (Sars- Cov-2) का पहला मामला 21 जनवरी 2020 को ही दर्ज किया गया था। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शोध के नतीजे क्या कहते हैं?

इस शोध के अनुसार, अमेरिका में 13 दिसंबर 2019 से लेकर 17 जनवरी 2020 के हुए ब्लड डोनेशन में कुल 7,389 लोगों ने खून दिया था। इनमें से 106 लोगों के खून के नमूनों में कोरोना वायरस की एंटीबॉडीज मिली हैं। किसी व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडीज मिलने का मतलब है कि वो व्यक्ति वायरस से संक्रमित हुआ है और उसके रोग प्रतिरोधक तंत्र ने उस वायरस से निपटने के लिए एंटीबॉडीज बनाई हैं। कैलिफोर्निया, ओरेगॉन और वॉशिंगटन में 13 से 16 दिसंबर के बीच लिए गए खून के नमूनों में से 39 में कोरोना वायरस की एंटीबॉडीज हैं। शोध के अनुसार, 67 नमूने जनवरी के महीने में मैसेचुसैट्स, मिशिगन, रोड आइलैंड और विस्कॉन्सिन में जमा किए गए थे। ये इन राज्यों में महामारी का प्रकोप बढ़ने से कहीं पहले था। अधिकतर लोग जो इस वायरस के संपर्क में आए थे वो पुरुष थे और उनकी औसत उम्र 52 साल थी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं का मानना है कि हो सकता है कि इन लोगों के शरीर में पहले से ही मौजूद किसी कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज बन गई हों। हालांकि उनका कहना है कि शोध के अनुसार अधिकतर लोग जिनमें एंटीबॉडीज मिले हैं उनमें से कई लोगों में उस वक्त कोविड-19 के लक्षण भी मौजूद थे। हालांकि शोधकर्ता कहते हैं कि अमेरिका में बड़े पैमाने पर वायरस का संक्रमण फरवरी के आखिरी सप्ताह में ही फैलना शुरू हुआ, लेकिन अब तक वायरस की उत्पत्ति को लेकर जो जानकारी है क्या इस शोध से उसमें कोई बदलाव आएगा? 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
आखिर वायरस सबसे पहले कहां पाया गया?

सार्स-कोव-2 (Sars-Cov-2) वायरस सबसे पहले कहां पाया गया, इस सवाल का उत्तर देना शायद कभी संभव न हो सके। इस तरह के कई संकेत मिले हैं कि ये वायरस दिसंबर 2019 में चीन के वुहान में पाए जाने से कई सप्ताह पहले से ही दुनिया में मौजूद था। लेकिन सीडीसी के शोधकर्ताओं का कहना है कि वो इस बारे में निश्चित तौर पर कुछ कह नहीं सकते कि ये लोग अपने देश में ही संक्रमित हुए थे या फिर यात्रा के दौरान वो वायरस की चपेट में आए थे। ब्लड डोनेशन कार्यक्रम का आयोजन करने वाली संस्था रेड क्रॉस का कहना है कि जिन लोगों के नमूने इकट्ठा किए गए थे, उनमें से केवल तीन फीसदी ने कहा था कि उन्होंने हाल में विदेश यात्रा की है। इसमें से पांच फीसदी का कहना था कि वो एशियाई देश के दौरे से लौटे हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इससे पहले हुए कुछ और शोध में भी चीन की चेतावनी देने से पहले दूसरे देशों के लोगों में कोरोना वायरस होने के सबूत मिले थे। इसी साल मई में फ्रांसीसी वैज्ञानिकों ने कहा कि 27 दिसंबर को पेरिस के नजदीक एक व्यक्ति का इलाज संदिग्ध निमोनिया मरीज के तौर पर किया गया था। ये व्यक्ति वास्तव में कोरोना वायरस से संक्रमित थे। कई देशों में शोधकर्ताओं ने सीवर के पानी के नमूनों में कोरोना वायरस पाए जाने की बात की थी। ये नमूने महामारी की घोषणा से कई सप्ताह पहले लिए गए थे। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
जून के महीने में इटली के वैज्ञानिकों ने कहा था कि मिलान शहर के सीवर के पानी में 18 दिसंबर को कोरोनो वायरस के निशान मिले थे। हालांकि यहां कोरोना वायरस के पहले मामले की पुष्टि काफी बाद में हुई थी। स्पेन में हुए एक शोध के अनुसार बार्सिलोना में जनवरी के मध्य में सीवर के पानी के जो नमूने लिए गए थे, उनमें कोरोना वायरस के निशान मिले। लेकिन यहां चालीस दिन बाद कोरोना के पहले मामले की पुष्टि हुई थी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ये वायरस ब्राजील कैसे पहुंचा इसे लेकर भी कई तरह के सवाल उठाए गए हैं। यहां कोरोना संक्रमण का पहला मामला 26 फरवरी 2020 को पाया गया था। साओ पाउलो के 61 साल के एक व्यापारी कोरोना के पहले मरीज जो कुछ दिनों पहले इटली की यात्रा से लौटे थे। उस वक्त तक इटली महामारी का दूसरा केंद्र बन चुका था। हालांकि फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ सैंटा कैटरीना (यूएफएससी) के शोधकर्ताओं के एक दल ने इससे कुछ महीने पहले 27 नवंबर 2019 को सीवर के पानी में वायरस पाए जाने की बात की थी। 

ओस्वाल्डो क्रूज फाउंडेशन द्वारा किए गए एक और शोध के अनुसार ब्राजील में आधिकारिक तौर पर कोरोना संक्रमण के पहले मरीज की पुष्टि होने से करीब एक महीने पहले 19 से 25 जनवरी के बीच यहां सार्स-कोव-2 (Sars-Cov- 2) संक्रमण का पहला मामला मिला था। हालांकि अब तक ये नहीं पता है कि इन व्यक्ति ने विदेशी दौरा किया था या नहीं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
तो क्या वुहान पशु बाजार से नहीं फैला वायरस? 

सार्स-कोव-2 (Sars-Cov-2) के बारे में जो एक बात अब तक पता नहीं चल पाई है वो ये नहीं है कि ये जानवरों से इंसानों में कब आया, बल्कि ये है कि इस वायरस ने लोगों को संक्रमित करना कब शुरू किया। जानकारों का कहना है कि अब तक महामारी का केंद्र वुहान के जानवरों के बाजार को माना जा रहा है, जहां जीवित और मृत जंगली जानवरों का व्यवसाय होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शुरुआती दौर में संक्रमण के जो मामले दर्ज किए गए, उनमें से बड़ी संख्या में मामले इस बाजार से जुड़े थे। लेकिन इस बात को लेकर शोधकर्ता अनिश्चित हैं कि ये वायरस वहां से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के शरीर में फैलना शुरू हुआ। हॉन्ग कॉन्ग यूनिवर्सिटी में माइक्रोबायोलॉजिस्ट युएन क्वॉक-युंग ने बताया, 'अगर आप मुझसे पूछेंगे तो मेरी राय है कि इस बात की संभावना है कि वायरस उन बाजारों से फैलना शुरू हुआ जहां जंगली जानवरों की खरीद-बिक्री होती है।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस को लेकर चीन ने भी अपनी टाइमलाइन को थोड़ा पीछे किया है। तेजी से पैर फैला रहे किसी वायरस की शुरुआत से जुड़ी जांच के दौरान ऐसा करना कोई बड़ी बात नहीं है। चीन के वुहान में डॉक्टरों द्वारा की गई एक स्टडी के अनुसार यहां कोरोना के पहले मामले की पहचान दिसंबर की पहली तारीख को हुई थी और इसका नाता जानवरों के बाजार से नहीं था। ये स्टडी मेडिकल जर्नल लैंसेट में प्रकाशित की गई थी। कुछ जानकार कहते हैं कि महामारी फैलाने की क्षमता रखने वाला वायरस, बिना पहचान में आए महीनों तक दुनियाभर में मौजूद रहे, ऐसा संभव नहीं है। लेकिन ये संभव है कि उत्तर गोलार्ध में विशेषकर सर्दियों के दौरान ये वायरस पहचान में आया हो और पहले से मौजूद रहा हो। 
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