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Coronavirus Vaccine: 2022 तक भी दुनिया में सभी लोगों को नहीं मिल पाएगी कोरोना वैक्सीन, नए शोध ने बढ़ाई चिंता

Wed, 16 Dec 2020 02:27 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दुनियाभर में अब तक सात करोड़ 38 लाख से भी अधिक लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं जबकि इस वायरस की वजह से 16 लाख 41 हजार से अधिक लोगों की मौत भी हो चुकी है। दुनिया के कई वैज्ञानिक और विशेषज्ञ यह पहले ही कह चुके हैं कि यह महामारी इतनी जल्द खत्म होने वाली नहीं है। इसमें कई महीने या कई साल भी लग सकते हैं। चूंकि इस महामारी को खत्म करने के लिहाज से दुनिया के कई देश अपने यहां टीकाकरण शुरू तो कर चुके हैं, लेकिन एक ताजा अध्ययन में कहा गया है कि दुनिया की करीब एक चौथाई आबादी को साल 2022 तक भी संभवत: कोरोना का टीका नहीं मिल पाएगा।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
'द बीएमजे' पत्रिका में बुधवार को प्रकाशित इस अध्ययन में यह बताने के साथ-साथ सचेत भी किया गया है कि वैक्सीन को वितरित करना, उसे विकसित करने जितना ही चुनौतीपूर्ण होगा। इसी पत्रिका में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में अनुमान जताया गया हो कि दुनियाभर में 3.7 अरब वयस्क कोरोना का टीका लगवाना चाहते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
अमेरिका में 'जॉन्स हॉप्किन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ' के शोधकर्ताओं ने कहा, 'यह अध्ययन बताता है कि अधिक आय वाले देशों ने किस प्रकार कोरोना वैक्सीन की आपूर्ति भविष्य के लिए सुनिश्चित कर ली है, लेकिन बाकी दुनिया में इनकी पहुंच अनिश्चित है।' 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना वैक्सीन की आधी से अधिक खुराक (51 फीसदी) अधिक आय वाले देशों को मिलेंगी, जो दुनिया की आबादी का 14 फीसदी हैं और बाकी बची खुराक कम और मध्यम आय वाले देशों को मिलेंगी, जबकि वो दुनिया की जनसंख्या का 85 फीसदी से अधिक हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
ऐसे में शोधकर्ताओं का कहना है कि दुनिया की करीब एक चौथाई आबादी को 2022 तक कोरोना का टीका संभवत: नहीं मिल पाएगा। अगर सभी टीका निर्माता कंपनियां अधिकतम निर्माण क्षमता तक पहुंचने में सफल भी हो जाएं, तो भी 2022 तक दुनिया के कम से कम पांचवें हिस्से तक वैक्सीन नहीं पहुंच पाएगी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पीपुल्स वैक्सीन अलायंस का कहना है कि कम आमदनी वाले करीब 70 देशों में हर 10 लोगों में से महज एक व्यक्ति को ही वैक्सीन मिल पाएगी। चूंकि यह बहुत पहले से ही कहा जा रहा है कि अमीर देश वैक्सीन की जमाखोरी कर रहे हैं, ऐसे में यह तय है कि गरीब देशों यानी कम आय वाले देशों में लोगों को वैक्सीन मिलने में दिक्कत होगी। कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों के मुताबिक, अमीर देशों ने अपनी आबादी से तीन गुना ज्यादा वैक्सीन की डोज का इंतजाम किया है। इसमें अमेरिका से लेकर ब्रिटेन और कनाडा आदि देश शामिल हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हालांकि दुनिया में सभी को वैक्सीन मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए 'कोवैक्स प्लान' बनाया गया है। दरअसल, कोवैक्स विश्व स्वास्थ्य संगठन, गावी और सीईपीआई का समन्वित समूह है, जिसका मकसद है कि है कि जो देश अपनी पूरी आबादी के लिए वैक्सीन खरीदने में सक्षम नहीं हैं, उन तक भी इसे पहुंचाया जाए। विशेषज्ञों की मानें तो दुनिया की करीब 20 फीसदी आबादी पूरी तरह से कोवैक्स पर ही निर्भर है।
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