प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं का कहना है कि मुंह से निकलने वाली लार भी छींक के ड्रॉप्लेट्स को फैलाने में मदद करती है। जिनकी लार पतली होती है, उनके ड्रॉप्लेट्स भी छोटे होते हैं और ये लंबे समय तक हवा में रहते हैं। वहीं, जिनकी लार मध्यम और गाढ़ी होती है, उनके ड्रॉप्लेट्स ज्यादा समय तक हवा में नहीं रहते, वो जल्दी ही नीचे जमीन पर गिर जाते हैं। इससे संक्रमण का खतरा कम होता है।