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Coronavirus Vaccine: कोरोना के खिलाफ 94 फीसदी प्रभावी है फाइजर की वैक्सीन, शोध में दावा

Thu, 25 Feb 2021 09:37 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : iStock
दुनियाभर में लोगों को कोरोना वैक्सीन देने का काम काफी तेजी से चल रहा है। चूंकि अभी तो जितनी भी वैक्सीन लोगों को दी जा रही हैं, वो सभी दो खुराक वाली हैं, लेकिन अब फाइजर कंपनी ने कहा है कि वह 144 वैसे स्वयंसेवकों को तीसरी खुराक देने पर विचार कर रहा है, जो पिछले साल टीके के प्रारंभिक चरण के ट्रायल में भाग ले चुके हैं। फाइजर ने गुरुवार को घोषणा की कि उसने अपने कोविड-19 वैक्सीन की तीसरी खुराक का अध्ययन करना शुरू कर दिया है, जो कोरोना वायरस के अलग-अलग स्ट्रेन के खिलाफ रक्षा करने की रणनीति का हिस्सा है। हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों का ये भी कहना है कि मौजूदा वैक्सीन अभी भी दुनिया के विभिन्न हिस्सों में उभर रहे वैरिएंट से बचाती है, लेकिन फिर भी वैक्सीन निर्माता पहले से ही ऐसी वैक्सीन बनाने की तैयारी में लग गए हैं, जो वायरस के अलग-अलग स्ट्रेन पर भी कारगर हो। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
फाइजर और बायोएनटेक की कोरोना वायरस वैक्सीन 94 फीसदी प्रभावी है। बड़े पैमाने पर हुए एक अध्ययन में ये पता चला है, जिसमें इस्रायल के लगभग 12 लाख लोग शामिल थे। बुधवार को न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में अध्ययन के परिणाम प्रकाशित हुए थे। 
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कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : iStock
इस नए अध्ययन के परिणाम पिछले साल वैक्सीन के तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के परिणाम के बहुत करीब हैं, जिसमें पाया गया था कि फाइजर की दो खुराक 95 फीसदी प्रभावी हैं। अध्ययन में अनुमान लगाया गया था कि टीका पहली खुराक के दो से तीन हफ्ते बाद संक्रमण के खिलाफ 57 फीसदी और दूसरी खुराक के एक हफ्ते या उससे अधिक समय बाद 94 फीसदी प्रभावी है। इसमें छह लाख लोग शामिल थे। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
बड़े पैमाने पर किए गए इस अध्ययन से यह भी संकेत मिला है कि फाइजर का टीका ब्रिटेन में पाए गए कोरोना स्ट्रेन के खिलाफ भी काम करता है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने इसकी प्रभावकारिता के स्तर के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी है और ना ही शोध में यह दिखाया गया है कि टीका दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन के खिलाफ कैसे काम करेगा। 
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कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : iStock
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखक रैन बलीसर ने कहा कि शोधकर्ता परिणामों को देखकर हैरान थे। उन्होंने कहा, 'हम आश्चर्यचकित थे, क्योंकि हमें ये लग रहा था कि वास्तविक दुनिया में, जहां कोल्ड चेन की व्यवस्था कुछ खास अच्छी नहीं है और अधिकतर लोग वृद्ध और बीमार हैं, तो उतना अच्छा परिणाम नहीं मिलेगा जितना कि हमें क्लीनिकल ट्रायल (नैदानिक परीक्षण) में मिला था। लेकिन हमने कर दिखाया। वैक्सीन ने वास्तविक दुनिया में भी काम किया।' 

नोटः यह लेख न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें शोध के बारे में विस्तार से बताया गया है।
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