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कोरोना वायरस से निपटने को 'हर्ड इम्यूनिटी' किसी भी देश के लिए बहुत बड़ा जोखिम: सीएसआईआर 

Sun, 31 May 2020 06:26 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हर्ड इम्यूनिटी - फोटो : PTI
कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए दुनियाभर के देशों में सरकारें प्रयासरत हैं। भारत में भी हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। इस बीच 'हर्ड इम्यूनिटी' को लेकर भी चर्चा जोर पकड़ रही है। लेकिन फिलहाल कह पाना मुश्किल है किसी भी देश के लिए यह कदम उठाना कितना सुरक्षात्मक होगा। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के महानिदेशक शेखर मंडे ने एक साक्षात्कार में कहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ने के लिए 'हर्ड इम्यूनिटी' विकसित करने की रणनीति किसी भी राष्ट्र के बहुत बड़ा जोखिम होगी। स्थितियों का आकलन करते हुए समय-समय पर ध्यान देते रहने और जरूरी कदम उठाने से ही कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। 
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कोरोना का बढ़ता संक्रमण चिंता का विषय - फोटो : PTI
हर्ड इम्यूनिटी क्या है, ऐसे समझें
  • अगर किसी बीमारी के खिलाफ टीकाकरण की मदद से बड़ी आबादी इम्यून यानी प्रतिरक्षित हो जाती है, तब बाकी बचे लोग भी बीमारी से सुरक्षित हो जाते हैं।
या
  • अगर कोई बीमारी जनसंख्या के बड़े हिस्से में फैल जाती है तो बाकी बचे लोग इससे सुरक्षित हो जाते हैं, यानी जनसमूह की रोग प्रतिरोधक क्षमता उस बीमारी से लड़ने में संक्रमित लोगों की मदद करती है।
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कोरोना वायरस से हो रही मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है - फोटो : PTI
कोरोना वायरस के खिलाफ हर्ड इम्यूनिटी के लिए 60 से 70 फीसदी आबादी की इम्यूनिटी जरूरी है। कोविड 19 की वैक्सीन ही नहीं बनी है। ऐसे में हर्ड इम्यूनिटी हासिल करने का एक ही तरीका है कि कुल जनसंख्या की 60 से 70 फीसदी आबादी कोरोना संक्रमित हो जाए। यह जोखिम भरा है। 

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सीएसआईआर के डीजी शेखर मंडे - फोटो : ANI
क्या भारत में हर्ड इम्यूनिटी हासिल करना व्यवहारिक होगा? इस सवाल के जवाब में सीएसआईआर के डीजी शेखर मंडे ने पीटीआई से कहा कि यह किसी भी राष्ट्र के लिए बहुत बड़ा जोखिम है। इससे पहले संक्रमण रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे। 
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बड़ी संख्या में लोग ठीक होकर घर भी जा रहे हैं(File Photo) - फोटो : PTI
मंडे ने कहा कि दुनिया भर के अन्य देशों की तरह भारत में भी कोविड-19 की दूसरी लहर आ सकती है और इसके लिए लोगों को तैयार रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के मामले भले ही कम होते चले जाएंगे, लेकिन लोगों को तैयार रहना होगा, क्योंकि इसकी दूसरी लहर आ सकती है। 
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
दुनियाभर में कोरोना वायरस फैलाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं और इसपर मची तनातनी के बीच ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ संबंध समाप्त कर लिया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मंडे ने कहा कि यह अच्छा संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्था है, जिसने चेचक उन्मूलन, पोलियो उन्मूलन में बड़ी भूमिका निभाई है। 
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Coronavirus - फोटो : Pexels
डीजी शेखर मंडे ने कहा कि सीएसआईआर ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में पांच आयामी दृष्टिकोण अपनाया है। इसमें निगरानी, निदान और नए उपचारों के माध्यम से हस्तक्षेप, अस्पताल के सहायक उपकरण और आपूर्ति श्रृंखला मॉडल शामिल हैं। 

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कोरोना का टीका(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Amar Ujala
कोरोना का टीका विकसित किए जाने के प्रयासों पर उन्होंने कहा कि इसके लिए तीन अलग-अलग तरीकों को अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने वाला टीका है जिस पर देश में तीन अलग-अलग स्थानों पर परीक्षण चल रहा है और अगले 15 दिनों में इसका परिणाम आने की उम्मीद है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
मंडे ने कहा कि दूसरा मोनोक्लोनल एंटीबॉडी आधारित है जिसे सीएसआईआर ने एनसीसीएस (नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंस) पुणे, आईआईटी इंदौर और भारत बायोटेक के बीच एक सहयोगी कार्यक्रम के तहत वित्त सहायता उपलब्ध कराया है। तीसरा प्लाज्मा थेरेपी है, जिसका परीक्षण कोलकाता में चल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि टीके के विकास की प्रक्रिया में भारतीय कंपनियां काफी गहराई से लगी हुई हैं।
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