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Coronavirus: क्या पहले से ज्यादा खतरनाक है कोरोना का दोबारा संक्रमण? जानिए इसके बारे में सबकुछ

Sun, 18 Oct 2020 10:56 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अमेरिका में एक व्यक्ति को दो बार कोरोना का संक्रमण हुआ। डॉक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी बार हुआ संक्रमण ज्यादा खतरनाक था। 25 साल के इस शख्स को फेफड़ों में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा था, तब उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हालांकि, अब वे ठीक हो चुके हैं। दोबारा संक्रमण के मामले बहुत कम ही सामने आ रहे हैं, लेकिन लैंसेट के एक अध्ययन में यह सवाल खड़ा किया गया है कि 'आखिर वायरस के खिलाफ कितनी इम्यूनिटी तैयार हो सकती है?' मौजूदा मामले में अमेरिका के इस शख्स को कोई ऐसी ज्ञात स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं थी, जो उन्हें खासतौर पर कोरोना संक्रमित होने के जोखिम में डालती। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इस मामले में कब-क्या हुआ:
  • 25 मार्च - लक्षण दिखने का शुरुआती दौर जिसमें गले में खराश, खांसी, सिरदर्द, जी मिचलाना और डायरिया हुआ।
  • 18 अप्रैल - वो पहली बार संक्रमित पाए गए।
  • 27 अप्रैल - शुरुआती लक्षण पूरी तरह से खत्म हो गए।
  • 9 और 26 मई - कोरोना वायरस का दो बार टेस्ट निगेटिव आया।
  • 28 मई - उनमें दोबारा से लक्षण दिखने शुरू हुए, इस बार उन्हें बुखार, सिरदर्द, चक्कर, खांसी, जी मिचलाना और डायरिया हुआ। 
  • 5 जून - वो दोबारा कोरोना संक्रमित पाए गए और उनके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो गया। उन्हें सांस लेने में दिक्कत महूसस होने लगी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वैज्ञानिकों का कहना है कि 'इस मरीज को दो बार कोरोना संक्रमण हुआ।' ऐसा बिल्कुल नहीं था कि पहले वाला संक्रमण पूरी तरह खत्म न हुआ हो और फिर से वही संक्रमण हो गया हो। दोनों ही मामलों में जब वायरस के जेनेटिक कोड की तुलना की गई तो वो अलग-अलग पाए गए। यूनिवर्सिटी ऑफ नेवाडा के डॉक्टर मार्क पैंडोरी ने बताया, 'हमारे नतीजों से यह पता चलता है कि पिछला संक्रमण आपको भविष्य में होने वाले संक्रमण से अनिवार्य तौर पर कतई नहीं बचाता है। दोबारा होने वाले संक्रमण की संभावना कोविड-19 की इम्यूनिटी को लेकर हमारी समझ के लिए काफी अहम साबित हो सकती है।' उन्होंने कहा कि 'जो लोग कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक भी हो चुके हैं, उन्हें सोशल डिस्टेन्सिंग, मास्क और हाथ धोने जैसे गाइडलाइन का पालन करना चाहिए।' 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इम्यूनिटी को लेकर अभी भी उलझन

वैज्ञानिक कोरोना वायरस और उसकी इम्यूनिटी को लेकर अब भी स्पष्ट नहीं हैं। क्या हर कोई संक्रमण के बाद इम्यून हो सकता है? क्या हल्के लक्षण वाले भी इम्यून हो सकते हैं? संक्रमण के बाद कि इम्यूनिटी कब तक काम कर सकती है? ये कुछ अहम सवाल हैं - यह समझने के लिए कि वायरस लंबे समय तक हमें कैसे प्रभावित करने वाला है। साथ ही इन सवालों के जवाब का कोरोना वैक्सीन और हर्ड-इम्यूनिटी के आइडिया पर असर हो सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हालांकि, अब तक दोबारा से संक्रमण के मामले कम ही सामने आए हैं। कोरोना के कुल 3.7 करोड़ मामलों में से कुछ ही मामले दोबारा संक्रमण के हैं। हॉन्ग-कॉन्ग, बेल्जियम और नीदरलैंड से आने वाली रिपोर्ट्स बताती हैं कि पहले संक्रमण के बाद दूसरी बार हुए संक्रमण के मामले उतने गंभीर नहीं थे। दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर में एक गंभीर मामला इस तरह का जरूर आया है, लेकिन उस मामले में भी अस्पताल जाने की नौबत नहीं आई थी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हालांकि, महामारी के मामले में अभी किसी भी तरह की जल्दबाजी ठीक नहीं होगी और कोरोना वायरस से होने वाली दूसरी बीमारियों के इतिहास से पता चलता है कि एहतियात बरतना जरूरी है। जैसे ही संक्रमण का दूसरा दौर शुरू होगा तब हमें इसे लेकर स्पष्ट जवाब मिलने शुरू हो सकते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
अब तक यह माना गया था कि कोविड से दूसरी बार संक्रमित होने के वक्त हल्के लक्षण दिखाई पड़ेंगे और मरीज गंभीर रूप से बीमार नहीं पड़ेगा, लेकिन अमेरिका में दोबारा संक्रमित हुए मरीज के मामले में यह जवाब देना मुश्किल है कि वो गंभीर रूप से बीमार क्यों पड़े। एक बात यह हो सकती है कि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर बड़ी मात्रा में वायरस का संक्रमण हुआ हो। वहीं इस बात की भी संभावना है कि शुरुआती इम्यून रेस्पांस ने दूसरे संक्रमण को ज्यादा खतरनाक बना दिया हो। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डेंगू के मामले में हमने ऐसा देखा है। डेंगू के मामले में डेंगू के एक किस्म के लिए तैयार एंटीबॉडी जब दूसरे किस्म के डेंगू के ऊपर काम करती हैं तो वो समस्या पैदा करती हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंजलिया के प्रोफेसर पॉल हंटर ने बताया कि दो संक्रमणों के बीच कम अंतराल और दूसरे बार के संक्रमण का गंभीर होना 'काफी चिंताजनक' है। वे कहते हैं, 'नई चीजें जो सामने आई हैं, उसे देखते हुए निश्चित तौर पर इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के ऊपर इसके असर के बारे में कहना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन इन नतीजों से एक बात तो साफ होती है कि हमें इस संक्रमण से इम्यूनिटी को लेकर पर्याप्त जानकारी अब तक नहीं है।' 
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