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Coronavirus: इन तीन वजहों से भारत में बढ़ रहे हैं कोरोना के मामले, विशेषज्ञ से जानें सबकुछ

Sat, 28 Nov 2020 11:29 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
जैसे-जैसे कोरोना की वैक्सीन बनाने के काम में तेजी आ रही है, वैसे-वैसे भारत में कोरोना संक्रमण के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। यहां अब तक 93 लाख 51 हजार से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि एक लाख 36 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि यहां संक्रमण से ठीक होने वाले लोगों की संख्या भी लाखों में है। देश में अब तक 87 लाख से अधिक लोग ठीक हो चुके हैं, जो कि बहुत खुशी की बात है, लेकिन फिर भी संक्रमण के मामलों में तेजी तो आई है और इसकी कई वजहें हैं। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं इसके बारे में...
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोरोना जांच कराने से बचने वालों को क्या कहेंगे? 
  • दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के डॉ. नितेश गुप्ता कहते हैं, 'कोरोना जांच कराने से बचना नहीं है और न ही डरना है। इससे आगे 10 लोगों को संक्रमित होने से बचा सकते हैं। अगर किसी को लक्षण हैं और जांच में निगेटिव आता है तो उसे सामान्य सर्दी-जुकाम होगा और अगर पॉजिटिव आते हैं तो तुरंत उपचार मिल सकेगा। लेकिन ध्यान रखना है कि अगर लक्षण हैं और बढ़ते जा रहे हैं तो आरटी-पीसीआर टेस्ट से जांच कराएं।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या बर्तन को राख से साफ कर सकते हैं? 
  • डॉ. नितेश गुप्ता के मुताबिक, 'बर्तन पर कोरोना वायरस 4-6 घंटे तक रहता है। अगर बर्तन को पानी या किसी भी साबुन या राख से भी धो कर रखेंगे, तो भी इतने घंटे में वायरस खत्म हो जाएगा।' 

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोरोना के बढ़ते मामलों के पीछे क्या कारण हो सकते हैं? 
  • डॉ. नितेश गुप्ता बताते हैं, 'बढ़ते मामलों के प्रमुख कारण, बढ़ती ठंड, पॉल्यूशन (प्रदूषण) और लोगों द्वारा बरती जा रही लापरवाही है। इन तीन प्रमुख वजहों से कोरोना केस बढ़ रहे हैं। चूंकि ठंड में इंफ्लूएंजा समेत सभी वायरस ज्यादा प्रभावी हो जाते हैं, इसलिए उनके साथ कोरोना भी फैल सकता है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोरोना काल में प्रदूषण बढ़ने से किस तरह का खतरा हो सकता है? 
  • डॉ. नितेश गुप्ता के मुताबिक, 'प्रदूषण से फेफड़े की बीमारी ज्यादा होती है। खासकर जिन्हें कोरोना है या जो ठीक हो चुके हैं, उनके फेफड़े पहले से ही कमजोर हो चुके होते हैं। ऐसे मामलों में फेफड़ों में पहले ही सूजन होती है और प्रदूषण होने से सूजन बढ़ जाती है और सांस की नली पतली हो जाती है और सांस लेने में दिक्कत होती है। इसलिए फेफड़े की बीमारी वाले मरीज ज्यादा सतर्क रहें।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
आमतौर पर किसी भी वैक्सीन को बनाने में कितना समय लगता है? 
  • डॉ. नितेश गुप्ता बताते हैं, 'अगर इंफ्लूएंजा वायरस की वैक्सीन को देखें तो उसको बनाने में 10 साल लगे थे। हर साल इसे अपग्रेड करना पड़ता है, क्योंकि ये बीमारी काफी पुरानी है और इसमें हर साल स्परूप थोड़ा बदल जाता है। कोरोना वायरस अभी एक साल पुरानी बीमारी है, इसलिए इसकी वैक्सीन में जल्जबाजी नहीं करनी है। जब लोगों को मिले तो उसका फायदा हो और इसे लेने वाले लोग वायरस से सुरक्षित रहें। अगर किसी भी वैक्सीन में बदलाव करने होते हैं, तो एक साल के उसके व्यवहार को देखकर ही किया जाता है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या शरीर के अंदर की गर्मी बढ़ने से कोरोना का संक्रमण नहीं होगा? 
  • डॉ. नितेश गुप्ता बताते हैं, 'जो भी आयुर्वेद में औषधि और काढ़ा बताए गए हैं, वो शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए हैं, जो वायरस से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं। शरीर की गर्मी बढ़ाने के लिए खुद से कुछ प्रयोग न करें, आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देश के अनुसार ही चीजों का सेवन करें।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
नींद नहीं आने की वजह से कोरोना के मरीज तनाव में आ जाते हैं, वो क्या करें? 
  • डॉ. नितेश गुप्ता के मुताबिक, 'मरीज जब आइसोलेट होते हैं तो उन्हें तरह-तरह की चिंता सताती है। ठीक होंगे या नहीं, परिवार में किसी को कुछ न हो, कोई मिलने कब आएगा। आगे भविष्य की बहुत सी चिंता करने लगते हैं। इस दौरान परिवार से मिलने के लिए फोन और वीडियो कॉलिंग ही सहारा रहता है, वो भी मरीज कई बार ठीक से बात नहीं कर पाते। इन सब की वजह से नींद न आना स्वाभाविक है।' 
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