ऑक्सीजन की आपूर्ति
और आखिर में, डॉक्टरों के एक ग्रुप ने इस मशीन को बनाने के हर चरण को परखा और इन युवा इंजीनियरों से मुश्किल सवाल भी पूछे। और अंत में एक दर्जन से ज्यादा जाने माने पेशेवर लोगों, जिनमें फेफड़े के विशेषज्ञ, दिल के विशेषज्ञ डॉक्टर, वैज्ञानिक, इनोवेटर, पूंजी लगाने वाले उद्यमियों ने इन इंजीनियरों की मदद की।
डॉक्टरों का कहना है कि उनका लक्ष्य बिना ताम-झाम वाली सांस लेने में मददगार मशीन बनाने का है, जो भारतीय परिस्थितियों में कारगर साबित हो सके। वेंटिलेटर, अस्पतालों के ऑक्सीजन प्लांट से गैस आपूर्ति से चलते हैं लेकिन, भारत के बहुत से कस्बों और गांवों में पाइप से ऑक्सीजन की आपूर्ति के संसाधन नहीं हैं।
ऐसे में ये वेंटिलेटर बनाने वाले ये भी पता लगा रहे हैं कि क्या वो ऑक्सीजन सिलेंडर से चल सकने वाले वेंटिलेटर बना सकते हैं।