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Coronavirus: पीएम मोदी की 'ताली-थाली' अपील का वैज्ञानिक महत्व, आयुर्वेद में भी है चर्चा

Sat, 21 Mar 2020 06:16 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पीएम मोदी ने देशवासियों से जनता कर्फ्यू की अपील की है
देश में लगातार कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। सरकार हर स्तर पर मजबूती के साथ इस पर नियंत्रण का प्रयास कर रही है। सरकार तो जरूरी कदम उठा ही रही है, देश के लोगों से भी शुरुआत से ही सावधानियां बरतने की अपील कर रही है। इसके साथ ही सरकार ने कोरोना वायरस से लड़ाई में जनता से सहयोग की अपील की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरूवार को देशवासियों को संबोधन के दौरान लोगों से कोरोना के बचाव और जागरूकता फैलाने में सहयोग मांगा। उन्होंने रविवार को जनता कर्फ्यू (Janata Curfew) का पालन करने का अनुरोध किया। जनता कर्फ्यू के दौरान 22 मार्च को सुबह 7 बजे से लेकर रात 9 बजे तक लोगों को घर से बाहर न निकलने की अपील की गई है।
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नरेंद्र मोदी का संबोधन(File Photo) - फोटो : PTI
जनता कर्फ्यू के दौरान पीएम मोदी ने सभी देशवासियों से एक खास आग्रह भी किया है। आग्रह यह कि लोग रविवार को शाम पांच बजे अपने खिड़की-दरवाजों पर खड़े होकर कोरोना संक्रमण के माहौल में भी देश के लिए काम कर रहे डॉक्टरों, पुलिस वालों, मीडिया कर्मियों, सफाई कर्मियों, होम डिलीवरी करने वालों और अन्य जरूरी सेवाएं देने वालों का पांच मिनट तक आभार व्यक्त करें। कोरोना से बुरी तरह प्रभावित इटली में भी लोगों ने ऐसा किया और ताली बजाकर आभार व्यक्त कर चुके हैं। अपने देश में लोग आभार व्यक्त करने के लिए ताली बजाने या थाली बजाने या फिर घंटी-शंख आदि बजा सकते हैं। 
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जनता कर्फ्यू: समर्थन में पोस्टर - फोटो : Amar Ujala
कोरोना वायरस से लड़ाई में इस तरह एकजुटता दिखाने की पीएम मोदी के आग्रह की और उनकी इस ताली-थाली अपील की सोशल मीडिया पर आलोचना भी की गई, वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने इस पहल की जमकर तारीफ की। कुछ लोग इस पहल पर नौटंकी का आरोप लगा रहे हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञों की नजर में इस पहल के वैज्ञानिक कारण भी हैं, जिनका जिक्र आयुर्वेद में भी मिलता है। आइए, इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 

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ताली बजाने से पैदा होती है ध्वनि ऊर्जा
योग में ताली बजाने के बहुत सारे फायदे बताए गए हैं। ताली बजाने से हमारे हाथों में एक्यूप्रेशर पॉइंट्स पर अच्छा दबाव पड़ता है। इससे हमारे हृदय और फेफड़ों की समस्याओं में फायदा पहुंचता है। फिजियोथेरेपिस्ट आनंद कुमार बताते हैं कि हमारे शरीर के 30 से ज्यादा एक्यूप्रेशर पॉइंटस हमारी हथेलियों में होते हैं। प्रेशर पॉइंट पर दबाव बनने से उससे जुड़े अंगों तक ब्लड और ऑक्सीजन का सर्कुलेशन अच्छे से होने लगता है। ताली बजाना इन सभी प्रेशर पॉइंट्स को दबाने का आसान तरीका है। 
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शंख
भारतीय सनातन धर्म और ज्योतिषशास्त्र के जानकार पंडित दयानंद पांडेय पूजा के दौरान शंख बजाए जाने की चर्चा करते हुए बताते हैं कि वातावरण में ध्वनि पैदा करने से व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक शक्ति में स्फूर्ति आती है और आसपास का वातावरण भी अच्छा हो जाता है। शंख बजा कर, थाली बजाकर या घंटी बजा कर सकारात्मक ऊर्जा वाली ध्वनि उत्पन्न की जा सकती है। वहीं आयुर्वेद में घंटियों की ध्वनि का संबंध मानव मस्तिष्क से बताया गया है। घंटियां इस तरह से बनाई जाती हैं कि बजाने पर इसकी ध्वनि मनुष्य के दिमाग के दाएं और बाएं हिस्से में एकाग्रता पैदा करती हैं और मानव शरीर के उपचार केंद्रों को सक्रिय कर देती है।
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घंटी - फोटो : Social media
कहा यह भी जाता है कि घंटियां बजाने से वातावरण में उत्पन्न कंपन काफी दूर तक जाता है। इस कंपन से इसके क्षेत्र में आने वाले जीवाणु, विषाणु वगैरह नष्ट होते हैं और वातावरण में जो अशुद्धियां होती है, वह भी खत्म हो जाती है। घंटी की ही तरह शंख, थाली-चम्मच आदि की ध्वनि भी निश्चित आवृत्ति में तेज कंपन पैदा करती हैं। 
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घंटी - फोटो : Social media
अब बात करें विज्ञान की तो विज्ञान में ध्वनि को लेकर काफी शोध हो चुके हैं और अब भी हो रहे हैं। भौतिकी के प्रोफेसर सरयुग साह ने बताया कि ध्वनि पैदा करने से खगोलीय ऊर्जा का उत्सर्जन होता है। यह अशुद्धियों को खत्म कर मानव में ऊर्जा का संचार करता है। शंख बजाने से आतंरिक और बाहरी दोनों वातावरण प्रभावित होते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि शंख की आवाज से वातावरण में मौजूद कई तरह के कीटाणुओं का नाश होता है। कई सारी स्टडी में यह बात सामने आई है।
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