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CoronaVirus Effect: दिमाग की नसों तक पहुंचा कोरोना, आंखों पर डाल रहा बुरा असर, धुंधली हो रही नजर

Wed, 21 Oct 2020 02:59 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
देश और दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। वायरस का असर शरीर के कई हिस्सों में पड़ता है। श्वास नली से लेकर फेफड़े तक कोरोना के असर के हजारों मामलों के बारे में आपने सुना होगा। लेकिन कोरोना वायरस के मस्तिष्क तक पहुंचने के भी मामले सामने आ रहे हैं। दिमाग की नसों तक पहुंच कर यह इंसान की आंखों पर भी असर डाल रहा है। इस कारण मरीज की नजर धुंधली हो जा रही है यानी इससे मरीज को देखने में दिक्कत तक आ रही है। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में ऐसा ही एक मामला सामने आया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एम्स के चाइल्ड न्यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टर अब बच्ची के स्वास्थ्य पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। जिसे जल्द ही प्रकाशित किया जाएगा। पीड़ित के मस्तिष्क के नसों को कोरोना वायरस के कारण नुकसान हुआ है। बच्ची को अब आंखों से धुंधला नजर आ रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि यह मस्तिष्क में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण एक्यूट डिमालिनेटिंग सिंड्रोम सिंड्रोम (एडीएस) होने का मामला है। बच्चों के उम्र समूह में यह ऐसा पहला मामला है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
चिकित्सकों के मुताबिक, मस्तिष्क की जिस नस को नुकसान पहुंचा है, वह माइलिन नामक बचाव परत से घिरी होती है। यह संदेश को मस्तिष्क से शरीर के दूसरे हिस्सों में आसानी से पहुंचाने में मदद करती है। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण एडीएस होने से माइलिन नष्ट हो रही है और ब्रेन सिग्नल को नुकसान पहुंच रहा है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इसके कारण न्यूरोलॉजिकल या तंत्रिका तंत्र की प्रक्रिया का प्रभावित करके दृष्टि, मांसपेशियों, ब्लेडर आदि को नुकसान पहुंचा सकता है। एम्स में डिपार्टमेंट ऑफ पेडियाट्रिक्स के चाइल्ड न्यूरो डिविजन की प्रमुख डॉ. शेफाली गुलाटी का कहना है 11 साल की यह बच्ची हमारे पास कमजोर नजर की शिकायत लेकर आई थी। उसकी एमआरआई जांच में पता चला कि उसे एडीएस है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
डॉ. शेफाली का कहना है कि कोरोना वायरस बच्चों में किस तरह का प्रभाव डाल रहा है, इस पर आज भी बहुत कुछ पता करना बाकी है। कोरेना संक्रमण से बच्चों को बचा कर रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस दुर्लभ मामले को लेकर एम्स के डॉक्टर एक अध्ययन रिपोर्ट भी तैयार कर रहे हैं जिसे आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया जा सकता है।
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