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Coronavirus Treatment: रेमडेसिविर, डेक्सामेथासोन और दूसरी कारगर दवाइयों से ऐसे ठीक हो रहे हैें मरीज 

Sat, 25 Jul 2020 10:39 AM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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कोरोना वायरस की दवा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
कोविड-19 संक्रमण की चपेट में आने वाले लोगों की संख्या एक करोड़ 55 लाख से ज्यादा हो चुकी है जबकि अब तक इसके संक्रमण के चलते छह लाख 34 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इस संक्रमण के संभावित इलाज तलाशने की दिशा में कई कोशिशें हो रही हैं। इन कोशिशों के जरिए कोविड-19 के इलाज की कुछ कारगर कोशिशें भी सामने आई हैं।

भारत में बाबा रामादेव की पंतजलि समूह ने भी कोरोना का इलाज करने वाली दवा बनाने का दावा किया, इसको लेकर काफी विवाद भी हुआ। भारत के आयुष मंत्रालय को इस दावे का खंडन करना पड़ा जिसके बाद पंतजलि ने कहा कि उनकी कोरोनिल दवा इम्यूनिटी बूस्टर है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इलाज ढूंढ़ने में क्या क्या हुआ है?
वैसे अबतक दुनिया भर में 150 से ज्यादा अलग-अलग दवाइयों को लेकर रिसर्च हो चुकी है। इनमें से ज्यादातर दवाइयां पहले से ही प्रचलन में हैं और इन्हें कोविड-19 संक्रमित मरीजों के इलाज में आजमाकर देखा गया है। ब्रिटेन दुनिया का सबसे बड़ा क्लिनिकल ट्रायल चला रहा है, जिसे रिकवरी ट्रायल कहा जा रहा है। इसमें 12 हजार से ज्यादा मरीजों को अब तक शामिल किया जा चुका है। इस ट्रायल में ही पहली बार पता चला कि डेक्सामेथासोन कोरोना संक्रमितों की जान बचा सकती है। इसके अलावा भी कौन सी दवा कारगर है या कौन सी दवा कारगर नहीं है, इसका पता भी इस ट्रायल में चला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी सबसे कारगर इलाज के आकलन के लिए एक सॉलिडैरिटी ट्रायल चला रहा है। इसके अलावा दुनिया भर की कई फर्मास्युटिकल्स कंपनियां भी अपनी अपनी दवाईयों का ट्रायल कर रही हैं।
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दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : social media
किस तरह की दवा काम कर सकती है?
एंटीबॉडी ड्रग्स जो सीधे कोरोना वायरस के शरीर के अंदर रहने की क्षमता को प्रभावित करता है। ऐसी दवाएं जो प्रतिरोधक प्रणाली को शिथिल करती है। मरीज उस वक़्त गंभीर रूप से बीमार पड़ जाता है जब उसकी प्रतिरोधक प्रणाली ज्यादा काम करती है इससे शरीर को दोतरफा नुकसान पहुंचता है। ठीक हुए मरीजों के खून से एंटीबॉडी तैयार करना या फिर लैब में तैयार एंटीबॉडी का इस्तेमाल करना जो वायरस पर हमला कर सकता है।

यह भी संभव है कि कोरोना के अलग अलग स्टेज में अलग अलग दवाइयां कारगर साबित हों। जैसे कि एंटी वायरल ड्रग्स बीमारी की शुरुआत में कारगर देखे गए हैं जबकि इम्यून ड्रग्स का फायदा बाद के स्टेज दिखा है। विभिन्न थेरेपी का संयोजन भी कारगर हो सकता है, इसका आकलन भी किया जा रहा है।

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Coronavirus Drug: डेक्सामेथासोन - फोटो : अमर उजाला
जान बचाने वाली अब तक की इकलौती दवा
सस्ती और हर जगह मिलने वाली दवा डेक्सामेथासोन कोरोना वायरस से संक्रमित गंभीर रूप से बीमार मरीजों की जान बचाने में मदद कर सकती है। कोविड-19 संक्रमितों को बचाने में मदद करने वाली पहली दवा साबित हुई है डेक्सोमेथासोन। ब्रिटेन के रिकवरी ट्रायल के विशेषज्ञों का कहना है कि कम मात्रा में इस दवा का उपयोग कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी कामयाबी की तरह सामने आया है। जिन मरीजों को गंभीर रूप से बीमार पड़ने की वजह से वेंटिलेटर का सहारा लेना पड़ रहा है, उनके मरने का जोखिम करीब एक तिहाई इस दवा की वजह से कम हो जाता है। जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है, उनमें पांचवें हिस्से के बराबर मरने का जोखिम कम हो जाता है।
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Coronavirus Drug: डेक्सामेथासोन - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
इस दवा का इस्तेमाल पहले से ही सूजन को कम करने में किया जाता रहा है और अब ऐसा लगता है कि यह कोरोना वायरस से लड़ने में शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली को मदद पहुंचाने वाली है। जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अधिक सक्रियता के साथ प्रतिक्रिया करती है तब वैसे हालात को साइटोकिन स्टॉर्म कहा जाता है यह जानलेवा हो सकता है। इसलिए अब तक इसका इस्तेमाल अधिक जोखिम स्थिति वाले मरीजों के लिए ही किया जा रहा है। माइल्ड लक्षण वाले संक्रमितों पर इसका असर नहीं दिखा है।
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रेमडेसिविर - फोटो : Hetero website
दूसरी कारगर दवाइयां
इसके अलावा इबोला के इलाज के लिए खोजी गई दवा रेमडेसिविर के क्लीनिकल ट्रायल के नतीजे उत्साहवर्धक रहे हैं। अमरीकी नेतृत्व में इस दवा का क्लिनिकल ट्रायल दुनिया भर में एक हजार लोगों के बीच किया जा रहा है। इस ट्रायल के दौरान इस दवा के चलते कोरना के लक्षण 15 दिन के बदले 11 दिन तक देखे गए। 

रेमडेसिविर उन चार दवाओं में शामिल है जिनको लेकर सॉलडरिटी ट्रायल चल रहा है। इस दवा को बनाने वाली कंपनी गिलिएड इसके ट्रायल का आयोजन भी करा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉक्टर ब्रुस आइलवर्ड का कहना है कि चीन के दौरे बाद उन्होंने पाया कि रेमडेसिविर एकमात्र ऐसी दवा है जो असरदायी नजर आती है।
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रेमडेसिविर - फोटो : social media
इबोला की दवा के तौर पर इसकी खोज की गई थी लेकिन यह जानवरों पर किए गए अध्ययन में दूसरे कई जानलेवा वायरस वाले बीमारियों में कारगर साबित हुआ है। मसलन मर्स और दूसरे सांस संबंधी बीमारियों में। शिकागो यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में हो रहे परीक्षणों के लीक सूचनाओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि यह असरदाई है। लेकिन अब तक इस बात के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं जिससे यह जाहिर होता हो कि यह कोरोना वायरस से होने वाली मौत से बचाता है।

अब तक यह माना जा रहा है कि एंटी वायरल दवाएं कोरोना संक्रमण के शुरुआती दौर में कारगर हैं जबकि इम्यून बढ़ाने वाली दवाएं संक्रमण के दूसरे दौर में। ब्रिटिश सरकार ने अपने नेशनल हेल्थ सिस्टम में इन दोनों दवाओं की खेप को रखने का निर्देश जारी किया हुआ है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
वहीं अमेरिका ने रेमडेसिविर की आने वाली पूरी सप्लाई को खरीद लिया है। अमेरिकी सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने गिलिएड कंपनी के जुलाई महीने की आपूर्ति का सौ प्रतिशत, अगस्त और सितंबर महीने में 90-90 प्रतिशत आपूर्ति को खरीद लिया है, इसके जरिए अमरीका ने पांच करोड़ डोज की आपूर्ति सुनिश्चित कर लिया है। गिलिएड ने इस दवा की अज्ञात मात्रा साउथ कोरिया को दान में उपलब्ध कराया है।

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Coronavirus - फोटो : Amar Ujala
क्या एचआईवी की दवाएं कोरोना में काम कर रही हैं?
इसे लेकर बहुत बातें की जा रही हैं लेकिन इसका जवाब नहीं है। इस बात के प्रमाण नहीं मिले हैं जिससे यह कहा जाए कि एचआईवी की दवा लोपीनावीर और रिटोनावीर कोरोना वायरस के इलाज में असरदायी साबित हुए हैं। लैब में किए परीक्षण में जरूर इस बात के प्रमाण मिले हैं कि यह काम कर सकता है लेकिन लोगों के ऊपर किए गए अध्ययन में निराशा हाथ लगी है। कोविड-19 के गंभीर मरीजों में इन दवाओं की वजह से कोई सुधार होता नजर नहीं आया है। हालांकि ये दवाएं बहुत गंभीर मरीजों (इनमें एक चौथाई की मौत हो गई थी) पर इस्तेमाल की गई थीं। इससे इस बात की संभावना भी बनती है कि इसे देर से देने की वजह से यह संक्रमण पर काम नहीं कर सका।

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Hydroxychloroquine Tablet - फोटो : Social Media
क्या मलेरिया की दवा असरदार है?
इसको लेकर भी काफी चर्चा रही है, लेकिन इसका जवाब भी नहीं है। मलेरिया की दवा सॉलिडैरिटी ट्रायल और रिकवरी ट्रायल दोनों ही प्रयासों का हिस्सा है। क्लोरोक्वीन और उससे बने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन में वायरस प्रतिरोधी और इंसानों की प्रतिरोधक प्रणाली को शिथिल करने के गुण मौजूद है। यह दवा उस वक़्त बड़े पैमाने पर चर्चा में आई जब राष्ट्रपति ट्रंप ने कोरोना वायरस के इलाज में इसकी संभावनाओं की बात कही लेकिन अब तक इसके असरदार होने को लेकर बहुत कम प्रमाण मिले हैं।

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल अर्थराइटिस में भी किया जाता है क्योंकि यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता को नियमित करने में मदद कर सकता है। लेकिन आक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के रिकवरी ट्रायल से यह मालूम हुआ है कि हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्विन कोविड-19 के इलाज में कोई मदद नहीं पहुंचाता है। इसके बाद इसे ट्रायल से बाहर कर दिया गया।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्या ठीक हुए मरीजों के खून से कोरोना वायरस ठीक हो सकता है?
जो मरीज कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक हो गए हैं उनके शरीर में इसका एंटीबॉडी होना चाहिए जो वायरस के खिलाफ असरदायी हो सकता है। इस इलाज के तहत ठीक हुए मरीज के खून से प्लाज्मा (जिस हिस्से में एंटीबॉडी है) निकाल कर बीमार पड़े मरीज में डालते हैं।

अमेरिका ने 500 लोगों को इस तरीके से अब ठीक किया है। इसे कॉनवैलेसेंट प्लाज्मा कहते हैं। दूसरे देश भी इस तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह तरीका दूसरी बीमारियों में तो कारगर साबित हुआ है, लेकिन कोरोना वायरस में इस तरीके से कामायबी नहीं मिली है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कब तक हमारे पास इलाज होगा?
यह जानना अभी थोड़ी जल्दबाजी होगी कि दुनिया के पास कब तक कोरोना की दवा होगी। हालांकि अगले कुछ महीनों में हमारे पास ट्रायल के परिणाम आने शुरू हो जाएंगे। इसके टीके (जिससे संक्रमण से बचा जाए ना कि होने के बाद जिससे इलाज हो) की बात करना अभी और जल्दबाजी होगी क्योंकि डॉक्टर अभी पहले से मौजूद दवाओं का ही परीक्षण कर रहे हैं कि उनका इस्तेमाल कितना सुरक्षित और असरदाई है। टीका बनाने का काम तो शून्य से शुरू करना है। कुछ बिल्कुल नई दवाइयों का भी लैब में परीक्षण किया जा रहा है लेकिन अभी वो इंसानों पर इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं हैं।
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कोरोना का इलाज - फोटो : PTI
हमें इलाज की जरूरत क्यों है, अभी डॉक्टर कैसे कर रहे हैं इलाज?
  • इलाज से हम लोगों की जान बचा सकते हैं। इलाज मिलने के बाद लॉकडाउन के प्रावधानों को आसानी से हटाना संभव होगा। कारगर इलाज से कोरोना वायरस एक मामूली दवाई बनकर रह जाएगी। इलाज मिलने से कम लोगों को इंटेसिव केयर यूनिट और वेंटिलेटर की जरूरत होगी। इलाज मिलने से ये समझना मुश्किल नहीं है कि लोगों की मुश्किलें बहुत कम हो जाएंगी।
  • अगर आप कोरोना वायरस से संक्रमित है तो ज्यादातर मामलों में यह कम गंभीर हालत वाली बात नहीं है। ये बेड रेस्ट, पैरासिटामोल और खूब अधिक मात्रा में तरल पदार्थ लेकर ठीक हो जाता है। लेकिन कुछ लोगों को आईसीयू यानी इंटेंसिव केयर यूनिट में रखने और ऑक्सीजन देने के लिए वेंटिलेशन की जरूरत पड़ती है।
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