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कोरोना से लड़ने को वैज्ञानिकों ने बनाया इन्हेलर, फेफड़ों पर वायरस का असर कम करेगा, मिलेगी राहत

Wed, 27 May 2020 10:28 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इन्हेलर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच एक तरफ इसकी वैक्सीन तैयार करने में विभिन्न देशों के वैज्ञानिक लगे हुए हैं तो दूसरी तरफ इसकी दवा बनाने की तैयारी चल रही है। अबतक पहले से उपलब्ध दवाओं से कोरोना के लक्षणों का इलाज किया जा रहा है, जिससे लोग ठीक हो रहे हैं। इस बीच ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक ऐसा इन्हेलर तैयार किया है, जो कोरोना संक्रमित मरीजों को वायरस से लड़ने में मदद करेगा। बताया जा रहा है कि इस इन्हेलर में खास तरह का प्रोटीन है, जो वायरस से लड़ता है और कोरोना के मरीजों को राहत पहुंचाता है। 
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इन्हेलर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
फेफड़ों पर दुष्प्रभाव रोकेगा इन्हेलर
  • ब्रिटेन की साउथैम्प्टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस इन्हेलर को तैयार किया है। उनका कहना है कि इस इन्हेलर में ऐसे ड्रग का इस्तेमाल किया गया है, जो कोरोना  संक्रमण के बाद फेफड़ों पर वायरस के दुष्प्रभाव को कम करता है। इस ड्रग का कोड SNG001 बताया गया है। 
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Research
इंटरफेरान बीटा प्रोटीन
  • शोधकर्ताओं का कहना है कि इस इन्हेलर में मौजूद ड्रग में एक खास तरह की प्रोटीन है। इस प्रोटीन को इंटरफेरान बीटा कहा जाता है। शरीर में जब वायरस पहुंचता है, तब यह प्राकृतिक रूप से शरीर में ही तैयार होता है। कोरोना मरीजों के शरीर में इसे पहुंचाकर वायरस से लड़ने में उनकी मदद की जा सकेगी।

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Research
120 मरीजों पर होगा ट्रायल
  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना वायरस के 120 मरीजों पर इसका ट्रायल शुरू किया गया है। मल्टीपल स्केलेरोसिस में इस तरह के इलाज का प्रयोग किया जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि रिसर्च के दौरान जब हांगकांग में अन्य दवाओं के साथ इस ड्रग का प्रयोग कोरोना मरीजों पर किया गया तो उनमें कोरोना के लक्षणों में कमी आई।
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इन्हेलर
जुलाई में सामने आएंगे परिणाम
  • मरीजों पर इस इन्हेलर का ट्रायल पूरा होने पर जो परिणाम आएंगे, उन्हें जुलाई में जारी किया जाएगा। शोधकर्ता निक फ्रेंसिस के मुताबिक, कोरोना मरीजों को फिलहाल बेहतर इलाज की जरूरत है, जो इस बीमारी की अवधि को कम करे, लक्षणों को गंभीर होने से रोके और कम समय में मरीजों की रिकवरी हो सके।
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इन्हेलर
एक दिन में एक डोज
  • इस ट्रायल में ज्यादातर 50 से अधिक उम्र के बुजुर्गों को शामिल किया गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, ट्रायल के दौरान कोरोना संक्रमित मरीजों को लक्षण दिखने के तीन दिन के अंदर इन्हेलर दिया जाएगा। एक दिन में इसकी एक डोल दी जाएगी और उनके शरीर में ऑक्सीजन के स्तर और उनके शरीर के तापमान पर नजर रखी जाएगी।  14 दिन तक इसके असर को डॉक्टर देखेंगे। 
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इन्हेलर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
ट्रायल सफल रहा तो होगी बड़ी कामयाबी
  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब मरीज इन्हेलर से इस ड्रग को खींचते हैं तो यह फेफड़ों तक पहुंचती है और वायरस के दुष्प्रभाव को कम करती है। बताया जा रहा है कि यह मरीजों की हालत गंभीर होने से रोकेगी। अगर इसका ट्रायल सफल होता है तो साल के अंत तक इसके लाखों डोज तैयार किए जाएंगे। 
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