वहमों की बीमारियों पर सुजैन ओ सुलिवन ने एक किताब लिखी है। इसका नाम है, ''इट्स ऑल इन योर हेड।'' यूं तो डॉक्टर सुलिवन ने अपने करियर की शुरुआत में ही ऐसे मरीज देखे थे। मगर इसके बारे में उनकी समझ तब बढ़ी, जब उन्होंने मिर्गी की बीमारी पर स्पेशलाइजेशन शुरू किया। सुजैन के पास ऐसे मरीज आते थे जिन्हें मिर्गी के बेहिसाब दौरे पड़ते थे। वो जमीन पर गिरकर ऐंठने लगते थे। वो जमीन पर पैर पटकते, मजबूर से दिखते। मगर जब उनके दिमाग की पड़ताल होती तो उनके अंदर मिर्गी के दौरे का एक भी लक्षण नहीं दिखता था।
सुजैन ने कहा कि असल में जो बीमारी मरीज बता रहे थे, वो थी ही नहीं। वह तो वहम था उनका। मगर मेडिकल साइंस में इसकी लगातार अनदेखी होती रही है। इसीलिए सुजैन ने इसकी गहराई में जाकर पड़ताल करने का फैसला किया। जैसे ही किसी इंसान को कहा जाएगा कि उसे दरअसल वह बीमारी है ही नहीं, जिसका वह दावा कर रहा है तो वह फ़ौरन भड़क जाएगा। कहेगा कि आपको ये नाटक लगता है? क्या मैं जानकर ख़ुद को तकलीफ दे रहा हूँ? सुजैन बताती हैं कि अक्सर लोगों में हंसने, रोने, या गुस्से से कांपते वक्त कुछ बीमारियों के लक्षण दिखाई देते हैं। मसलन, कई बार ज्यादा इमोशनल होने पर हमारे अंदर ताकत न होने का अहसास होता है। कोई बुरी खबर सुनकर सिर चकराने लगता है। बिस्तर से उठना मुहाल हो जाता है।