Common Health Problems in Youths: आजकल के समय में युवा अपने जीवन में इस कदर व्यस्त हो गए हैं कि उन्हें अपनी सेहत के बारे में भी याद नहीं रहता। ऐसे में कुछ बीमारियां उन्हें घेर लेती हैं। यहां हम आपसे इसी बारे में बात करेंगे।
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युवाओं में बढ़ रहा इन बीमारियों का खतरा, खराब लाइफस्टाइल बन रही बड़ी वजह
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Common Health Problems in Youths: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में युवा करियर, पढ़ाई और काम के बीच अपनी सेहत को नजरअंदाज कर रहे हैं। देर रात तक जागना, घंटों मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल, जंक फूड का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और लगातार बढ़ता तनाव अब सामान्य जीवनशैली का हिस्सा बनते जा रहे हैं। इसका असर युवाओं की सेहत पर भी दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, खराब लाइफस्टाइल के कारण कम उम्र में ही कई समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इतना ही नहीं, नींद की कमी और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत भी कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है। ऐसे में युवाओं के लिए यह समझना जरूरी है कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें उनके भविष्य के स्वास्थ्य पर कितना बड़ा असर डाल सकती हैं। आइए जानते हैं किन बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है और बचाव कैसे संभव है।
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युवाओं में बढ़ रहा इन बीमारियों का खतरा
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1. मोटापा
युवाओं में मोटापा तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है। लंबे समय तक बैठकर काम या पढ़ाई करना, नियमित एक्सरसाइज न करना, फास्ट फूड और ज्यादा कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन वजन बढ़ने की वजह बन सकता है। लगातार बढ़ता वजन शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। मोटापे को केवल शरीर की बनावट से जोड़कर नहीं देखना चाहिए, क्योंकि यह कई अन्य बीमारियों का जोखिम कारक हो सकता है।
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2. टाइप-2 डायबिटीज
टाइप-2 डायबिटीज को पहले अधिक उम्र के लोगों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब कम उम्र में भी इसका निदान हो रहा है। अधिक वजन, शारीरिक निष्क्रियता, असंतुलित खान-पान और परिवार में डायबिटीज का इतिहास इसके जोखिम को बढ़ा सकता है। शुरुआती दौर में इसके लक्षण हमेशा स्पष्ट नहीं होते। ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, थकान, धुंधला दिखाई देना या बिना वजह वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, इन लक्षणों के अन्य कारण भी हो सकते हैं।
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3. हाई ब्लड प्रेशर
हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकता है। युवाओं में बढ़ता वजन, ज्यादा नमक का सेवन, कम शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान, शराब और लंबे समय का तनाव इसके जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं। अगर ब्लड प्रेशर लंबे समय तक नियंत्रित न रहे तो यह हृदय, किडनी और मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकता है।
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4. फैटी लिवर
फैटी लिवर में लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो जाता है। आजकल इसे मोटापा, मेटाबॉलिक समस्याओं, इंसुलिन रेजिस्टेंस और अस्वस्थ खान-पान से भी जोड़ा जाता है। कई लोगों में शुरुआत में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, इसलिए यह समस्या जांच के दौरान सामने आ सकती है। कुछ लोगों में थकान या पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में असहजता महसूस हो सकती है, लेकिन केवल लक्षणों के आधार पर फैटी लिवर की पुष्टि नहीं की जा सकती।
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5. मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं
आज के युवाओं में पढ़ाई, नौकरी, करियर, आर्थिक दबाव और व्यक्तिगत जीवन से जुड़ा तनाव मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल, लगातार स्क्रीन पर रहना और पर्याप्त नींद न लेना भी समस्या को बढ़ा सकता है। लगातार उदासी, चिड़चिड़ापन, किसी काम में रुचि न रहना, अत्यधिक चिंता, ध्यान लगाने में परेशानी या सामाजिक गतिविधियों से दूरी जैसे बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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6. हृदय स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं
युवाओं में हृदय रोग का जोखिम कई कारणों से प्रभावित हो सकता है। मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, शारीरिक निष्क्रियता और अस्वस्थ खान-पान प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। सीने में दर्द या दबाव, सांस फूलना, अचानक कमजोरी, चक्कर या असामान्य पसीना जैसे गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण अचानक या गंभीर रूप से हों तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
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युवाओं को किन आदतों पर ध्यान देना चाहिए?
रोजाना पर्याप्त शारीरिक गतिविधि करें।
फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त संतुलित आहार को प्राथमिकता दें।
बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड और हाई-कैलोरी फूड से बचें।
पर्याप्त और नियमित नींद लें।
लंबे समय तक लगातार बैठने के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लें।
तनाव को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें।
परिवार में डायबिटीज, हाई BP या हृदय रोग का इतिहास हो तो नियमित स्वास्थ्य जांच के बारे में डॉक्टर से सलाह लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।