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What is Chronic Stress: क्रोनिक स्ट्रेस बढ़ा सकता है दिल की बीमारी और डिप्रेशन का खतरा! जानें इसके लक्षण

Fri, 05 Jun 2026 07:59 PM IST
Shruti Gaur हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

What is Chronic Stress: शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसकी जिंदगी में इस वक्त कोई दिक्कत न हो। ऐसे में क्रोनिक स्ट्रेस का शिकार होना बेहद आम बात है। पर, ये ज्यादातर लोगों को समझ ही नहीं आता कि आखिर उसके साथ दिक्कत क्या है? यहां इस लेख में हम आपसे इसी बारे में बात करेंगे। 
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क्रोनिक स्ट्रेस क्या है? - फोटो : AI
What is Chronic Stress: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव यानी स्ट्रेस लगभग हर व्यक्ति के जीवन का हिस्सा बन चुका है। लगातार तनाव लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। आमतौर पर कुछ समय के लिए होने वाला तनाव सामान्य माना जाता है, लेकिन जब यह लंबे समय तक बना रहे और व्यक्ति की दिनचर्या, सोच और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डालने लगे, तो इसे क्रोनिक स्ट्रेस कहा जाता है। 

समस्या यह है कि ज्यादातर लोग इसके लक्षणों को पहचान ही नहीं पाते और इसे सामान्य थकान या मूड स्विंग समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। धीरे-धीरे यह स्थिति कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। ऐसे में क्रोनिक स्ट्रेस को समय रहते पहचानना और उसका सही समाधान करना बेहद जरूरी हो जाता है।

 
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क्रोनिक स्ट्रेस क्या है? - फोटो : AI
क्या है क्रोनिक स्ट्रेस?

क्रोनिक स्ट्रेस वह स्थिति है, जब तनाव लंबे समय तक बना रहता है और व्यक्ति का शरीर लगातार "अलर्ट मोड" में रहता है। यह मानसिक और शारीरिक दोनों स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति खुद को बंधा महसूस करता है।

 
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क्रोनिक स्ट्रेस क्या है? - फोटो : AI
क्रोनिक स्ट्रेस के प्रमुख कारण
 
  • बढ़ते खर्च और वित्तीय दबाव लंबे समय तक तनाव का कारण बन सकते हैं।
  • टारगेट, वर्कलोड और नौकरी की असुरक्षा तनाव बढ़ा सकती है।
  • पारिवारिक या व्यक्तिगत संबंधों में चल रही समस्याएं मानसिक दबाव पैदा करती हैं।
  • लंबे समय तक बीमारी या किसी प्रियजन की खराब सेहत भी तनाव बढ़ा सकती है।

 

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क्रोनिक स्ट्रेस क्या है? - फोटो : AI
क्रोनिक स्ट्रेस के लक्षण
 
  • हर समय चिंता या बेचैनी महसूस होना
  • नींद न आना या बार-बार नींद टूटना
  •  सिरदर्द और थकान
  •  चिड़चिड़ापन और गुस्सा
  •  ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
  • भूख कम या ज्यादा लगना
  •  हाई ब्लड प्रेशर
  •  दिल की धड़कन तेज होना

 
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क्रोनिक स्ट्रेस क्या है? - फोटो : AI
शरीर पर क्या पड़ता है असर?
 
  •  कमजोर इम्यूनिटी
  • हृदय रोगों का बढ़ता खतरा
  •  डिप्रेशन और एंग्जायटी
  •  पाचन संबंधी समस्याएं
  •  याददाश्त और एकाग्रता में कमी

 
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क्रोनिक स्ट्रेस क्या है? - फोटो : AI
क्रोनिक स्ट्रेस से बचाव के उपाय

1. नियमित व्यायाम करें
 
  • क्रोनिक स्ट्रेस को कम करने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि बेहद प्रभावी मानी जाती है। 
  • व्यायाम करने से शरीर में एंडोर्फिन नामक हार्मोन का स्राव बढ़ता है, जो मूड को बेहतर बनाने और तनाव को कम करने में मदद करता है। 
  • रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलना, जॉगिंग, साइकिलिंग या किसी खेल में हिस्सा लेना मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

2. पर्याप्त नींद लें
 
  • नींद की कमी तनाव को और बढ़ा सकती है। 
  • जब शरीर और दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो व्यक्ति अधिक चिड़चिड़ा, थका हुआ और चिंतित महसूस कर सकता है। 
  • वयस्कों को हर रात 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेनी चाहिए। सोने और जागने का समय नियमित रखने से भी मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है।

 
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क्रोनिक स्ट्रेस क्या है? - फोटो : AI
3.  दोस्तों और परिवार से बात करें
 
  • कई बार लोग अपनी परेशानियों को मन में दबाकर रखते हैं, जिससे तनाव और बढ़ जाता है।
  •  ऐसे में परिवार के सदस्यों, दोस्तों या भरोसेमंद लोगों से अपनी भावनाएं साझा करना फायदेमंद हो सकता है। 
  • बातचीत करने से मानसिक बोझ हल्का होता है और समस्याओं को बेहतर तरीके से समझने व सुलझाने में मदद मिलती है।
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क्रोनिक स्ट्रेस क्या है? - फोटो : AI

क्या डॉक्टर से संपर्क करना सही?

यदि तनाव कई हफ्तों या महीनों तक बना रहे और दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार उदासी, चिंता, नींद की समस्या या काम में रुचि कम होना मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसे में मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहतर होता है, ताकि समय रहते सही उपचार और मार्गदर्शन मिल सके।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

 
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