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Chocolate Cyst : चॉकलेट सिस्ट में होती है अनियमित पीरियड्स की समस्या, जानें इसके लक्षण और इलाज

Wed, 06 Jul 2022 05:29 PM IST
स्वाति शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दर्द से भरे पीरियड्स - फोटो : सोशल मीडिया
महिलाओं के लिए मासिक का चक्र का नियमित रहना भी स्वस्थ रहने की दिशा में एक महत्वपूर्ण स्थिति है। आजकल कई सारे कारणों से महिलाओं के जीवन की इस नियमित और प्राकृतिक प्रक्रिया में व्यवधान आने लगा है। केवल उम्रदराज महिलाओं में ही नहीं युवतियों और किशोरियों तक में सिस्ट की समस्या आम होने लगी है। चॉकलेट सिस्ट भी इसी का हिस्सा है। कुछ समय पूर्व प्रसिद्ध अभिनेत्री कैटरीना कैफ भी इससे गुजर चुकी हैं। 
मासिक धर्म को लेकर अब भी हमारे देश की सबसे बड़ी समस्या है, खुलकर बात न कर पाना। महिलाएं अब भी इससे जुडी तकलीफ को छुपाती हैं। जबकि समय पर इलाज मिलने से ज्यादातर समस्याएं पूरी तरह ठीक हो सकती हैं। चॉकलेट सिस्ट के मामले में भी यही होता है। यदि समय रहते इलाज लिया तो समस्या आगे बढ़ने से रुक जाएगी। चॉकलेट सिस्ट को जानना और समझना इससे बचाव को और बेहतर बना सकता है। 
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अधिक रक्तस्राव की परेशानी - फोटो : Pixabay
असामान्य ब्लीडिंग और पेटदर्द

कभी-कभार ज्यादा ब्लीडिंग, पेटदर्द या ब्लॉटिंग का अनुभव किसी भी महिला को हो सकता है। हर बार यह सिस्ट की वजह से ही हो यह जरूरी नहीं। लेकिन सिस्ट की वजह से यह अनियमितता निरतंर हो सकती है। चॉकलेट सिस्ट को चिकित्स्कीय भाषा में  'एंडोमेट्रिओसिस ऑफ ओवरी' या 'ओवेरियन एंडोमेट्रियोमा' के नाम से जाना जाता है। ये सिस्ट ओवरी के भीतर पनपती हैं लेकिन ज्यादातर कैंसर रहित होती हैं। इनके भीतर तरल पदार्थ भरा होता है और दिखने में ये भूरे से रंग की होती हैं। जैसे पिघली हुई चॉकलेट हो। इसलिए ही इन्हें चॉकलेट सिस्ट का नाम दिया गया है। इनका यह रंग असल में शरीर में बच गए मासिक धर्म के खून और ऊतकों के कारण होता है जो सिस्ट की खाली जगह में भर जाते हैं। यह स्थिति एक ओवरी में भी बन सकती है और कई बार दोनों ओवरीज़ इसकी शिकार हो सकती हैं। यह संख्या में एक भी हो सकती  हैं और ज्यादा भी। 
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लक्षणों को समझें - फोटो : Pixabay
लक्षण समझिए 

सिस्ट की समस्या का प्रतिशत तेजी से महिलाओं में बढ़ रहा है। ख़ास बात यह है कि एंडोमेट्रियोसिस की समस्या से ग्रसित करीब 40 प्रतिशत महिलाओं में चॉकलेट सिस्ट होने की आशंका हो सकती है। इसलिए इसके लक्षणों को ध्यान में रखना जरूरी है। ताकि समय रहते डॉक्टर की सलाह से इलाज लेकर समस्या को नियंत्रण में रखा जा सके। इस समस्या के लक्षणों में शामिल हैं-

* पीरियड के समय तेज दर्द होना

* कमर या पेडू में दर्द जो कि बिना मासिक के भी हो रहा हो 

* पीरियड्स का अनियमित होना 

* कुछ महिलाओं में प्रजनन क्षमता में कमी आना 

* यौन संबंधों के दौरान बहुत पीड़ा का होना, आदि 

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पेटदर्द की समस्या - फोटो : istock
सिस्ट का आकार

यह भ्रान्ति कई लोगों को होती है कि अगर सिस्ट का आकार कम होगा तो तकलीफ नहीं होगी। जबकि असल में सिस्ट के आकार से अधिक पीड़ा का होना इस बात पर निर्भर करता है कि सिस्ट किस जगह पर है। ऐसे में वे महिलाएं जिनको जांच में सिस्ट कम आकार की आती है वे कई बार इसे बिना इलाज के छोड़ देती हैं जो कि गलत परिणाम दे सकता है। इस तरह की सिस्ट हालांकि किसी भी उम्र की महिला को हो सकती है लेकिन ज्यादातर इनके मामले गर्भधारण की उम्र वाली महिलाओं में देखने को मिलते हैं। कई बार इलाज न मिलने पर इसकी वजह से गर्भधारण में भी मुश्किलें आ सकती हैं। यदि किसी वजह से सिस्ट फट जाती है तो उस जगह पर अचानक तेज पेटदर्द हो सकता है। इस स्थिति में तुरंत इलाज की जरूरत होती है। 
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सोनोग्राफी से होती जांच - फोटो : Pixabay
डॉक्टर ऐसे लगाते हैं पता

वैसे तो अनियमित या अधिक पीड़ा वाले पीरियड्स ही इस तरह की सिस्ट का संकेत देने लगते हैं। लेकिन कई महिलाओं में लक्षण बहुत कम या न के बराबर हो सकते हैं। ऐसे में पेल्विक परीक्षण, जिसमें डॉक्टर को हाथ से परीक्षण के दौरान सिस्ट महसूस हो उससे, लक्षणों के आधार पर या बाकी सब ठीक होने के बावजूद गर्भधारण न हो रहा हो, इन सब बातों का परीक्षण कर डॉक्टर सिस्ट के लिए आगे सोनोग्राफी आदि की सलाह देते हैं। सोनोग्राफी के जरिये सिस्ट का पता तो चल जाता है लेकिन चॉकलेट सिस्ट है या नहीं इसके लिए डॉक्टर सिस्ट में से निडिल द्वारा द्रव्य लेकर जाँच करते हैं। इससे सिस्ट की प्रकृति भी पता चल जाती है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pexels.com
इलाज और सतर्कता

चॉकलेट सिस्ट के एक बार हट जाने के बाद इसके फिर से बनने की भी आशंका हो सकती है। इसलिए इसके इलाज और उसके बाद की सावधानियों को ध्यान में रखने की जरूरत है। यह कोई ऐसी चीज नहीं जिसे न किया जा सके। इलाज मरीज की उम्र, लक्षण, एक ओवरी पर प्रभाव है या दोनों पर, महिला आगे बच्चे चाहती है या नहीं,आदि जैसी कई चीजों पर निर्भर करता है। यदि सिस्ट आकार में छोटी है और कोई खास लक्षण प्रकट नहीं कर रही है तो डॉक्टर कुछ समय प्रतीक्षा करने को भी कह सकते हैं। इस दौरान आपको आने रूटीन में परिवर्तन करने, खान-पान में बदलाव और व्यायाम सलाह भी दी जा सकती है। कुछ दवाएं भी दी जा सकती हैं जिनसे दर्द में राहत मिल सकती है और सिस्ट की वृद्धि को धीमा किया जा सकता है। यदि सिस्ट को हटाना है तो सर्जरी की ही मदद ली जाती है। इस प्रक्रिया को ओवेरियन सिस्टेक्टमी कहा जाता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ध्यान रखें ये बातें भी

* नियमित व्यायाम यहाँ भी बहुत मददगार होता है। इससे शरीर को अंदरूनी तौर पर भी फिट रखने में मदद मिलती है। यह लक्षणों को नियंत्रित करने में भी सहायक हो सकता है। 

* पोषक खान-पान के जरिये आपको वजन को संतुलित रखने और शरीर को पर्याप्त ऊर्जा देने में सहायता मिलती है। इससे भी लक्षणों में राहत मिल सकती है। 

* सर्जरी के बाद सिस्ट निकलवाने पर भी सिस्ट के दुबारा आने की आशंका बन सकती है। ऐसे में रूटीन को नियमित रखने से शरीर को लय में लाने में सहायता मिल सकती है। 

* अधिकांशतः सर्जरी या इलाज के बाद नियमित जीवनशैली और खान-पान के साथ माँ बनने में भी सफलता पाई जा सकती है। इसलिए सकारात्मक सोच के साथ इलाज लें। 
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अनियमित पीरियड्स - फोटो : pixabay
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 
 
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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