जलवायु परिवर्तन वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। जिस तरह से दुनियाभर में तापमान बढ़ रहा है, इसने कई तरह के जोखिम खड़े कर दिए हैं। वैज्ञानिक लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि बढ़ती गर्मी इंसानों की सेहत बिगाड़ रही है। गर्भवती महिलाओं, नवजात और छोटे बच्चों में इसका सबसे ज्यादा संकट देखा जा रहा है।
हाल के वर्षों में दुनिया के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव देखने को मिली हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। लंबे समय तक रहने वाली गर्मी, उमस भरा मौसम और बढ़ती हीट इंडेक्स जैसी परिस्थितियां गर्भावस्था के दौरान कई तरह की स्वास्थ्य चुनौतियां पैदा कर सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी शरीर के सामान्य कार्यों को प्रभावित कर सकती है, जिससे गर्भवती महिलाओं में थकान, डिहाइड्रेशन, ब्लड प्रेशर में बदलाव और हीट एक्सहॉशन जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। कुछ शोधों में इसे समय से पहले प्रसव, जन्म के समय कम वजन और अन्य गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं को बढ़ाने वाला बताया गया है।
इसी से संबंधित एक अन्य अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि भीषण गर्मी सहने वाले बच्चों का दिमागी विकास भी प्रभावित हो सकता है।