डॉक्टरों की सलाह
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क्या कहती हैं विशेषज्ञ?
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गाजियाबाद की अध्यक्ष डॉ. अल्पना कंसल कहती हैं कि हर महिला अपने प्रजनन काल (जब तक मासिक धर्म होता है) का लगभग एक-चौथाई समय पीरियड्स के साथ बिताती है। ऐसे में सिर्फ ऐसा पैड चुनना पर्याप्त नहीं है जो अधिक खून सोख ले, बल्कि यह भी जरूरी है कि वह त्वचा के लिए आरामदायक और सुरक्षित हो।
- पैड्स की ब्रीथेबल यानी हवा पार करने वाली सामग्री और त्वचा के लिए अनुकूल तत्व जैसे मोरिंगा वाले पैड लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर त्वचा को अधिक आराम दे सकते हैं।
- हालांकि, चाहे पैड किसी भी तरह का हो, उसे समय-समय पर बदलना और सही मासिक धर्म स्वच्छता बनाए रखना सबसे जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल महिलाएं ऐसे सैनिटरी पैड ज्यादा पसंद कर रही हैं जो हवा और नमी को बाहर निकलने दें, साथ ही लीक होने से भी बचाएं। इससे लंबे समय तक पैड पहनने पर घुटन, पसीना और त्वचा में जलन की संभावना कम हो सकती है।
इसके अलावा वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋचा सिंघल कहती हैं, कि महिलाओं को अब केवल पैड की मोटाई, आकार या सोखने की क्षमता देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। उन्हें पैकेट पर लिखी जानकारी भी ध्यान से पढ़नी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि पैड किन सामग्रियों से बना है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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