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Alert: गुजरात में जानलेवा संक्रमण से तीन बच्चों की मौत, 10 प्वाइंट्स में जानिए चांदीपुरा वायरस के बारे में

Sun, 12 Jul 2026 03:39 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

चांदीपुरा वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं। संक्रमित व्यक्ति, खासकर बच्चों में, अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, उल्टी और शरीर में दर्द हो सकता है। गुजरात में बढ़ते संक्रमण के मामले स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ाते जा रहे हैं।
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चांदीपुरा वायरस का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
मानसून शुरू होते ही संक्रामक बीमारियों का दौर भी शुरू हो गया है। कई स्थानों पर डेंगू-मलेरिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों के साथ इन दिनों गुजरात में चांदीपुरा वायरस का खतरा देखा जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिमाग पर सीधा अटैक करने वाले इस संक्रामक रोग से अब तक यहां तीन बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि छह बच्चे संक्रमित पाए गए हैं।

अमर उजाला में शुक्रवार को प्रकाशित रिपोर्ट में हमने साबरकांठा जिले में 6 वर्षीय बच्ची की मौत की जानकारी दी थी। शनिवार को खेड़ा जिले में दो और बच्चों में भी चांदीपुरा वायरस जैसे लक्षण दिखाई दिए। बेहतर इलाज के लिए उन्हें गांधीनगर सिविल अस्पताल भेजा गया है। फिलहाल दोनों की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि वायरस को फैलने से रोकने के लिए कई स्तरों पर एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। लगातार निगरानी, घरों के आसपास कीटनाशक का छिड़काव, साफ-सफाई, मिट्टी की दीवारों और दरारों को भरने जैसे उपाय किए जा रहे हैं ताकि कीट वहां पनप न सकें।

आइए इस खतरनाक वायरस के बारे में कुछ जरूरी बातें जान लेते हैं।
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चांदीपुरा वायरस का बढ़ता खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
चांदीपुरा वायरस का खतरा

चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से संक्रमित सैंड फ्लाई (रेत में पनपने वाली बहुत छोटी मक्खी जैसे कीट) के काटने से फैलता है। यह वायरस अक्यूट एन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम का कारण बन सकता है। जिसमें दिमाग में सूजन और गंभीर संक्रमण की समस्या हो सकती है, जो जानलेवा भी हो सकता है। आइए इस रोग के बारे में 10 प्वाइंट्स में समझ लेते हैं।
 
  • चांदीपुरा एक आरएनए वायरस है, जो रैबडोविरिडे फैमिली का सदस्य है। इसकी पहचान पहली बार वर्ष 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में हुई थी, जिसके नाम पर इस वायरस का नाम रखा गया। भारत में इसके मामले समय-समय पर देख जाते रहे हैं, विशेष रूप से मानसून के दौरान सामने आते रहे हैं।  
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छोटे बच्चों को बुखार होना - फोटो : Adobe Stock
  • यह वायरस मुख्य रूप से मस्तिष्क को प्रभावित करने वाली गंभीर बीमारी का कारण बनता है। ये बीमारी सबसे ज्यादा 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में देखी गई है। संक्रमण तेजी से बढ़ सकता है, इसलिए इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है। 
 
  • चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से सैंडफ्लाई के काटने फैलता है। मानसून के दिनों में नमी, गंदगी और कीड़ों की संख्या बढ़ने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों, मिट्टी के घरों और कम स्वच्छता वाले इलाकों में इसका जोखिम अधिक हो सकता है। 
 
  • चांदीपुरा वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं। इसके अलावा सिरदर्द-कमजोरी, उल्टी और शरीर में दर्द हो सकता है। कई मामलों में बीमारी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है। जिससे दौरे पड़ने, बेहोशी, भ्रम जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं बढ़ जाती हैं।

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चांदीपुरा का ब्रेन पर असर - फोटो : Adobe Stock
 
  • चांदीपुरा वायरस का संक्रमण बहुत तेजी से दिमाग को प्रभावित कर सकता है। कई मरीजों में बुखार आने के 24 से 48 घंटे के भीतर दौरे, कोमा और मस्तिष्क संबंधी गंभीर जटिलताएं विकसित हो सकती हैं। यदि समय पर इलाज न मिले तो मृत्यु का खतरा काफी बढ़ जाता है। 
 
  • चांदीपुरा वायरस के लिए कोई विशेष एंटीवायरल दवा या स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इलाज पूरी तरह मरीज के लक्षणों और स्थिति पर आधारित होता है। डॉक्टर बुखार नियंत्रित करने, शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने, दौरे रोकने और जरूरत पड़ने पर आईसीयू में इलाज जैसी सहायक चिकित्सा देते हैं। 
 
  • डॉक्टर कहते हैं, संक्रमण की स्थिति में जितनी जल्दी मरीज अस्पताल पहुंचता है, उतनी ही बेहतर रिकवरी की संभावना होती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी माना जाता है।
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चांदीपुरा वायरस का खतरा - फोटो : Adobe stock
  • चूंकि इसका कोई टीका उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है। सैंडफ्लाई और अन्य कीटों के काटने से बचने के लिए पूरी बाजू के कपड़े पहनें, बच्चों को शाम के समय बाहर कम रखें, मच्छरदानी का उपयोग करें और कीट भगाने वाले रिपेलेंट का इस्तेमाल करें। 
 
  • कीटों को बढ़ने से रोकने के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने दें तथा सफाई बनाए रखें। फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव की मदद से कीटों को बढ़ने से रोका जा सकता है। सामुदायिक स्तर पर स्वच्छता बढ़ाने से संक्रमण का खतरा कम किया जा सकता है।
 
  • भारत में चांदीपुरा वायरस के मामले समय-समय पर महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में सामने आते रहे हैं। वर्ष 2024 में देश में पिछले दो दशकों का सबसे बड़ा प्रकोप दर्ज किया गया था। फिलहाल गुजरात में इसके मामले बढ़ते हुए देखे जा रहे है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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