प्रतीकात्मक तस्वीर
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थोड़ी दूर मेनवा गांव के मनोज कुमार की मां को 2004 में मुंह का कैंसर हुआ था, जिसका उन्होंने बाकायदा इलाज करवाया, लेकिन अब फिर से उनका कैंसर लौट आया है। मनोज थोड़े गुस्से में बोले, 'मीडिया में जाने से भी कुछ होता नहीं है। सरकार को ध्यान देना चाहिए कि इस क्षेत्र में कैंसर इतना क्यों बढ़ रहा है, लेकिन सरकार तो चुनाव में व्यस्त है।'
मनोज का परिवार गांव का एक संभ्रात परिवार है। उनकी मां के कैंसर के इलाज में अब तक ढाई लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। इस खर्चे के अलावा उन्हें मुख्यमंत्री चिकित्सा कोष से भी 80 हजार रुपये मिले थे। हालांकि, ये सहायता गरीबी रेखा से नीचे वाले लोगों के लिए होती है। वह कहते हैं, 'मेरी मां परेशान है और बस प्रार्थना कर रही हैं कि वो इस दुनिया से चली जाएं। इतने दर्द में इंसान और क्या कहेगा।'
ये तीनों परिवार एक ही इलाके के अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक वर्ग से हैं। लेकिन, तीनों में ही परिजन कैंसर के शिकार हुए हैं। फर्क बस इतना है कि जागरूकता और इलाज तक सबकी पहुंच नहीं है।