कैंसर के मरीजों के लिए बढ़ती चिंताएं
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क्या कहते हैं डॉक्टर?
बेंगलुरु स्थित वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मानसी खंडेरिया कहती हैं, ये दवाएं कई प्रकार के कैंसर उपचार के लिए बहुत जरूरी मानी जाती हैं। यदि दवाएं समय पर नहीं मिलतीं तो इलाज की समय-सीमा, इलाज का परिणाम और मरीजों का भरोसा, तीनों प्रभावित हो सकते हैं।
फोर्टिस हॉस्पिटल, बेंगलुरु की मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. नीति रायजादा कहती हैं, सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण कीमोथेरेपी दवाओं में गिनी जाती हैं। इनके दूसरे विकल्प मरीजों पर प्रभावी या उपयुक्त नहीं होते। इससे इलाज में देरी के साथ मरीजों की स्थिति पर भी नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।
सर गंगाराम अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. श्याम अग्रवाल कहते हैं, पिछले 2-3 सप्ताह से पूरे देश में इन दोनों दवाओं की भारी कमी बनी हुई है। अस्पतालों में सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन लगभग न के बराबर उपलब्ध है। लगभग 60 से 70 प्रतिशत एडवांस कैंसर वाले मरीजों को इन दोनों दवाओं की जरूरत पड़ती है। समय पर दवाएं न मिल पाना रोग की गंभीरता और खतरे को बढ़ाने वाला हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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