डायबिटीज का खतरा
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से प्रशिक्षण प्राप्त गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर सौरभ सेठी कहते हैं, प्री-डायबिटीज को वापस सामान्य स्थिति में लाया जा सकता है, खासकर अगर समय रहते सही कदम उठाए जाएं। सही जीवनशैली अपनाने से प्री-डायबिटीज को रिवर्स करने में 70-80% मदद मिल सकती है।
अगर इस दौरान जीवनशैली में आप कोई सुधार नहीं करते या प्री-डायबिटीज पर ध्यान नहीं देते तो पैंक्रियाज की वे कोशिकाएं जो इंसुलिन बनाती हैं, हर साल अपनी कार्यक्षमता का लगभग 4-5 प्रतिशत खोती जाती हैं।
- डॉ. सेठी एक आम गलतफहमी भी दूर करते हैं। उनका कहना है कि बीटा सेल्स हमेशा पूरी तरह खत्म नहीं हो जातीं।
- कई मामलों में वे सिर्फ लगातार ज्यादा काम करने की वजह से थकी हुई होती हैं।
- सही खान-पान और जीवनशैली की आदतों से इन कोशिकाओं की कार्यक्षमता में फिर सुधार हो सकता है।
डॉ. सेठी कहते हैं, अध्ययन में पाया गया कि प्री-डायबिटीज के दौरान जिन लोगों ने अपने शरीर का 10-15 प्रतिशत वजन कम किया, उनमें से 86 प्रतिशत तक लोगों में टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा कम हो गया। डॉ कहते हैं, वेट लॉस के साथ जब शरीर के अंदर, खासकर लिवर और पैंक्रियाज के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी कम होती है, तो इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता बेहतर हो सकती है।