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Low Calcium: कैल्शियम की कमी से दांत-हड्डियां ही नहीं दिल भी हो जाता है कमजोर, इन लक्षणों पर दें ध्यान

Sun, 12 Apr 2026 08:50 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

खानपान में गड़बड़ी, धूप की कमी और फास्ट फूड की बढ़ती आदतों के कारण हर उम्र के लोगों में कैल्शियम की कमी तेजी से बढ़ रही है। इसका सिर्फ दांत और हड्डियों पर ही असर नहीं पड़ता, इससे पूरी सेहत प्रभावित हो सकती है।
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लो कैल्शियम - फोटो : Amarujala.com/AI
खान-पान और लाइफस्टाइल की गड़बड़ी ने हमारी सेहत को बुरी तरह से प्रभावित किया है, लिहाजा कई बीमारियां जो पहले उम्र बढ़ने के साथ हुआ करती थीं वह अब कम उम्र वालों में भी देखी जा रही हैं। कम उम्र में हड्डियां कमजोर हो रही हैं, आर्थराइटिस का खतरा बढ़ता जा रहा है। इन समस्याओं के लिए शरीर में कैल्शियम की कमी एक बड़ा कारण हो सकती है। 

शरीर को मजबूत और हेल्दी बनाए रखने के लिए जिन मिनरल्स को सबसे जरूरी माना जाता है, उसमें कैल्शियम सबसे ऊपर आता है। आमतौर पर लोग कैल्शियम को सिर्फ हड्डियों और दांतों की मजबूती से जोड़कर देखते हैं, लेकिन सच्चाई इससे कहीं बड़ी है। यह मिनरल हमारे शरीर की कई अहम प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

क्या आप जानते हैं मांसपेशियों में ऐंठन और हृदय की कई समस्याओं के लिए भी कैल्शियम की कमी जिम्मेदार हो सकती है?
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कैल्शियम अच्छी सेहत के लिए जरूरी - फोटो : freepik.com
कैल्शियम की कमी का बढ़ता खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, लाइफस्टाइल और खानपान की गड़बड़ी, धूप की कमी और फास्ट फूड्स की बढ़ती आदतों के कारण लोगों में लो कैल्शियम की समस्या तेजी से बढ़ रही है। धीरे-धीरे यही कमी दांतों को कमजोर बनाने लगती है, हड्डियों की डेंसिटी घटने लगती है और शरीर अंदर से खोखला हो जाता है।
 
  • जब शरीर को पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिलता, तो वह हड्डियों में जमा कैल्शियम को इस्तेमाल करना शुरू कर देती है। इससे हड्डियां पतली और कमजोर होने लगती हैं।
  • इसके अलावा कैल्शियम की कमी मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन, थकान महसूस होने, हाथ-पैरों में झुनझुनी और यहां तक कि दिल की धड़कनों पर भी असर डाल सकती है।
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मांसपेशियों की समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

हड्डी एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन कुमार कहते हैं, कैल्शियम की कमी का असर आपकी मांसपेशियों पर भी पड़ सकता है। कैल्शियम हमारे शरीर के लिए अहम मिनरल है। हमारे कई मसल्स फंक्शन जैसे मसल्स कॉन्ट्रेक्शन, नर्व सिग्नल आदि में भी कैल्शियम अहम भूमिका निभाता है। अगर हमारे शरीर में पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम न हो, तो ब्लड क्लॉटिंग की जटिल प्रक्रिया भी बाधित हो सकती है। 

शरीर में लो कैल्शियम के कारण मांसपेशियां अपने आप सिकुड़ने लगती है। इससे स्टिफनेस आ जाती है, असहजता बढ़ जाती है। नतीजतन, मांसपेशियों में अकड़न, पैरों में दर्द जैसी कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं।
 
  • कैल्शियम की कमी की वजह से पीठ में भी दर्द बढ़ने लगता है।
  • शरीर में कैल्शियम की कमी की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
  • अगर लंबे समय तक कैल्शियम की कमी को इग्नोर करते हैं, तो कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
  • इसमें याद्दाश्त कमजोर होना, मिर्गी के दौरे पड़ना और हार्ट प्रॉब्लम होना शामिल हैं।

डॉ नितिन कहते हैं, शरीर सही ढंग से काम करे, इसके लिए कैल्शियम बहुत जरूरी है। नियमित रूप विटामिन-डी का सेवन करें, जिससे कैल्शियम का अवशोषण बढ़ सके। नियमित वर्कआउट भी जरूरी है।
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दिल की समस्याओं का खतरा - फोटो : Freepik.com
इन समस्याओं का भी रहता है खतरा

शरीर में लगभग 99% कैल्शियम हड्डियों और दांतों में स्टोर रहता है। जब डाइट से पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिलता तो शरीर हड्डियों से कैल्शियम निकालना शुरू कर देता है, जिससे हड्डियां धीरे-धीरे पतली और कमजोर होने लगती हैं। कैल्शियम की कमी से कई और भी दिक्कतें बढ़ जाती हैं।
 
  • कैल्शियम हृदय स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। यह दिल की मांसपेशियों को सही तरीके से सिकुड़ने और फैलने में मदद करता है। इसकी कमी होने पर हार्टबीट अनियमित हो सकती है।
  • अगर आप बिना ज्यादा काम किए भी हर समय थकान महसूस करते हैं, तो इसका एक कारण कैल्शियम की कमी भी हो सकती है। 
  • कैल्शियम नसों के सही कामकाज के लिए जरूरी मिनरल है। इसकी कमी होने पर हाथ-पैरों, उंगलियों या चेहरे में झुनझुनी, सुन्नपन या चुभन महसूस हो सकती है।
  • बच्चों के शरीर के विकास के लिए कैल्शियम बहुत जरूरी है। इसकी कमी बच्चों की हाइट को प्रभावित कर सकती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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