फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चीन में तेजी से फैल रही नई बीमारी कितनी खतरनाक है? कोरोना वायरस की तरह ही हैं लक्षण

Tue, 22 Sep 2020 11:44 AM IST
सोनू शर्मा बीबीसी हिंदी
विज्ञापन
1 of 8
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एक तरफ दुनिया कोरोना वायरस के कहर से जूझ रही है जो चीन के वुहान से दुनियाभर में फैला था, अब दूसरी ओर चीन के उत्तर पश्चिमी इलाके में स्थित गैन्सू प्रांत के लानजोउ शहर में सैंकड़ों लोग एक नए संक्रमण से पीड़ित पाए गए हैं। ये संक्रमण ब्रूसेलोसिस बैक्टीरिया से फैल रहा है और बड़ी संख्या में लोगों को पीड़ित कर रहा है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने गैन्सू प्रांत के सेंट फॉर डिजीज कंट्रोल विभाग के हवाले से बताया कि इस बैक्टीरिया से करीब 3,245 लोग संक्रमित हैं। 

बीते सोमवार को 21 हजार लोगों को टेस्ट किया गया, जिसमें शुरुआती तौर पर 4,646 लोगों को पॉजिटिव बताया गया। हालांकि ये संख्या उम्मीद से ज्यादा हो सकती है और फिलहाल इसके फैलने को लेकर प्रशासन और आम लोग चिंतित हैं। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, 11 सरकारी संस्थानों को मुफ्त टेस्ट और इलाज के लिए अस्पताल का दर्जा दिया गया है।  
विज्ञापन

2 of 8
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्या है ब्रूसेलोसिस और ये कैसे फैलता है?

ब्रूसेलोसिस एक बैक्टीरिया जनित बीमारी है जो मुख्य तौर पर गाय, भेड़-बकरी, सुअर और कुत्तों को संक्रमित करती है। इंसानों में भी संक्रमण हो सकता है अगर वे संक्रमित जानवर के संपर्क में आएं। जैसे कि संक्रमित पशु उत्पादों को खाने-पीने से या हवा में मौजूद बैक्टीरिया सांस लेने से इंसान में पहुंच जाए। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि ज्यादातर ये बीमारी संक्रमित जानवरों के बिना पाश्चरीकृत दूध या पनीर लेने से इंसानों में आ रही है। इंसानों से इंसानों में बेहद कम संक्रमण होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, ये बीमारी दुनिया के कई देशों में रिपोर्ट होती रही है। इसका इलाज संभव है। दवाइयों का सिलसिला एक-डेढ़ महीने तक चलता है। 
विज्ञापन

3 of 8
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्या हैं इसके लक्षण?

बीमारी के लक्षण आने में एक हफ्ते से लेकर दो महीने भी लग सकते हैं, लेकिन अक्सर दो से चार हफ्ते में लक्षण आ जाते हैं। इसके लक्षण हैं- बुखार, पसीना आना, थकान, भूख ना लगना, सिर दर्द, वजन घटना और मांसपेशियों में दर्द। कई लक्षण लंबे वक्त तक रह सकते हैं और कुछ कभी नहीं जाते। जैसे कि बार-बार बुखार होना, जोड़ों में दर्द, अंडकोष में सूजन, दिल या लिवर में सूजन, दिमागी लक्षण, थकान, डिप्रेशन आदि। कई बार बहुत हल्के लक्षण होते हैं। 

4 of 8
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
चीन में ये कैसे शुरू हुई?

ये बैक्टीरिया पिछले साल जुलाई-अगस्त में एक फैक्ट्री से हुए रिसाव के बाद फैला था। इस बैक्टीरिया के इलाज के लिए बनने वाली ब्रूसीला वैक्सीन के उत्पादन में एक्सपायर हो चुके कीटाणुनाशकों का इस्तेमाल किया गया था, जिसके कारण बैक्टीरिया से संक्रमति एरोसोल्स का हवा में रिसाव हो गया। बताया जाता है कि इसके पास लानझोऊ वेटेरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट है, जहां हवा के जरिए ये संक्रमण लोगों में फैला और इस बीमारी की शुरुआत हुई। 
विज्ञापन

5 of 8
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इसके बाद क्या कार्रवाई की गई? 

न्यूज एजेंसी एनएनआई ने लानजोउ हेल्थ कमिशन के हवाले से बताया है कि इस बीमारी के फैलने के महीनों बाद प्रांतीय और म्यूनिसिपल अधिकारियों ने फैक्ट्री से हुए रिसाव को लेकर जांच शुरू की। जनवरी तक इस फैक्ट्री के वैक्सीन उत्पादन का लाइसेंस रद्द कर दिया गया। फैक्ट्री में कुल सात जानवरों की दवाओं के अप्रूवल नंबर रद्द कर दिए गए। एएनआई के मुताबिक फैक्ट्री ने फरवरी में सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी और कहा कि उसने इस मामले के लिए जिम्मेदार पाए गए आठ लोगों को कड़ी सजा दी है।
विज्ञापन

6 of 8
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हंता वायरस भी अपना असर छोड़ चुका है

इसी साल ग्लोबल टाइम्स ने खबर दी थी कि चीन के यूनान प्रांत में हंता वायरस की वजह से 23 मार्च को एक शख्स की मौत हो गई थी। हंता वायरस चूहों से फैलता है। अगर कोई इंसान चूहों के मल-मूत्र या लार को छूने के बाद अपने चेहरे पर हाथ लगाता है तो हंता वायरस से उसके संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाती है। 
विज्ञापन

7 of 8
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हालांकि आमतौर पर हंता वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं जाता है। हंता के संक्रमण का पता लगने में एक से आठ हफ्तों का वक्त लग सकता है। अगर कोई व्यक्ति हंता संक्रमित है तो उसे बुखार, दर्द, सर्दी, बदन दर्द, उल्टी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। 
विज्ञापन

8 of 8
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हंता संक्रमित व्यक्ति की हालत बिगड़ने पर फेफड़ों में पानी भरने और सांस लेने में तकलीफ भी हो सकती है। जनवरी 2019 में हंता से संक्रमित नौ लोगों की पेटागोनिया में मौत हो गई थी। इसके बाद पर्यटकों को आगाह भी किया गया था। तब के एक अनुमान के मुताबिक, हंता वायरस से संक्रमित लोगों के 60 मामले सामने आए थे, जिनमें 50 को क्वारंटीन रखा गया था। अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की मानें तो हंता वायरस में मृत्यु दर 38 फीसदी होती है और इस बीमारी का कोई 'स्पेसिफिक ट्रीटमेंट' नहीं है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें