शिशु मृत्युदर, भारत में लंबे समय से एक गंभीर चिंता का विषय रहा है। साल 2010 में भारत में शिशु मृत्युदर, विशेष रूप से पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में मौत के मामले, प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 65 थे। आधुनिक चिकित्सा, गर्भवती में समय पर स्वास्थ्य समस्याओं का निदान और जनजागरूकता बढ़ाकर अब भारत ने मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने में सफलता पा ली है।
साल 2014 में एक वर्ष से कम आयु के प्रति एक हजार जन्मे बच्चों में मृत्युदर 39 थी, जो 2021 में घटकर 27 रह गई। इसी प्रकार, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर साल 2014 में 45 से घटकर 2021 में 31 रह गई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), यूनिसेफ जैसे वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों ने इसमें और सुधार लाने की अपील की है। इसी से संबंधित एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि अगर स्तनपान के महत्व और इससे होने वाले फायदों को लेकर और अधिक जागरूकता बढ़ाई जाए, माएं स्तनपान कराएं तो दुनियाभर में हर साल 8 लाख बच्चों की जान बचाई जा सकती है।
जन्म से 23 माह तक सभी बच्चों के लिए स्तनपान जरूरी है, ये हर साल पांच साल से कम उम्र के 8.2 लाख से अधिक बच्चों में असमय मृत्यु के खतरे को कम कर सकती है।