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Brain Fog: ब्रेन में 'फॉग' होने का क्या मतलब है? जानिए इस समस्या के कारण और बचाव के बारे में

Mon, 26 Jun 2023 05:14 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ब्रेन फॉग की समस्या - फोटो : Pixabay
मस्तिष्क हमारे शरीर का नियंत्रक है, इसलिए इसमें होने वाली किसी भी समस्या का सीधा असर पूरे शरीर की सेहत पर हो सकता है। यही कारण है कि सभी लोगों को मस्तिष्क को स्वस्थ रखने वाले उपाय करते रहने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाल और आहार की कई ऐसी गड़बड़ आदते हैं जिसने संपूर्ण शरीर को प्रभावित किया है, ब्रेन फॉग की समस्या भी उन्हीं में से एक है।

ब्रेन फॉग, जैसा नाम से स्पष्ट होता है यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपको क्लाउडी हेडेक की समस्या हो सकती है। वैसे तो यह तकनीकी रूप से कोई चिकित्सा या वैज्ञानिक शब्द नहीं है, इसे मस्तिष्क से संबंधित कुछ समस्याओं के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ब्रेन फॉग मुख्यरूप से भ्रम, भूलने की समस्या और फोकस-मानसिक स्पष्टता में कमी की समस्या है।

अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि कोरोना के गंभीर संक्रमण का शिकार रहे कुछ लोगों में भी ब्रेन फॉग का खतरा अधिक देखा गया है। आइए इस समस्या के बारे में जानते हैं।
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ब्रेन फॉग के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay
ब्रेन फॉग और इसके लक्षण

ब्रेन फॉग की समस्या वयस्कों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी हो सकती है, जिन कारणों को इसके लिए जिम्मेदार माना जाता है उनमें से अधिक तनाव लेना, खराब आहार, नींद की कमी और कुछ दवाओं का सेवन करना हो सकता है। कोरोना वायरस ने भी कुछ मामलों में मस्तिष्क को क्षति पहुंचाते हुए ब्रेन फॉग के खतरे को बढ़ा दिया है।

कुछ अध्ययनों में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि जो लोग कंप्यूटर पर बहुत अधिक समय बिताते हैं इनमें भी ये समस्या हो सकती है। जिन लोगों को ब्रेन फॉग की दिक्कत होती है उनमें कई प्रकार के लक्षण हो सकते हैं।
  • नींद न आना-अनिद्रा और सिरदर्द।
  • ऊर्जा में कमी या थकान।
  • चीजों को ठीक तरीके से याद न कर पाना।
  • चीजों को तुरंत समझ पाने में कठिनाई होना।
  • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होना।
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मस्तिष्क में इंफ्लामेशन की समस्या - फोटो : istock
क्यों होती है ये समस्या?

सेलुलर स्तर पर, ब्रेन फॉग को मस्तिष्क में इंफ्लामेशन और हार्मोन में परिवर्तन के कारण होने वाली समस्या माना जाता है, जो आपके मूड, ऊर्जा और फोकस को निर्धारित करते हैं। हार्मोन का असंतुलित स्तर पूरे सिस्टम को अस्त-व्यस्त कर देता है। इसके अलावा, ब्रेन फॉग सिंड्रोम मोटापा, असामान्य मासिक धर्म और मधुमेह जैसी अन्य स्थितियों को भी जन्म दे सकती है।

जिन लोगों में अस्थमा या एलर्जी की समस्या होती है या फिर जो लोग चिंता, अवसाद और तनाव जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के शिकार हैं उनमें ब्रेन फॉग होने का जोखिम रहता है।

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नींद की समस्या के कारण ब्रेन फॉग की समस्या - फोटो : istock
आहार और नींद पर दें विशेष ध्यान

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, चूंकि ब्रेन फॉग की समस्या किसी को भी हो सकती है, इसलिए सभी लोगों को इससे बचाव के तरीकों पर ध्यान देते रहना चाहिए। खराब लाइफस्टाइल विशेषतौर पर नींद की कमी इसका प्रमुख कारण हो सकती है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, नींद की कमी हमारे मस्तिष्क कोशिकाओं के आपसी कम्युनिकेशन को बाधित करती है, जिससे सोचने-समझने की स्पष्टता में कमी आ जाती है।

इसी प्रकार से शोध में अधिक चीनी वाली चीजों के सेवन को भी मस्तिष्क में सूजन से जोड़ा गया है, जिससे याददाश्त में दिक्कत हो सकती है। इसके कारण भी ब्रेन फॉग का खतरा रहता है। 
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आहार को रखें ठीक - फोटो : iStock
जीवनशैली में करें सुधार

जीवनशैली को ठीक रखकर मस्तिष्क सहित संपूर्ण शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। इसके लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें।
  • कंप्यूटर और मोबाइल फोन पर कम समय बिताएं।
  • सकारात्मक सोच रखें और तनाव कम करने का प्रयास करें।
  • आहार की पौष्टिकता का ध्यान रखें, एंटीइंफ्लामेटरी और एंटीऑक्सीडेंट वाली चीजों का अधिक सेवन करें।
  • पर्याप्त नींद लें, रात में 7-8 घंटे की नींद लेना बहुत आवश्यक है।
  • नियमित व्यायाम करने की आदत बनाएं।
  • शराब, धूम्रपान और कॉफी के अधिक सेवन से बचें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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