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Sana Makbul: बिग बॉस ओटीटी 3 विजेता सना मकबूल को हो गई लिवर की ये जानलेवा बीमारी, यहां जानिए विस्तार से

Mon, 16 Jun 2025 07:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • सना मकबूल ने हाल ही में खुलासा किया कि उन्हें लिवर सिरोसिस हो गया है। वह पहले से ही ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस से जूझ रही थीं, जो अब सिरोसिस में बदल गया है। 
  • अब आपके मन में भी ये सवाल आ रहा होगा कि आखिर ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस क्या होता है जिसके कारण सना को लिवर सिरोसिस हो गया है? आइए जानें।
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सना मकबूल को लिवर सिरोसिस की समस्या - फोटो : Freepik.com
Sana Makbul Liver Cirrhosis: बिग बॉस ओटीटी 3 की विजेता, मॉडल और एक्टर सना मकबूल ने हाल ही में खुलासा किया कि उन्हें लिवर सिरोसिस हो गया है। वह पहले से ही ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस से जूझ रही थीं, जो अब सिरोसिस में बदल गया है। 

मीडिया से एक बातचीत में सना ने कहा-

"मैं पिछले कुछ समय से ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस से पीड़ित हूं, लेकिन हाल ही में हालात और खराब हो गए। शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ने लिवर पर अधिक आक्रामक तरीके से अटैक करना शुरू कर दिया जिसके बाद जांच में मुझे लिवर सिरोसिस का पता चला है। मैं मजबूती से इसका मुकाबला कर रही हूं। डॉक्टर और मैं लीवर ट्रांसप्लांट से बचने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। मैंने इम्यूनोथेरेपी शुरू कर दी है। मैं बस इतना चाहती हूं कि लिवर ट्रांसप्लांट जैसी स्थिति के बिना ठीक हो जाऊं। यह आसान नहीं होने वाला है, लेकिन मैं इतनी आसानी से हार मानने को तैयार भी नहीं हूं।"

अब आपके मन में भी ये सवाल आ रहा होगा कि आखिर ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस क्या होता है जिसके कारण सना को लिवर सिरोसिस हो गया है?
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लिवर की बीमारी का खतरा - फोटो : adobe stock images
पहले ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस के बारे में जानिए

ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस लिवर की एक क्रॉनिक बीमारी है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से लिवर कोशिकाओं पर ही अटैक करने लगती है। इसके कारण लिवर में सूजन या कोशिकाओं के क्षतिग्रस्त होने का जोखिम रहता है। आमतौर पर इसे दीर्घकालिक स्थिति माना जाता है जो लिवर में इंफ्लेमेशन या स्कारिंग (सिरोसिस) का कारण बन सकती है। गंभीर स्थितियों में या फिर सही से इलाज न हो पाने के कारण इससे लिवर फेलियर तक का भी खतरा हो सकता है, जिसे जानलेवा माना जाता है।

जब ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस पर दवाओं का कोई असर नहीं होता या लिवर रोग गंभीर हो जाता है तो ऐसी स्थिति में लिवर ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी जाती है।

(ये भी पढ़िए- दीपिका कक्कड़ को हुआ स्टेज-2 लिवर कैंसर, जानिए क्यों होती है ये दिक्कत और कैसे करें पहचान)
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ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस की समस्या - फोटो : Freepik.com
ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस होने के क्या कारण हैं?

हमारे  शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली आमतौर पर वायरस, बैक्टीरिया पर अटैक करके आपको बीमार होने से बचाती है। हालांकि ऑटोइम्यून बीमारियों में प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के ही स्वस्थ कोशिकाओं को अपना दुश्मन समझ लेती है और इन्हें नुकसान पहुंचाने लगती है।

ऐसा क्यों होता है यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस के लिए कुछ जीन या वायरस जिम्मेदार हो सकते हैं। आनुवंशिकी और पर्यावरणीय कारक भी इसमें भूमिका निभाते हैं।

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लिवर की गंभीर समस्याएं (सांकेतिक) - फोटो : Freepik.com
किसे इस बीमारी का खतरा अधिक होता है?

वैसे तो पुरुष और महिला दोनों ही ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस से पीड़ित हो सकते हैं, लेकिन यह बीमारी महिलाओं में अधिक देखी जाती है। कई रिपोर्ट्स बताते हैं कि ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस की प्रवृत्ति परिवारों में चल सकती है, यानी कि जिन लोगों के परिवार में पहले किसी को ये समस्या रही है तो और भी लोगों में इसके विकसित होने का खतरा हो सकता है। 

समय रहते इस बीमारी पर ध्यान देना और इसका इलाज जरूरी है, वरना इसके कारण लिवर सिरोसिस और लिवर फेलियर जैसी जानलेवा समस्याओं का भी खतरा हो सकता है।
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लिवर की बीमारियों का खतरा - फोटो : Freepik.com
लिवर सिरोसिस क्या है, सना मकबूल जिसका हो गई हैं शिकार?

सना मकबूल ने बताया कि ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस के कारण अब उन्हें लिवर सिरोसिस  हो गया है।

लिवर सिरोसिस ऐसी गंभीर समस्या है जिसमें स्वस्थ कोशिकाएं धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होकर स्कार में बदल जाती हैं। लिवर में स्कार के कारण रक्त और ऑक्सीजन के प्रवाह को अवरुद्ध हो जाता हैं, जिसके कारण लिवर के लिए सामान्य रूप से काम करते रह पाना मुश्किल हो जाता है। सिरोसिस आपके लीवर की पित्त और आवश्यक रक्त प्रोटीन उत्पादन करने की क्षमता को कम कर देती है। इससे लिवर फेलियर तक हो सकता है जिसे जानलेवा माना जाता है। इस स्थिति में लिवर ट्रांसप्लांट ही एक विकल्प बचता है।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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