प्रतीकात्मक तस्वीर
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पुरुषों के कारण होने वाली दिक्कतें
पुरुष खड़े होकर पेशाब करते हैं तो उसके इधर-उधर फैलने का खतरा बना रहता है जो कि स्वच्छता के हिसाब से ठीक नहीं माना जाता। जिन टॉयलेट्स को और लोग भी इस्तेमाल करते हैं, वहां इस तरह के हालात पैदा होना बेहद खराब स्थिति होती है। इसलिए, अब इस बात पर जोर दिया जाने लगा है कि पुरुष बैठकर ही पेशाब करें।
2012 में स्वीडन से इसकी शुरुआत होती दिखती है जब एक स्थानीय राजनेता अपने कस्बे के सार्वजनिक शौचालयों की हालत से इतने त्रस्त हो गए कि उन्होंने पुरुषों को दूसरों की सुविधा का भी ख्याल रखने के लिए प्रेरित करने के रचनात्मक तरीके ढूंढना शुरू कर दिया। वो चाहते थे कि लोग स्वच्छता पर ध्यान दें और लोगों को सार्वजनिक शौचालयों में जाने पर किसी गंदी जगह पर पैर न रखने पड़ें। यहां से एक बहस की शुरुआत हुई और अब कई यूरोपीय देशों- जैसे कि जर्मनी में सार्वजनिक शौचालयों को लेकर नियम है कि आप टॉयलट में जाकर खड़े होकर पेशाब नहीं कर सकते। आप भले ही पुरुष हैं, आपको बैठकर ही पेशाब करना पड़ेगा।