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Liver Health: लिवर के लिए सबसे बेहतर टॉनिक कौन सा है? गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ने बताया

Sun, 09 Aug 2026 06:11 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

फैटी लिवर आजकल तेजी से बढ़ती समस्या है, लेकिन सही खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव से इसे काफी हद तक नियंत्रित और कई मामलों में रिवर्स किया जा सकता है। बिना चीनी और दूध वाली ब्लैक कॉफी का सेवन लिवर हेल्थ के लिए फायदेमंद माना जाता है।
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फैटी लिवर की समस्या का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
लिवर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है, जो लगातार बिना रुके काम करता रहता है। हालांकि जिस तरह से लोगों की लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी बढ़ती जा रही है, इसने लिवर की बीमारियों के खतरे को भी काफी बढ़ा दिया है। 

भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों को प्रोसेस करने से लेकर शरीर में बनने वाले कई जरूरी प्रोटीन को बनाने, दवाओं और दूसरे पदार्थों के मेटाबॉलिज्म के साथ पाचन को ठीक रखने में लिवर का ठीक तरीके से काम करते रहना जरूरी है। लिवर में होने वाली समस्याओं का असर पूरी सेहत पर पड़ सकता है, यही कारण है कि विशेषज्ञ सभी लोगों अपने लिवर को स्वस्थ रखने पर निरंतर ध्यान देते रहने की सलाह देते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल की गड़बड़ी के कारण फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। इसका असर शरीर के कई हिस्सों पर पड़ सकता है। चिंता की बात यह है कि लिवर की कई बीमारियां शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं देतीं और इसका पता तब चलता है जब जांच के दौरान लिवर एंजाइम बढ़े हुए मिलते हैं या लिवर में फैट जमा होने की बात सामने आती है।

अब सवाल ये है कि अगर किसी को फैटी लिवर हो जाए तो इसे कैसे ठीक किया जा सकता है?
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लिवर की समस्याओं का खतरा - फोटो : adobe stock images
लिवर में फैट जमा होने की समस्याओं का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लिवर की जिन बीमारियों की इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (एमएएसएलडी) उनमें से एक है। इसे पहले नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज कहा जाता था। इसमें लिवर में अतिरिक्त फैट जमा होने लगता है। 
 
  • मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस और खून में लिपिड का स्तर असामान्य होने के कारण इसका खतरा काफी बढ़ जाता है।
  • अगर समय रहते इसकी पहचान न हो पाए या इलाज न हो तो कुछ लोगों में लिवर में सूजन और फाइब्रोसिस होने का जोखिम हो सकता है।

अध्ययनों में एमएएसएलडी की समस्या में विशेषज्ञ ब्लैक कॉफी पीने को सबसे फायदेमंद बताते हैं।
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ब्लैक कॉफी चाय के फायदे - फोटो : Freepik.com
ब्लैक कॉफी पीने फैटी लिवर में फायदे
 
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ रश्मि निरंजन कहती हैं, अध्ययनों में ब्लैक कॉफी पीने से क्रॉनिक लिवर डिजीज, लिवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस तक के जोखिमों को कम करने वाला पाया गया है। वैसे तो कॉफी लिवर की हर बीमारी का इलाज नहीं है, लेकिन इससे बीमारी के लक्षणों को कम करने में विशेष लाभ मिल सकता है। ब्लैक कॉफी को फैटी लिवर की समस्या में सबसे बेस्ट टॉनिक माना जा सकता है। दिन में 2-3 कप ब्लैक कॉफी बड़े कमाल कर सकती है।

अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ लिवर डिजीज की गाइडेंस और कई अध्ययनों में सीमित मात्रा में कॉफी पीने को क्रॉनिक लिवर डिजीज, फैटी लिवर और फाइब्रोसिस के जोखिमों को कम करने वाला पाया गया है।
 
  • कॉफी में कैफीन के अलावा पॉलीफेनॉल और दूसरे बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं। 
  • शोधकर्ताओं का मानना है कि इनमें से कुछ पदार्थ एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव वाले होते हैं। 
  • कॉफी के सेवन को लिवर एंजाइमों को सुधारने और लिवर की बीमारियों को कम करने में विशेष लाभ मिल सकता है।
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डाइट का रखें ध्यान - फोटो : Freepik.com
लिवर के लिए और कौन सी चीजें लाभकारी हो सकती हैं?

लिवर की सेहत को ठीक रखने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ आहार में पौष्टिक चीजों की मात्रा बढ़ाने की सलाह देते हैं। 
 
  • आहार में सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, नट्स-सीड्स, मछली और ऑलिव ऑयल को शामिल करना लिवर के लिए फायदेमंद माना जाता है।
  • आहार में फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे साबुत अनाज, दालें, फल और सब्जियां शामिल करें। ये वजन तथा मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद करते हैं।
  • नट्स-बीज स्वस्थ वसा और अन्य पोषक तत्व प्रदान करते हैं। इन्हें लिवर की सेहत को ठीक रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड वाली चीजें जैसे मछलियां और अखरोट, हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं। इससे भी लिवर की सेहत में सुधार होता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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