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Coronavirus: बीसीजी की वैक्सीन लगे लोगों में नहीं बढ़ता कोरोना का खतरा, एक बार फिर शोध में खुलासा

Sat, 08 Aug 2020 11:40 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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BCG Corona Vaccine - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
मार्च के आखिरी हफ्ते में अमेरिका में एक शोध अध्ययन ने दुनियाभर का ध्यान खींचा था, जिसमें बताया गया था कि टीबी (यक्ष्मा/तपेदिक) से बचाव के लिए नवजात शिशु को दिया जाने वाला बीसीजी का टीका कोरोना वायरस संक्रमण में सुरक्षा देता है। इस स्टडी के मुताबिक कोरोना संक्रमण और उससे हुई मौत के मामले उन देशों में अधिक हैं, जहां बीसीजी टीकाकरण की पॉलिसी या तो नहीं है या फिर बंद हो गई है। वहीं, जिन देशों में बीसीजी टीकाकरण अभियान चल रहा है, वहां कोरोना संक्रमण और मौत के मामले अपेक्षाकृत कम हैं। संदेह और संभावना के बीच इस वैक्सीन का ट्रायल भी शुरू किया गया। अब नीदरलैंड में हुई ऐसी ही एक स्टडी ने एक बार फिर ध्यान खींचा है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
  • दरअसल, वैज्ञानिकों ने ऐसे वॉलेंटियरों के बीच कोरोना संक्रमण के खतरे का तुलनात्मक अध्ययन किया है, जिन्हें बीसीजी का टीका लगाया गया था और जिन्हें यह टीका नहीं लगाया गया था। इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि कोविड-19 महामारी के दौरान बीसीजी का टीका लगे लोग बार-बार बीमार नहीं पड़े या ज्यादा गंभीर बीमार नहीं हुए। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • सेल रिपोर्ट्स मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में स्वस्थ वॉलेंटियरों के ऐसे समूह का अवलोकन और मूल्यांकन किया गया, जिन्हें कोरोना महामारी के इस काल से पूर्व के पांच वर्षो में बीसीजी का टीका दिया गया था। शोधकर्ताओं ने उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली की तुलना ऐसे स्वस्थ वॉलेंटियरों से की गई जिन्हें यह टीका नहीं लगाया गया था।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • नीदरलैंड में रैडबाउड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों समेत अध्ययन में शामिल अन्य शोधकर्ताओं के मुताबिक बीसीजी की वैक्सीन मूल रूप से तपेदिक (टीबी) के इलाज के लिए थी, लेकिन यह प्रतिरक्षा प्रणाली को दीर्घकालिक यानी लंबी अवधि के लिए मजबूत करने में कारगर साबित हुई। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • दरअसल, शुरुआत से यह बात कही जा रही है कि कोरोना संक्रमण का सीधा संबंध व्यक्ति की इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता से है। सीरो सर्वे में यह बात सामने आ चुकी है कि बहुत से लोगों को संक्रमण हुआ और वे अपने आप ठीक भी हो गए। ऐसे में अगर पूर्व की किसी वैक्सीन से व्यक्ति की मजबूत हुई इम्यूनिटी कोरोना संक्रमण से बचा भी सकती है, इसी दिशा में उम्मीद देखी जा रही है।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • हालांकि शोधकर्ताओं ने यह चेतावनी भी दी है कि इस अध्ययन की सीमाएं हैं जो कोरोना के खिलाफ बीसीजी वैक्सीन के फायदेमंद होने का निष्कर्ष निकालने से रोकती है। शोध अध्ययन के लिए सैंपल साइज भी निष्कर्ष को प्रभावित करता है। इसलिए इस दिशा में बड़े पैमाने पर अध्ययन के बाद ही निश्चित तौर पर कुछ कहा जा सकता है। 
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Bcg vaccine - फोटो : Social Media
मार्च में भी हुई थी स्टडी
  • इसी साल मार्च में न्यूयॉर्क इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के डिपार्टमेंट ऑफ बायोमेडिकल साइंसेस की ओर से बीसीजी टीकाकरण वाली आबादी पर कोरोना संक्रमण के असर का विश्लेषण करने वाली एक स्टडी की गई थी। इस स्टडी में बिना बीसीजी टीकाकरण वाले देशों जैसे इटली, अमेरिका, लेबनान, नीदरलैंड और बेल्जियम की तुलना में भारत, जापान, ब्राजील जैसे बीसीजी टीकाकरण वाले देशों में कोरोना संक्रमण और उससे हुई मौत के मामले कम हैं। हालांकि चीन में भी बीसीजी टीकाकरण पॉलिसी है, लेकिन चूंकि कोरोना वायरस की शुरुआत वहीं से हुई, इसलिए इस स्टडी में चीन को अपवाद माना गया।
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Research - फोटो : Pixabay
देश में चल रहा ट्रायल
  • भारतीय कंपनी सीरम इंडिया ने कोरोना के खिलाफ बीसीजी की वैक्सीन का असर जानने के लिए ट्रायल शुरू किया था, जिसके अच्छे परिणाम आ रहे हैं। इसके ट्रायल का तीसरे चरण चल रहा है। बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट (DBT) के मुताबिक, करीब 6,000 लोगों ने इस ट्रायल के लिए पंजीकरण कराया है। वैज्ञानिक ये पता लगाने की कोशिश करेंगे कि कोरोना से सबसे अधिक खतरे का सामना कर रहे लोगों, बुजुर्गों, जटिल बीमारियों से जूझ रहे मरीजों में संक्रमण के प्रभाव को कम करने में BCG Vaccine VPM1002 कितनी कारगर है। 
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