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Heat Stroke: तेज गर्मी और धूप हो सकती है जानलेवा, डॉक्टर ने बताए दो उपाय

Tue, 20 Jun 2023 11:53 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बढ़ रही है हीट स्ट्रोक के कारण दिक्कतें - फोटो : istock
राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश-बिहार सहित देशभर में इन दिनों भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी है। कई राज्यों में दिन का तापमान 45 डिग्री तक पहुंच गया है जिसके सेहत संबंधी कई गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है, बलिया जिला अस्पताल में पिछले 72 घंटों में हीट स्ट्रोक के कारण कम से कम 54 लोगों की मौत हो गई। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, 400 से अधिक लोग वर्तमान में जिला अस्पताल में भर्ती हैं और जो लोग भर्ती हैं उनमें से अधिकतर 60 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के हैं। ज्यादातर राज्यों में यही हालात हैं।

डॉक्टर्स कहते हैं, तापमान बढ़ने के कई अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्वास्थ्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं। हीट स्ट्रोक के जोखिमों के साथ यह हृदय, मस्तिष्क, किडनी और मांसपेशियों के लिए भी समस्याकारक है। दिन-ब-दिन बढ़ते पारा के साथ शरीर के लिए खतरा बढ़ता जा रहा है, सभी लोगों को इस समय विशेष सावधानी और सर्तकता बरतते रहने की आवश्यकता है।
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गर्मी के दुष्प्रभाव - फोटो : iStock
गर्मी के कारण अंगों पर हो सकते हैं दुष्प्रभाव

गर्मी-धूप के दुष्प्रभावों और इससे बचाव के उपायों के बारे में जानने के लिए हमने लखनऊ में इंटेंसिव केयर एक्सपर्ट डॉ भारतेंदु नारायण से बातचीत की। वह कहते हैं जिस प्रकार से इन दिनों गर्मी का दौर जारी है, इसे जानलेवा दुष्प्रभावों वाला माना जा सकता है। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह काफी चुनौतीपूर्ण समय है, थोड़ी सी भी लापरवाही गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।

हमारा शरीर 45 डिग्री तक तापमान सहन करने के योग्य नहीं है, इसलिए अगर बचाव न किया जाए तो हीट स्ट्रोक सहित कई अंगों पर इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
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किडनी में होने वाली समस्याएं - फोटो : istock
ओलिगुरिया की देखी जा रही है समस्या

डॉ भारतेंदु बताते हैं, इन दिनों अस्पताल में अधिकतर लोग जो गर्मी के दुष्प्रभावों के कारण भर्ती हो रहे हैं उनमें ओलिगुरिया की समस्या देखी जा रही है, यह ऐसी स्थिति है जिसमें डिहाइड्रेशन के कारण किडनी पर्याप्त मात्रा में मूत्र का उत्पादन नहीं कर पाती है। चूंकि हम जितना पानी पीते हैं उसकी ज्यादातर मात्रा पसीने के रूप में शरीर से बाहर निकल जाती है, जिससे किडनी में पानी कम मिल पाता है।

यही कारण है कि गर्मी के दिनों में हमें कम बार पेशाब जाने की अनुभूति होती है, यह किडनी की सेहत के लिए हानिकारक स्थिति है।

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हीट स्ट्रोक के जोखिम - फोटो : pixabay
हीट स्ट्रोक हो सकती है जानलेवा

डॉ भारतेंदु कहते हैं, जिस तरह से अभी दिन के समय का तापमान बढ़ा हुआ रह रहा है, इसमें जरा सी भी लापरवाही हीट स्ट्रोक का कारण बन सकती है। हीटस्ट्रोक एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपका शरीर बहुत अधिक गर्म हो जाता है और शरीर सामान्य रूप से तापमान को नियंत्रित नहीं कर पाता है।

आमतौर पर लंबे समय तक धूप संपर्क में रहने या उच्च तापमान के कारण यह दिक्कत होती है। हीटस्ट्रोक में शरीर का तापमान 104 F या इससे अधिक हो सकता है। गर्मी के कारण होने वाली मौतों की एक प्रमुख वजह हीट स्ट्रोक होना और समय पर इसका इलाज न हो पाना है।
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डिहाइड्रेशन से करें बचाव - फोटो : Pixabay
हीट स्ट्रोक और गर्मी की अन्य समस्याओं से कैसे बचें?

डॉ भारतेंदु बताते हैं, हम सभी के लिए जरूरी है कि इन दिनों जितना हो सके गर्मी और धूप के सीधे संपर्क में आने से बचें। इसके लिए दो बातों का सबसे अधिक ध्यान दिया जाना आवश्यक है।
  • पहला- अधिक से अधिक पानी पीते रहें, शरीर को ठंडा रखने के लिए यह बहुत आवश्यक है।
  • दूसरा- धूप में बिल्कुल न जाएं, विशेषतौर पर दोपहर 11 बजे से 3 बजे तक घर से बाहर निकलने से बचें।

इसके अलावा शरीर को गर्मी के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए हल्के रंग के, ढीले कपड़े पहनें। ध्यान रहे गर्मी का दुष्प्रभाव तब और ज्यादा हो जाता है जब हमारे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। पेट को पानी से भरे रहें, यह गर्मी के दुष्प्रभावों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है। 
 
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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